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जबलपुर में डेंगू हुआ खतरनाक:शॉक सिंड्रोम से पीड़ित मिले मरीज, अंग फेल होने का खतरा सबसे अधिक हुआ, मौत के मुंह से जाकर बचा आरक्षक

जबलपुरएक महीने पहले
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डेंगू हुआ खतरनाक, शॉक सिंड्रोम से पीड़ित मिले मरीज। - Money Bhaskar
डेंगू हुआ खतरनाक, शॉक सिंड्रोम से पीड़ित मिले मरीज।

शहर में पिछले तीन महीने से कहर ढा रहा डेंगू अब खतरनाक स्थित में पहुंच चुका है। जबलपुर में शॉक सिंड्रोम से पीड़ित मरीज मिले हैं। इस स्थित में मरीज के जरूरी अंग फेल होने का खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

शहर के हनुमानताल थाने में पदस्थ आरक्षक जय किशोर सिंह (34) डेंगू से पीड़ित थे। 16 सितंबर को हालत खराब हो गई थी। शहर के मेट्रो हॉस्पिटल में उसे भर्ती कराया गया था। उस समय उसका हार्ट्र 33 प्रतिशत ही काम कर रहा था। लाइफ सपोर्ट पर रख गया था। उसे मुंह, नाक और गुदा द्वार से ब्लडिंग होने लगी थी। डॉक्टर शैलेंद्र राजपूत के मुताबिक आरक्षक शॉक सिंड्रोम में पहुंच गए थे। एचएफएनओ पर लेना पड़ा था। हार्ट बीट को बढ़ाने वाली दवाओं का प्रयोग करना पड़ा। उसे हार्ट अटैक भी आ गया था। 24 घंटे उसे निगरानी में रखा गया था। अब मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुका है और अस्पताल से छुट्‌टी भी मिल गई है।

दो प्रतिशत मरीज पहुंच रहे शॉक सिड्रोम में

डॉक्टर शैलेंद्र सिंह राजपूत के मुताबिक हमारे यहां आने वाले 2 प्रतिशत मरीज इसी तरह के लक्षण वाले आ रहे हैं। डेंगू के बहुत से मरीज टायफाइड की जांच कराकर इलाज शुरू कर लेते हैं। जबकि डेंगू के मरीजों की टायफाइड रिपोट पॉजिटिव आती है। चार से पांच दिन इसकी दवा करते रहने से मरीज की हालत बिगड़ रही है। इसके अलावा लोग डेंगू से बचने के लिए कई तरह का काढ़ा आदि पीने लगते हैं। इससे उलटी होती है और शरीर में पानी की कमी आ जाती है। इससे भी मरीज शॉक सिंड्रोम में पहुंच रहे हैं।

इस तरह शॉक सिंड्रोम असर दिखाता है

विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू पीड़ित को समय पर इलाज नहीं मिलने पर उसकी खून की नलियों में सूजन से अंदर का द्रव रिसकर लीवर, फेफड़े, पेट के आसपास जमा होने लगता है। ये किडनी और हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ा देता है। ये काम करना बंद कर देते है। मल्टी ऑर्गन फेलियर की आशंका बढ़ जाती है। सामान्य बुखार समझकर दवा लेने वाले मरीजों में इस तरह के लक्षण अधिक मिल रहे हैं।

विक्टोरिया अस्पताल में डेंगू और वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों से वार्ड फुल।
विक्टोरिया अस्पताल में डेंगू और वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों से वार्ड फुल।

वायरल बुखार और डेंगू में अंतर समझने के लिए जांच जरूरी

मेडिसिन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस शर्मा के मुताबिक अभी वायरल बुखार के साथ ही डेंगू मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में समय पर जांच कराकर ये पता लगाना जरूरी है कि असल बीमारी क्या है। डेंगू में प्लेटलेट्स कम होना बड़ी समस्या नहीं है। साधारण डेंगू में बुखार के साथ प्लेटलेट्स कम होती है, लेकिन फिर धीरे-धीरे बढ़ जाती है। पर समय पर इलाज न मिलने से स्थित बिगड़ रही है।

डेंगू का असर ज्यादा होने पर वेसल्स से फ्लूट बाहर आने पर मरीज को शॉक सिंड्रोम से बचाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीज तेज बुखार के बाद धीरे-धीरे होश खोने लगते है। बीपी एकदम से लो हो जाता है। मल्टीऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू पर पानी खूब लें। पौष्टिक खानपान अपनाएं। बुखार होने पर सिर्फ पैरोसिटामॉल लें। कोई और पेन किलर ना लें।

जिले में डेंगू के 24 नए मरीज मिलें

जिले में 19 सितंबर को डेंगू के 24 नए मरीज मिलें है। इसकी पुष्टि एलायजा टेस्ट के बाद हुई है। इसमें 18 मेडिकल में भर्ती बताएं गए हैं। जिले में अब डेंगू के कुल मरीजों की सरकारी संख्या 522 हो चुकी है। इसके अलावा 10 मलेरिया और 41 चिकनगुनिया के पीड़ित सामने आ चुके हैं। अस्पतालों की ओपीडी और प्राइवेट क्लीनिक में वायरल बुखार के मरीजों की कतार भी कम नहीं हो रही है। सर्दी-खांसी, गले और बदन में दर्द के साथ बुखार की शिकायत लेकर 500 से अधिक मरीज पहुंच रहे है।

कूलर व खाली गमलों के भरे पानी में मिल रहे डेंगू के लार्वा।
कूलर व खाली गमलों के भरे पानी में मिल रहे डेंगू के लार्वा।

आइएमए आगे आया- बोला डरें नहीं, बचाव करें

  • डेंगू मच्छरों से फैलता है। मच्छर का लार्वा सामान्यत: घर बर्तनों, कूलर, गमलों के पानी, खुले में रखे कबाड़, गड्ढों में जमा साफ पानी में पनपते है। इसलिए पानी जमा ना होने दें। घर में स्टोर पानी को 5-6 दिन में खाली करके अच्छे से सूखाकर दोबारा पानी भरें।
  • डेंगू के मच्छर दिन में खासकर सुबह के समय काटते है। लोग रात में मच्छरदानी लगाकर बेफिक्र हो जाते है। जरुरी है कि दिन के समय मच्छर ना काटें इसका उपाय करें। शरीर को पूरी तरह ढंकने वाले कपड़े पहनें। छोटे बच्चों को मच्छरदानी में रखें।
  • बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। ब्ल्ड प्रेशर नापें। ढेर सारी जांच की बजाय बुखार में सीबीसी (जिसमें प्लेटलेट्स काउंट पता चलें), डेंगू के लिए रक्त परीक्षण और मलेरिया की जांच की मुख्य भूमिका होती हैं।
  • डेंगू मरीज को तेज बुखार आने पर पैरोसिटामॉल की गोली डॉक्टर से परामर्श करके दें। इसमें कोई भी एंटीबायोटिक असरकारी नहीं है। बुखार पीड़ित के शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए खूब पानी पीएं। तरल पदार्थ का सेवन करें।

(जैसा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दीपक साहू एवं सचिव डॉ. ब्रजेश चौधरी ने बताया।)

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