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कमजाेर सड़क पर भारी वाहन:ओवरलाेड वाहनाें से ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश सड़कें टूटीं, गारंटी अवधि तक भी टिक नहीं पा रही

खिरकियाएक महीने पहले
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  • मुहालकलां, नीमसराय, भिरंगी गेट सहित अन्य सड़काें की स्थिति खराब, कार्रवाई की जरूरत

ब्लाॅक के ग्रामीण क्षेत्राें की अधिकांश सड़कें टूट चुकी हैं। इसका मुख्य कारण मरम्मत नहीं करना और क्षमता से अधिक भारी वाहनाें का गुजरना है। कम भार क्षमता वाली सड़काें पर नियमाें के उलट भारी वाहनाें से परिवहन किया जा रहा है। इनमें सबसे अधिक संख्या रेत और मुरम से भरे ओवरलाेड डंपराें की है। इससे सड़कें खराब हाे चुकी हैं।.

इसके अलावा भारी वाहनाें की रफ्तार अधिक रहती है, जिससे आए दिन कहीं ना कहीं सड़क हादसे हाे रहे हैं। ग्रामीणाें काे आवागमन में परेशानी हाे रही है। अधिकारियाें और जनप्रतिनिधियाें का भी गांवाें में आना-जाना हाेता है, लेकिन इस समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। ग्रामीण समय-समय पर अधिकारियाें और जनप्रतिनिधियाें काे समस्या बताते हैं। इसके बाद भी कार्रवाई और सुधार के नाम पर कुछ नहीं हाे रहा। क्षेत्र की सड़काें से क्षमता से अधिक वाले भारी भरकम वाहन गुजर रहे हैं। विकासखंड के कई गांवों में यह स्थिति बनी हुई है। रोजाना सैकड़ाें डंपरों के आवागमन से सड़कें छलनी हो रही हैं। यही नहीं डंपर चालक मनमानी करते हुए प्रतिबंधित सड़काें से भी डंपर का आवागमन कर रहे हैं।

कार्रवाई से बचने गांवाें की सड़काें से गुजर रहे डंपर

स्टेट हाइवे पर कार्रवाई से बचने के लिए डंपराें काे गांवाें के रास्ते से गुजारा जाता है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में स्थित गिट्टी खदानों सहित नदियों से रेत भरकर डंपराें से परिवहन किया जा रहा है। इसके अलावा हरदा, हंडिया, हाेशंगाबाद और टिमरनी क्षेत्र से रेत के ओवरलाेड डंपर भी गुजर रहे हैं।

इन डंपराें से रेत शहर के अलावा ब्लाॅक के गांवाें तक पहुंचाई जा रही है। इस कारण सड़काें की दुर्दशा हो रही है। ऐसे मे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुहालकलां, नीमसराय, भिरंगी गेट से हिवाला, बमनगांव, धनवाड़ा, सारंगपुर, चाैकड़ी सहित अन्य सड़कें खराब हाे रही हैं। सालाें बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क का निर्माण किया जाता है, लेकिन ओवरलोड वाहनों के आवागमन से सड़कें टूट रही हैं।

इन सड़काें पर रहता है अधिक दबाव

प्रशासन और खनिज विभाग समय-समय पर शहरी क्षेत्र और स्टेट हाइवे पर भारी वाहनाें पर कार्रवाई की जाती है। इसलिए डंपर चालक कार्रवाई से बचने के लिए अपना रूट बदल लेते हैं। छीपाबड़ से होते हुए पहटकलां, ढोलगांव सड़क से डंपराें को निकाला जाता है। इसके अलावा बमनगांव, सारंगपुर, चाैकड़ी सड़काें पर भी डंपराें का आवागमन अधिक रहता है।

मुहालकलां, नीमसराय सड़क पर भी यह स्थिति बनी हुई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में डंपराें का आवागमन हाेता है। इन सड़काें की क्षमता तय रहती है, लेकिन डंपर चालकाें काे नियमाें से काेई वास्ता नहीं दिख रहा है। सड़काें की चाैड़ाई पर्याप्त नहीं होती है। ऐसे में दुर्घटना हाेती है।

निर्देशित करेंगे

समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। संबंधित विभाग प्रमुखाें काे निर्देशित कर सड़काें की मारम्मत कराई जाएगी।
-एसके बमनाहा, एसडीएम, खिरकिया

अभियान चलाएंगेे
पहले भी समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। अभियान चलाकर ओवरलाेड डंपराें पर कार्रवाई करेंगे।
-सुनील यादव, टीआई, छीपाबड़

क्रेशर प्लांट और गिट्टी खदानाें से आते हैं वाहन

विकासखंड की सड़काें से कई क्रेशर प्लांट एवं गिट्टी खदान लगी हुई हैं। जहां से बड़ी मात्रा में बजरी, मुरम एवं गिट्टी का परिवहन होता है। इन सामग्रियों को डंपर में क्षमता से अधिक भरकर सड़क से परिवहन किया जा रहा है। सड़क की परिवहन क्षमता 8 टन है। इतनी क्षमता तक ही वाहन एवं सामग्रियों का परिवहन किया जाता है, लेकिन खदानों से इससे कई गुना अधिक भारी सामग्रियों का परिवहन लंबे समय से किया जा रहा है।

ग्रामीणों की परेशानियों का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया 8 टन क्षमता वाले मार्ग पर 20 से 25 टन वजनी डंपर निकाले जा रहे हैं। विकासखंड की इन सड़काें से किसान कृषि उपकरण लेकर खेताें तक पहुंचते हैं खेताें में बाेवनी से लेकर कटाई तक आवागमन करने में किसान इन सड़काें का उपयाेग करता है। वर्तमान में मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। दो पहिया वाहन चालकों सहित राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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