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बिजली को मिला बारिश का सहारा:शहर में छह लाख तो कंपनी क्षेत्र में 50 लाख यूनिट मांग घटी; सिंचाई के लिए पंप नहीं चलाना पड़े

इंदौरएक महीने पहलेलेखक: राहुल दुबे
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अक्टूबर में दिन में तेज धूप, फिर शाम को ठंडा मौसम हाे जाता है। - Money Bhaskar
अक्टूबर में दिन में तेज धूप, फिर शाम को ठंडा मौसम हाे जाता है।

बीते दो दिन से जारी बारिश ने बिजली को राहत दी है। अकेले इंदौर शहर में ही हर दिन छह लाख यूनिट बिजली की मांग घट गई है। कंपनी क्षेत्र यानी इंदौर-उज्जैन संभाग में 50 लाख यूनिट बिजली की मांग कम हुई है। तापमान में अपेक्षाकृत कमी आने से घरेलू मांग में गिरावट आई है, वहीं एक से तीन इंच वर्षा से सिंचाई के लिए उपयोग होने वाली बिजली की मांग में भी व्यापक कमी देखने को मिली है। बिजली कंपनी की ताजा मांग साढ़े पांच करोड़ यूनिट है, जबकि पहले यह छह करोड़ यूनिट से ज्यादा थी।

तीसरा साल जब अक्टूबर भी जुलाई-अगस्त की तरह बीत रहा

यह तीसरा साल है, जब अक्टूबर में भी जुलाई-अगस्त जैसी सक्रिय बारिश हो रही है। रविवार रात से सोमवार तड़के तक कभी तेज तो कभी धीमी गति से पानी बरसता रहा। 15 सालों में केवल 2013 का अक्टूबर ऐसा था, जब महीनेभर में 4 इंच पानी गिरा था। सितंबर के अंत में मानसून विदा होने के बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह में 1 से 3 मिलीमीटर ही पानी गिरा। फिर अक्टूबर में दिन में तेज धूप, फिर शाम को ठंडा मौसम हाे जाता है। इस बार भी अक्टूबर अपने मिजाज के अनुरूप बीत रहा था, लेकिन फिर नमी मिलने से बारिश जैसे हालात बन गए।

मानसून का दायरा बढ़ रहा है

मौसम विशेषज्ञ अजय कुमार शुक्ला का कहना है कि मानसूनी गतिविधि का दायरा अब अक्टूबर तक भी फैल गया है। पहले 1 जून से ही प्री-मानसून सक्रिय हो जाता था, लेकिन अब जून में कुछ खास बारिश नहीं होती। सितंबर में मानसून विदा होने के बाद भी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बन रहे हैं। ऐसा पिछले तीन-चार सालों से होता आ रहा है। आने वाले वर्षों में भी बारिश का दायरा अक्टूबर तक रहने वाला है।

गेहूं, चने के लिए जमीन तैैयार कर गई बारिश

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जहां पर सोयाबीन कट चुकी है, वहां पर गेहूं, चने की बुआई की तैयारी शुरू हो गई है। गेहूं की बोवनी से पहले खेतों को सींचा जाता है। घंटों तक बोरिंग, ट्यूबवेल चलाकर खेतों में पानी छोड़ा जाता है। इसके बाद बीज लगाया जाता है। दो दिन में हुई तेज बारिश से खेतों को अच्छा खासा पानी मिल गया है। इस कारण दोनों संभाग के 16 जिलों में सिंचाई के लिए बिजली का पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। यही वजह है कि कंपनी क्षेत्र में छह करोड़ की डिमांड घटकर साढ़े पांच करोड़ रह गई।

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