पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX61765.590.75 %
  • NIFTY18477.050.76 %
  • GOLD(MCX 10 GM)47184-1.49 %
  • SILVER(MCX 1 KG)62935-0.03 %

तीसरी महिला की अंगदान की रह गई आरजू:ब्रेन डेथ व अंगदान की इच्छा के बीच हार्टअटैक से हो गई मौत, अब आंखें व त्वचा की डोनेट

इंदौरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
संगीता अग्रवाल - Money Bhaskar
संगीता अग्रवाल

अंगदान में अग्रणी रहे इंदौर में सोमवार को फिर 42वां ग्रीनडोर बनने की तैयारी थी लेकिन परिवार ने जिस महिला को ब्रेन डेथ बताया था उसकी ब्रेन डेथ परीक्षण के पूर्व ही कार्डियेक अरेस्ट (हार्ट अटैक) से मौत हो गई। इसके चलते अब उसकी आंखें व त्वचा डोनेट की गई है। खास बात यह कि अगर महिला को हार्टअटैक नहीं होता तो पांच दिन में यह तीसरा अवसर होता जब तीन महिलाओं की मौत के बाद और लोगों को भी जीवनदान मिलता।

राजश्री अपोलो हॉस्पिटल जहां संगीता की मौत हुई।
राजश्री अपोलो हॉस्पिटल जहां संगीता की मौत हुई।

दरअसल, इंदौर में जिस प्रकार अंगदान के मामले बढ़ रहे हैं उससे न केवल बीमार व्यक्ति बल्कि संबंधित की ब्रेन डेथ के बाद उसके परिवार में भी मानवीय संवेदनाएं तेजी से जागृत हो रही हैं। रविवार को नेहा चौधरी निवासी पार्श्वनाथ नगर के चोइथराम हॉस्पिटल में लीवर, दोनों किडनियों, आंखें और त्वचा डोनेट करने के बाद 41वां ग्रीन कॉरिडोर बना था। इस बीच समन्वय संस्था इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन व मुस्कान संस्था को शुजालपुर के एक अग्रवाल परिवार ने सूचना दी कि परिवार की 60 वर्षीय संगीता अग्रवाल की राजश्री अपोलो हॉस्पिटल (इंदौर) में ब्रेन डेथ हो गई है। उसे 17 सितम्बर को भर्ती किया गया था। परिवार ने यह भी बताया कि कुछ समय खुद संगीता ने इच्छा जाहिर की थी कि मेरी मौत के बाद मेरे सारे महत्वपूर्ण अंग जरूरतमंद को डोनेट कर देना जिससे मुझे सकुन मिलेगा। खुद परिवार के लोग भी सहमत थे और उन्होंने कहा कि वे तुरंत संगीता के अंग ट्रांसप्लांट करना चाहते हैं।

टीम के सामने ही हो गई मौत

इधर, नेहा चौधरी के ट्रांसप्लांट में जुटी टीमों को काफी देर हो चुकी थी, फिर टीमें भी तैयार हुई। मुस्कान संस्था के जीतू बागानी व संदीपन आर्य टीम के साथ रविवार रात राजश्री अपोलो हॉस्पिटल पहुंचे। वैसे किसी की भी ब्रेन डेथ होने पर जब ट्रांसप्लांट का मामला होता है तो स्पेशल टीम दो बार उसका परीक्षण करती है और फिर ब्रेन डेथ घोषित करने के बाद ही ट्रांसप्लांट के लिए रिट्रिवल टीम (अंग निकालने वाली डॉक्टरों की टीम) सक्रिय होती है। बहरहाल, मुस्कान संस्था की टीम हॉस्पिटल पहुंची और संगीता की स्थिति की तस्दीक कर ही थी इस बीच उन्हें हार्टअटैक आ गया और मौत हो गई। चूंकि अंगदान केवल ब्रेन डेथ की स्थिति में ही किए जा सकते हैं जबकि अन्य तरीके से हुई मौत के बाद बाकी अंग भी शिथिल हो जाते हैं, इसके चलते संगीता व परिवार की अंगदान की इच्छा अधूरी रह गई।

दूसरों की जिंदगी में उजियारा करेगी आंखें

संगीता के पति जितेंद्र अग्रवाल की शुजालपुर में किराना व्यवसायी है। परिवार में एक बेटा है। हालांकि मौत के बाद आंखें व त्वचा डोनेट की जा सकती है। ऐसे में परिवार ने दोनों को डोनेट करने की इच्छा जताई। इस पर सोमवार सुबह संगीता की आंखें डोनेट करने के साथ एमके इंटरनेशनल आई बैंक (इंदौर) और त्वचा चोइथराम हॉस्पिटल के स्किन बैंक में पहुंचाई गई। अग्रवाल परिवार को एक ओर मलाल इस बात का है कि वे संगीता की इच्छा पूरी नहीं कर सके, वहीं थोड़ा सकुन इस बात को लेकर है कि उसकी आंखों से अब दूसरी कि जिंदगी में उजियारा होगा, वहीं जरूरतमंदों को उसकी त्वचा भी काम आएगी। सुुबह 11.30 बजे मुस्कान संस्था द्वारा संगीता के शव को परिवार के साथ एम्बुलेंस से शुजालपुर पहुंचा दिया गया।

खबरें और भी हैं...