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होशंगाबाद श्री रामलीला का समापन:श्री राम का हुआ राज्याभिषेक, 60 के दशक में लाए मुकुट से हुआ श्रंगार

होशंगाबादएक महीने पहले
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रामलीला में राज्याभिषेक का मंचन हुआ। - Money Bhaskar
रामलीला में राज्याभिषेक का मंचन हुआ।

नर्मदापुरम (होशंगाबाद) में सेठानी घाट पर आयोजित श्री रामलीला प्रसंग में शनिवार को राजतिलक हुआ। रात 9 बजे श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण, भरत, लक्ष्मण शत्रु और हनुमान को 60 के दशक में आयोध्या से मंगाए गए मुकुट, पोशाख पहनाई गई। भगवान का श्री राम की राज्याभिषेक का मंचन हुआ। वनवास से आयोध्या लौटने के मंचन पर आतिशबाजी से स्वागत हुआ। रामलीला समिति अध्यक्ष व पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा ने राज तिलक किया। राज्याभिषेक देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा के सेठानी घाट पहुंचे।

बता रहे होशंगाबाद में सेठानी पर आयोजित श्रीरामलीला का इतिहास 140 साल पुराना है। साल 1880 में सेठ नन्हेंलाल घासीराम ने शहर में रामलीला शुरू कराई थी। तब मशालों की रोशनी में कलाकार अभिनय करते थे। तब से आज तक रामलीला सेठानीघाट पर निरंतर हो रही है। 1960 के दशक में रामलीला समिति ने बनारस से कैनवास पर बना राजदरबार मंगाया था। उस समय कीमत करीब 250 रुपए होगी। इसका रामलीला में आज तक उपयोग किया जा रहा है। सालों पुरानी परपंरा को बरकरार रखते हुए शनिवार को श्रीराम लीला मंचन का समापन हुआ। इस अवसर पर श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक गिरजा शंकर शर्मा, भवानी शंकर शर्मा, आशुतोष शर्मा, कल्पेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मशाल की रोशनी से हाईमास्ट तक रामलीला का अभिनय

साल 1880 में बिजली की व्यवस्था नहीं थी। उस दौर में रामलीला का मंचन मशाल की रोशनी में होता था। मंच के आस-पास लोग मशाल लेकर खड़े रहते थे। बाद में बिजली की व्यवस्था हुई। वर्तमान में हाईमास्ट लैंप से लेकर आकर्षक आधुनिक रोशनी का इस्तेमाल होता है।

बनारस से मंगाया था राजदरबार पाेशाक

रामलीला समिति के प्रशांत दुबे ने बताया रामलीला का नियमित मंचन शुरू होने के कई सालों बाद 1960 के दशक में रामलीला समिति बनारस से कैनवास पर बना राजदरबार व आवश्यक संसाधन मंगाए थे। इनमें जरीदार पोशाक, चांदी के मुकुट, छत्र, कवच, राज सिंहासन, चांदी का दंड, चांदी की चंवर आदि शामिल थे। वर्तमान में भी लीला में उक्त सामग्री का इस्तेमाल होता है। समिति राजदरबार को धरोहर मानती है।

रामलीला की शर्मा परिवार के हाथ में बागडोर

सेठ नन्हेलाल के निधन के बाद रामलीला की जिम्मेदारी छोटे भाई सेठ घासीराम और सेठानी सरजूबाई ने संभाली। वर्ष 1930 से शर्मा परिवार के सदस्य व्यवस्था संभाल रहे हैं। वर्ष 1970 तक पंडित रामलाल शर्मा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने इसका एक ट्रस्ट बना दिया। वर्तमान में पूर्व विधायक पं. गिरिजाशंकर शर्मा इसके अध्यक्ष हैं।

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