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देवास में बैंक से रजिस्ट्री गुम:पीड़िता का बेटा बोला- मां 3 साल से बैंक के चक्कर काट रही, नहीं मिल रहा संतोषजनक जवाब

देवासएक महीने पहले
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जब भी किसी राष्ट्रीयकृत या प्राइवेट बैंक में कोई व्यक्ति ऋण लेने जाता है तो उससे ऋण देने के बदले में या तो चल संपत्ति के मूल दस्तावेज बैंक में गिरवी रखवाते हैं या फिर किसी अन्य व्यक्ति को जमानतदार बनवाते हैं। तब कहीं जाकर ऋण स्वीकृत किया जाता है।

यदि हितग्राही बैंक द्वारा मांगे गए एक भी कागज उपलब्ध नहीं कराए तो उसे ऋण ही नहीं दिया जाता है। बैंकों द्वारा ऋण देते समय तो काफी नियम-कायदे बताए जाते है, किंतु बाद में लापरवाही बरती जाती है और उसका खामियाजा हितग्राहियों को भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा सिरोल्या का सामने आया है, जिसमें दो हितग्राहियों द्वारा ऋण के लिए गिरवी रखी मकान की रजिस्ट्री बैंक से गुम हो गई और अब रजिस्ट्री के लिए दोनों हितग्राही पिछले दो-तीन साल से चक्कर लगा रहे हैं, किंतु उन्हें अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

बैंक के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनके द्वारा अखबारों में जाहिर सूचना प्रकाशित की गई है। साथ ही संबंधित थाने पर भी इसकी जानकारी दी गई है, किंतु अभी तक बैंक ने हितग्राही को मूल रजिस्ट्री या फिर उप पंजीयक कार्यालय से डुप्लीकेट रजिस्ट्री दिलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं। शिकायतकर्ता मनीष नागर ने बताया कि उनकी मां गीता नागर पति गंगाराम नागर द्वारा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा सिरोल्या जिला देवास से 7 लाख रुपए का मोडगेज लोन लिया था। जिसके बदले में अपने घर की रजिस्ट्री (क्रमांक आईए/236 दिनांक 22.07.2008) को बैंक में गिरवी रखा था।

निर्धारित अवधि में नागर द्वारा ऋण का पूर्ण भुगतान कर दिया गया और बैंक ने एनओसी भी दे दी, किंतु जब नागर अपनी रजिस्ट्री मांगने के लिए बैंक पहुंची तो बैंक प्रबंधन ने पहले तो रजिस्ट्री देने में आना-कानी की और जब नागर ने दबाव बनाया तो बताया कि बैंक शाखा का नवीनीकरण हुआ, तब रजिस्ट्री कहीं गुम हो गई है। तब से लेकर आज तक नागर बैंक के चक्कर लगा रही है। इतना ही नहीं मनीष नागर द्वारा भी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा सिरोल्या से 13 लाख 75 हजार रुपये का वर्ष 2011 में लोन लिया था और उसके बदले भी रजिस्ट्री क्रमांक आईए/628/5.7.2011 बैंक में जमा कराई गई थी। उक्त ऋण की अदायगी भी मनीष नागर द्वारा कर दी गई है, किंतु अब उक्त रजिस्ट्री भी गुम होने की बात कही जा रही है।

मनीष नागर ने बताया कि उन्होंने सिरोल्या शाखा से लेकर देवास हेड ऑफिस तक चक्कर लगाए हैं और आवेदन दिये है, किंतु उन्हें आज तक रजिस्ट्री नहीं दी गई है। दोनों हितग्राही काफी परेशान हो चुके हैं और ऋण अदायगी के बाद भी उनकी मूल दस्तावेज नहीं मिलने से मानसिक पीड़ा भोग रहे है।

बैंक प्रबंधन ने पुलिस को की थी शिकायत

उधर इस मामले को लेकर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शाखा शालिनी रोड देवास के शाखा प्रबंधक द्वारा 1 दिसंबर 2020 को शहर कोतवाली पर लिखित में शिकायत दर्ज कराई थी कि मनीष नागर व गीता नागर के घर की मूल रजिस्ट्री बैंक से गुम हो गई है। अत: इनके मकानों की रजिस्ट्रियों का कोई व्यक्ति उपयोग करता है, तो मनीष नागर व गीता नागर जिम्मेदार नहीं होंगे।

सिरोल्या शाखा प्रबंधक निर्मला भलावी ने बताया कि ऋण सिरोल्या शाखा से स्वीकृत हुआ था, किंतु रजिस्ट्री हेड ऑफिस देवास में रखी हुई थी। वहीं से रजिस्ट्री गुम हुई थी। इन रजिस्ट्रियों की सर्चिंग चल रही है। साथ ही अखबारों में जाहिर सूचना भी दी गई है और कोतवाली थाने पर इसकी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने यह भी बताया कि मेरे कार्यालय से पहले का मामला है, इसीलिए मुझे विस्तृत जानकारी नहीं है।

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