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रावण पूजन:सारनी में भगवान की तरह पूजे गए रावण, लगे जय लंकेश के नारे

सारनीएक महीने पहले
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  • पूजन करने 2 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर चढ़े सैकड़ों ग्रामीण

बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक मानकर विजयादशमी पर हर साल जहां रावण का पुतला बनाकर दहन किया जाता है। वहीं बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लाॅक अंतर्गत छतरपुर पंचायत के ग्रामीणों ने रावण को आराध्य देव मानकर भगवान की तरह पूजा की। जब पूरे देश में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानकर रावण दहन किया जा रहा था, तब ग्राम पंचायत छतरपुर के लोगों द्वारा भगवान की तरह रावण को पूजा जा रहा था। गांव के मुकेश धुर्वे, दिलीप वरकड़े बताते हैं कि हमारे पूर्वज भी रावण को पूजते आ रहे हैं।

गांव के समीप ऊंची पहाड़ी है। जहां कई दशकों से रावण देव को पूजते हैं। गांव के पूर्वजों का मानना है कि रावण देव की पूजा करने से गांव पर आने वाली विपत्तियां दूर हो जाती हैं। ग्रामीणों ने बताया हर साल विजयादशमी पर गांव के लोग खेड़ापति माता मंदिर में माता की आराधना करने ज्वार बोते हैं और विजयादशमी पर धूमधाम से ज्वार विसर्जन करते हैं। पहले माता की आराधना करते हैं फिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित रावण देव की पूजा करते हैं। यहां से लौटकर पुनः ग्रामीण मां खेड़ापति के दरबार में पहुंचते हैं। यहां पूजा-अर्चना के बाद ज्वार विसर्जन और भव्य भंडारा का आयोजन किया जाता है। ग्रामीणों ने बताया रावण को पूजने दूर-दूर से लोग आते हैं। ग्रामीणों ने बताया फसल पकने के बाद पहले रावण देव के मंदिर में चढ़ाई जाती है। उसके बाद कटाई शुरू की जाती है। इस दौरान दो दिनी मेले का भी आयोजन किया जाता है।

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