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दशहरा:गंदगी एक सामाजिक बुराई, इसे हटाने का संकल्प लेकर जलाया रावण का पुतला

हरदाएक महीने पहले
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  • काेराेनाकाल में स्वयं की जान संकट में डालकर लोगों की मदद करने वाले हुए सम्मानित
  • 51 फीट के रावण के पुतले का स्टेडियम में हुआ दहन, आतिशबाजी से रिझाया

विजयदशमी पर शुक्रवार शाम 7.30 बजे भगवान राम ने अहंकारी रावण की नाभि में तीर मारकर उसका वध किया। रावण के वध हाेते ही समूचे सदन में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। नपा द्वारा करीब ढाई लाख रुपए खर्च कर 51 फीट के रावण का पुतला तैयार कराया था। राम-रावण व दाेनाें सेनाओं के बीच हुए युद्ध व रंगारंग आतिशबाजी के बीच 7.30 बजे पुतला दहन किया गया।

इससे पहले नपा से राम व रावण ट्रॉली में सवार हाेकर शहर के मुख्य मार्गाें से हाेते हुए स्टेडियम पहुंचे। इस माैके पर नपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने गंदगी काे सामाजिक बुराई बताते हुए शहर व अपने आसपास के एरिया काे साफ रखने का सभी काे सामूहिक संकल्प दिलाया। जिससे प्रदेश व देश में हरदा की अलग पहचान बन सके।

कार्यक्रम में मंत्री कमल पटेल प्रशासनिक अधिकारी अन्य जनप्रतिनिधि भी माैजूद रहे। रावण दहन के पहले काेराेना याेद्धाओं व काेराेना काल में सहयोग देने वाले सामाजिक संगठनाें, समाजसेवियाें, पुलिस कर्मियाें, डाॅक्टर, नर्स आदि का सम्मान किया। सभी समाज के अध्यक्ष सम्मानित किए गए।

सभी समाज के अध्यक्ष भी हुए सम्मानित

काेराेना की पहली व दूसरी लहर में अपनी जान जोखिम में डालकर बीमार जरूरतमंद लाेगाें की मदद करने वाले सामाजिक संगठनों व सेवाभावी समाजसेवियों का सम्मान किया। संक्रमितों व उनके परिजनों काे भाेजन के लिए एक माह का वेतन देने वाली सूबेदार वर्षा गाैर, अस्पताल प्रबंधन के प्रतिनिधि के रूप में डाॅ. मनीष शर्मा, नर्स यशाेदा बहन, हरदा हेल्प ग्रुप समेत ऑक्सीजन सिलेंडर, रेमडेसिविर इंजेक्शन व अन्य दवाएं व मदद देने वालाें का सम्मान किया। सभी समाज के अध्यक्ष भी सम्मानित किए गए।

टूटा साेशल डिस्टेंस, मास्क भी नहीं पहने

रावण दहन देखने के लिए हजाराें की संख्या में लाेग उमड़े। बैठक के लिए बनी सीढ़ियां खचाखच भरी हुई थीं। सीढ़ियाें व मैदान के बीच लगी सुरक्षा जालियां के बीच भी बड़ी संख्या में लाेग खड़े थे। कई लाेग गाेदी में ताे कंधे पर बच्चों काे बैठाए हुए थे। जगह की कमी और भीड़ अधिक हाेने के कारण साेशल डिस्टेंस का पालन नहीं हाे सका। मैदान पर पहुंची भीड़ का हिस्सा बने लाेग भी मास्क नहीं लगाए हुए थे। नपा ने सैनिटाइजर के भी इंतजाम नहीं किए थे।

राम ने 9 दिन की थी शक्ति की आराधना

संचालन कर रहे साहित्यकार ज्ञानेश चाैबे ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी शक्ति के लिए देवी की लगातार 9 दिन आराधना की। जिससे शक्ति संचय हुआ। रावण रुपी बुराई के अंत के लिए उसी शक्ति का उपयोग किया। उसी दिन से असत्य व अधर्म पर सत्य व धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में विजयादशमी पर्व मनाया जाता है।

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