पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

फायर ऑडिट:11 अस्पतालों में स्मोक अलार्म, फायर स्प्रिंकलर सिस्टम ही नहीं

इंदौर4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

निगम द्वारा शहर के 240 अस्पतालों के फायर सेफ्टी ऑडिट करवाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में 11 अस्पतालों में कमियां देखने को मिली हैं। जांच में प्रमुख रूप से स्मोक अलार्म, फायर स्प्रिंकलर सिस्टम और होज रील नहीं होने की गड़बड़ियां पाईं गई हैं। प्राथमिक पड़ताल में यह भी खुलासा हुआ कि सरकार द्वारा तय फायर कंसल्टेंट निजी कंपनियों में कार्यरत होने के कारण फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए मौके पर नहीं जा रहे हैं। इसकी शिकायत भी मुख्यमंत्री से की गई है।

इन अस्पतालों में मिली कमियां

आदित्य हॉस्पिटल (उषानगर), आकाश हॉस्पिटल (बिचौली मर्दाना), बारोड हॉस्पिटल (न्यायनगर सुखलिया), चिरायु हॉस्पिटल (चंदननगर), इंदौर आई हॉस्पिटल सोसायटी (एमओजी लाइन्स), महावीर नर्सिंग होम (स्कीम 71), एमएएससी हॉस्पिटल (स्कीम 140), नारायणी हॉस्पिटल (स्कीम 140), सेवाकुंज हॉस्पिटल (कनाड़िया), रामा हेल्थ केयर नर्सिंग होम और रोशनी आई क्लिनिक एंड सर्जरी (सुदामा नगर) में नेशनल बिल्डिंग कोड पार्ट-4 के प्रावधानों के अनुसार फायर सेफ्टी के बिंदुओं में कमियां पाईं गईं।

ये हैं फायर सेफ्टी के नियम- निगम ने शहर के 240 अस्पतालों का कराया था ऑडिट

​​​​​​1. अस्पताल में हाइड्रेंट होना चाहिए ताकि आग लगने पर सीधे आग बुझाने के प्रबंध हो सकें।
2. हर फ्लोर पर होज रील भी हाईड्रेंट के साथ होनी चाहिए ताकि इससे आग लगने वाले स्थान तक पानी की बौछार छोड़ी जा सके।
3. अस्पताल के हर फ्लोर पर तय मानक अनुसार अग्निशमन यंत्र चालू स्थिति में होने चाहिए।
4. आईसीयू के साथ ही कॉरिडोर व कमरों में स्मोक डिटेक्टर होने चाहिए ताकि धुएं के साथ तत्काल संबंधित स्टाफ को सूचना मिल सके।

5. हर फ्लोर पर कॉल पाइंट होना चाहिए, जहां पर धुआं उठने या आग लगने की स्थित में ट्रेंड स्टाफ तक जानकारी पहुंच सके। 6. बेसमेंट या लॉबी में स्प्रिंकलर सिस्टम होना चाहिए, ताकि आग लगने पर अपनेआप पानी की फव्वार शुरू हो सके। 7. अस्पताल के साइज के मान से पानी की टंकी होनी चाहिए, जो हमेशा फुल रहनी चाहिए। 8. अस्पताल में फायर सेफ्टी के उपकरण चलाने में दक्ष स्टाफ व फायर ऑफिसर होना चाहिए।

मौके पर ही नहीं जाते फायर कंसल्टेंट, मुख्यमंत्री तक पहुंची थी शिकायत

अस्पतालों की फायर सेफ्टी में फायर कंसल्टेंट द्वारा भी लापरवाही बरती जा रही है। शासन द्वारा तय फायर कंसल्टेंटों में 90 प्रतिशत निजी कंपनियों में कार्यरत हैं। फायर एनओसी या ऑडिट के लिए वे खुद मौके पर जा ही नहीं रहे हैं। इससे उनके द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में खामियां मिलना स्वाभाविक है। हमने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से 21 दिसंबर 2021 को ही की है।

जहां भी फायर सेफ्टी में लापरवाही मिलेगी उस पर कार्रवाई की जाएगी : अपर आयुक्त

240 अस्पतालों ने फायर सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट सौंपी है। जांच 11 अस्पतालों में कमियां मिली हैं। अस्पतालों को नोटिस देकर गड़बड़ियां सुधारने के लिए समय दिया गया है। अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि वे नियमानुसार पुख्ता व्यवस्था रखें। लापरवाही मिलने पर अस्पतालों की सील करने की कार्रवाई की जाएगी।- संदीप सोनी, अपर आयुक्त, नगर निगम

खबरें और भी हैं...