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दिव्यांगों के लिए उत्कृष्ट काम में इंदौर सिरमौर:लॉक डाउन में दिव्यांगों की हरसंभव की मदद, कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए स्पेशल कोचिंग

इंदौर3 महीने पहले
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स्वच्छता, स्मार्ट सिटी, वाटर प्लस, वैक्सीनेशन के मामले में देश में अव्वल रहे इंदौर ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और उपलब्धि पाई है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने के क्षेत्र में इंदौर जिले को सर्वश्रेष्ठ जिले के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। 3 दिसंबर 2021 को ‘विश्व दिव्यांग दिवस’ के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा इंदौर जिले को इसके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देशन में इंदौर जिले को डिसेबल्ड फ्रेंडली बनाने के लिए विभिन्न तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के परिणाम स्वरुप इंदौर ने यह उपलब्धि पाई है।

इसलिए इंदौर ने पाई यह उपलब्धि

  • यहां स्थापित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (District Disabled Rehabilitation Center) के माध्यम से 4500 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को उपचार एवं मेडिकल सुविधाएं प्रदान की गई।
  • पुनर्वास केंद्र में जिले के शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम को जिले के दिव्यांगजनों के साथ बेहतर संपर्क बनाने के लिए समय-समय पर ट्रेंड किया जा रहा है।
  • पुनर्वास केंद्र द्वारा लगातार जन जागरण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
  • खासकर कोरोना काल व लॉकडाउन में जिले में फंसे 275 से अधिक छात्रों एवं मजदूरों को उनके गृह जिलों में भेजा गया था।
  • दिव्यांगजन हेल्पलाइन द्वारा 500 से अधिक दिव्यांगजनों की ऑनलाइन काउंसलिंग की गई थी।
  • इंदौर में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को कॉम्पीटिशन की तैयारी के लिए स्पेशल कोचिंग क्लासेस भी आयोजित की जा रही हैं।
  • इंदौर मध्य प्रदेश का ऐसा पहला जिला है जहां छठी क्लास के दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए स्मार्ट क्लासेस भी आयोजित की जा रही हैं।
  • इंदौर में ज्यादा से ज्यादा दिव्यांगजनों को यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड भी वितरित किए जा रहे हैं।
  • जिले में संचालित किए जा रहे 32 स्पेशल स्कूलों में 3,200 से अधिक दिव्यांग छात्र-छात्राओं को ट्रेंड किया जा रहा है। इसी दिशा में दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए 2 होस्टल भी बनाए गए हैं।