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  • After The Death Of A Female Doctor, A Kidney Will Be Transplanted To A Patient Of CHL Hospital, 7 Km Away, And To A Patient Of Bhopal's Liver.

इंदौर में 23 महीने बाद 40वां ग्रीन कॉरिडोर बना:महिला डॉक्टर की मौत के बाद तीन को मिला जीवनदान; एक किडनी 7 मिनिट में सीएचएल हॉस्पिटल के मरीज को पहुंचाई गई तो लीवर भोपाल के मरीज को ट्रांसप्लांट

इंदौर2 महीने पहले
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डॉ. संगीता पाटिल जिनकी दोनों किडनियां व लीवर ट्रांसप्लांट किए गए। - Money Bhaskar
डॉ. संगीता पाटिल जिनकी दोनों किडनियां व लीवर ट्रांसप्लांट किए गए।

अंगदान में अव्वल रहे इंदौर में गुरुवार शाम 7.30 एक बार फिर ग्रीन कॉरिडोर बनकर बनाया गया। यह ग्रीन कॉरिडोर डेंटल सर्जन डॉ. संगीता पाटिल की मौत के बाद परिवार की सहमति से बनाया गया। 52 वर्षीय डॉ. सुनीता पिछले दिनों सड़क हादसे में घायल हो गई थी जिस पर उन्हें एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। इस दौरान उनके ब्रेन डेड की स्थिति को देखते हुए उन्हें चोइथराम हॉस्पिटल में रैफर किया गया था जहां बुधवार शाम 6 बजे डॉक्टरों की कमेटी ने ब्रेन डेड सर्टिफाइड किया। परिवार की सहमति के बाद इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन सक्रिय हुई और कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा से चर्चा कर ग्रीन कॉरिडोर तैयार करवाया। इसके तहत एक किडनी तो वहीं चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती डिंडोरी के एक मरीज तथा दूसरी सीएचएल अस्पताल में भर्ती कोटा एक मरीज को ट्रांसप्लांट की गई। ऐसे ही लीवर को भोपाल के बंसल हॉस्पिटल में भर्ती एक व्यक्ति को ट्रांसप्लांट के लिए मात्र 2.35 मिनिट में पहुंचाया गया। खास बात यह कि चोइथराम हॉस्पिटल से लेकर सीएचएल हॉस्पिटल तक 7 किमी की दूरी मात्र 7 मिनिट में तय कर किडनी पहुंचाई गई। इसके लिए तैयारियां दोपहर से की गई थी।

चोइथराम हॉस्पिटल से आर्गन्स बॉक्स को नजाकत के साथ बाहर लाता स्टाफ।
चोइथराम हॉस्पिटल से आर्गन्स बॉक्स को नजाकत के साथ बाहर लाता स्टाफ।

दरअसल किसी भी मरीज को ब्रेन डेथ डिक्लियर करने के पहले डॉक्टरों की एक कमेटी दो बार ब्रेन डेथ की जांच करती है। बुधवार शाम 4 बजे पहली एप्निया जांच की गई। फिर शाम 6 बजे ब्रेन डेथ सर्टिफाइड किया गया। इसके बाद गुरुवार को स्पेशल टीम ने परीक्षण कर 9.55 बजे डेथ सर्टिफाइड किया। फिर तमाम प्रोसेस कुछ ही घंटों में तैयार की गई। इसके तहत अलग-अलग मेडिकल टीम ने दोनों किडनियां व लीवर निकालकर सुरक्षित किया। इन्हें ऑर्गन्स बॉक्स में पैक कर एम्बुलेंस में रखा गया। फिर तुरंत प्रक्रिया को गति दी गई। इसके पूर्व संगीता की बेटी व मामा से कमिश्नर डॉ. शर्मा व अन्य डॉक्टरों से बात हुई।

9 मिनिट में 9 चौराहों पर मिलता रहा खुला रास्ता

तैयारियों के तहत ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों से समन्वय कर लिया था। इसके तहत चोइथराम हॉस्पिटल से सीएचएल हॉस्पिटल तक 7 किमी रास्ते पर ट्रैफिक खुला, इसके लिए व्यवस्था जमा ली गई थी। एम्बुलेंस चोइथराम से रवाना होकर पास का एक चौराहा पार करने बाद राजीव गांधी चौराहा, भंवरकुआ, टॉवर चौराहा, जीपीओ, शिवाजी प्रतिमा, गीता भवन, पलासिया, इण्डस्ट्रीज हॉउस इन मुख्य चौराहों से गुजरी और 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने व्यवस्था संभाली। हालांकि राजीव गांधी चौराहा से सीएचएल हॉस्पिटल तक बीआरटीएस के अंदर से ही दोनों एम्बुलेंस (दूसरी भोपाल के लिए) गुजरी। इसमें पहले भोपाल के लिए एम्बुलेंस रवाना की गई। इसके तुरंत बाद दूसरी एम्बुलेंस सीएचएल के लिए रवाना की गई।

टाइम लिमिट में ऑर्गन्स बॉक्स को एम्बुलेंस में रखकर रवाना किया गया।
टाइम लिमिट में ऑर्गन्स बॉक्स को एम्बुलेंस में रखकर रवाना किया गया।

भोपाल तक सभी टोल टैक्स चौराहों को किया अलर्ट

ऐसे ही लीवर 200 किमी दूर भोपाल के बंसल हॉस्पिटल में रवाना करने के लिए सभी लोकल सभी चौराहों पर रास्ता बनाया गया वहीं भोपाल तक से सभी टोल टैक्स को अलर्ट किया गया कि एम्बुलेंस को बिना किसी बाधा के जाने दिया जाए। वैसे इंदौर में देवास नाका तक मुख्य स्थानों पर जहां जाम लगता है वहां पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया ताकि लीवर सही समय पर भोपाल पहुंच सके।

अब तक 40 ग्रीन कॉरिडोर बनने का इतिहास

दरअसल, डॉ. संगीता पाटिल की ब्रेन डेड की सूचना के बाद से ही मुस्कान सेवादार समन्वय काम में जीतू बगानी, संदीपन आर्य, रेणु जयसिंघान, राजेंद्र माखीजा, लोकेश बगानी, हरपाल सितलानी, नरेंद्र मनवानी, लक्की खत्री आदि लगे रहे। इसके साथ ही चोइथराम हॉस्पिटल के डॉ. हरीश तोरानी, डॉ. सुनील चांदीवाल, डॉ. रतन सहजपाल, डॉ आनंद सांघी लगे हैं। वैसे शहर में यह पहला मौका है जब किसी डॉक्टर की मौत के बाद अंगदान हो रहा हो। शहर में इसके सहित अब तक 40 ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान हो चुके हैं। पिछली बार अक्टूबर 2019 में ब्रेन डेड पेशेंट के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।

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