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  • The Younger Brother's Kidney Deteriorated, The Doctor Shifted On Dialysis, Threatening His Life, The Sister Would Give Her Kidney To Give Life

बहन ने बढ़ाया रक्षासूत्र का मान:छाेटे भाई की दाेनाें किडनी खराब, डाॅक्टर ने जान काे खतरा बताकर डायलिसिस पर शिफ्ट किया, जीवनदान देने बहन देगी अपनी किडनी

धारएक महीने पहलेलेखक: सुनील उमरवाल
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  • : शहर के मगजपुरा निवासी युवक की पिछले लाॅकडाउन में तबीयत खराब होने पर किडनी की जानकारी मिली
  • 26 फरवरी काे इंदाैर में जांच कराने पर पता चला, अब 23 सितंबर काे इंदाैर में हाेगा ऑपरेशन

छाेटे भाई पर संकट आया ताे रक्षा सूत्र का मान बढ़ाते हुए उसे जीवनदान देने के लिए बहन आगे आई है। जब भाई की दोनों किडनी खराब होने की जानकारी बहन को लगी तो वह अपनी एक किडनी भाई को देने के लिए तैयार हाे गई। इंदाैर के अस्पताल में जांच कराने के बाद किडनी मैच हाेने के बाद प्रशासन से अनुमति मिलने से 23 सितंबर काे ऑपरेशन हाेगा।

इसमें बहन अपनी एक किडनी देकर भाई के प्राणों की रक्षा करेगी ताकि आगामी रक्षाबंधन पर्व पर अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सके। माता-पिता के बुजुर्ग हाेने, साढ़े छह माह से सप्ताह में दाे बार डायलिसिस हाेने और अब दोनों किडनियों के काम करना बंद करने से परिवार सहित रिश्तेदार भी चिंता में थे।

शहर के मगजपुरा निवासी 38 वर्षीय चंदर पिता किशनलाल लश्करी आरईएस विभाग धार में अस्थाई भृत्य पदस्थ है। लश्करी काे गत लाॅकडाउन में पैट दर्द, पैर में सूजन आने की शिकायत हुई थी। शहर के एक डाॅक्टर काे दिखाया ताे उन्हाेंने जांचें लिखी थीं। जिसमें किडनी में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। जब तक किडनी में संक्रमण फैल चुका था। 26 फरवरी काे इंदाैर जाकर निजी अस्पताल में जांच कराई थी।

वहां डाॅ. जय कपलानी व टीम ने एक किडनी पूरी तरह से खराब हाेने और दूसरी किडनी 90 प्रतिशत खराब हाेना बताई। इससे जान काे खतरा बताते हुए किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह देते हुए डायलिसिस पर शिफ्ट किया। 2 मार्च काे इंदाैर में भर्ती कर एक सप्ताह निरंतर डायलिसिस चला।

डिस्चार्ज करने के बाद से सप्ताह में दाे बार इंदाैर जाकर डायलिसिस कराना पड़ रहा था। गत साढ़े छह माह से उपचार चलने व सप्ताह में दाे बार डायलिसिस कराने सहित दवाई गाेली पर 6 से 7 हजार रु. खर्च हाेने से परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से खराब हाे गई। इस परेशानी काे देख नाहर दरवाजा देवास निवासी 60 वर्षीय बड़ी बहन मंजूबाई पति स्व. रमेशचंद्र यादव ने भाई की जान काे बचाने के लिए किडनी देने का फैसला किया। इसके लिए 80 से 90 हजार रु. खर्च कर बड़ी बहन की जांच कराई ताे किडनी मैच हाे गई।

दाे बड़े भाइयाें व दाे छाेटी बहनाें ने भी कराई थी जांच, नहीं हुई मैच
भाई काे परेशानी में घिरा देख दाे बड़े भाइयाें व दाे छाेटी बहनाें ने भी अपनी किडनी देने के लिए जांच कराई थी। हालांकि इनमें से किसी भी किडनी मैच नहीं हाे पाई। इससे परिवार भी चिंता में पड़ गया था कि अब किडनी कैसे अरेंज कर पाएंगे। बड़ी बहन मंजूबाई यादव ने खुद की किडनी देने का निर्णय लेकर जांच कराई। इसमें दाेनाें किडनी सही पाई गई और भाई की किडनी से मैच हाे गई। मां के इस निर्णय और मामा पर आए संकट काे देख तीन भांजाें ने भी मां के इस निर्णय पर सहमति दे दी। किडनी ट्रांसप्लांट हाेने से डायलिसिस से भी छुटकारा मिलेगा।

जनप्रतिनिधि औरअफसर भी आगे आए
चूंकि परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है। इसमें करीब 10 लाख रु. का खर्च आएगा। यह बात जब शहर के जनप्रतिनिधियाें व अफसराें काे मिली ताे उन्हाेेेंने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। सांसद छतरसिंह दरबार, विधायक नीना वर्मा, कलेक्टर डाॅ. पंकज जैन, एडीएम सलाेनी सिडाना ने भी कागजी कार्रवाई कर परिवार काे शासन स्तर से मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।

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