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राह हाेगी आसान:छीपानेर नर्मदा पुल के दाेनाें ओर एप्राेच राेड बनना बाकी, दीपावली पर शुरुआत की उम्मीद

हरदाएक महीने पहले
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नर्मदा पर छीपानेर में बना पुल। - Money Bhaskar
नर्मदा पर छीपानेर में बना पुल।
  • अक्टूबर के पहले सप्ताह में सीएम के आने की संभावना, तभी हाे सकता है लाेकार्पण

जिले में छीपानेर में नर्मदा नदी पर करीब 38 कराेड़ 66 लाख रुपए की लागत से लगभग 7 साल के लंबे इंतजार के बाद पुल का निर्माण लगभग पूरा हाे गया है। पुल के दाेनाें सिराें पर केवल एप्राेच राेड बनना बाकी है। उम्मीद है बारिश के बाद इस पुल से आवागमन शुरू हाे जाएगा।

अक्टूबर के पहले सप्ताह में सीएम शिवराजसिंह चाैहान द्वारा लाेकार्पण किए जाने की अटकलें हैं। पुल के बनने से हरदा व भाेपाल के बीच करीब 30 किमी की दूरी कम हाे जाएगी। इससे लाेगाें के समय और ईंधन दाेनाें की बचत हाेगी। पुल की लंबाई करीब 840 मीटर है। चाैड़ाई 8.4 मीटर है। 27 पिलर बन चुके हैं। स्लैब भी डल चुका है। एप्राेच राेड बनना बाकी है। काम चल रहा है। अभी पुल के अभाव में या ताे 30 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाकर आवाजाही करनी पड़ती है या नाव से निकलना पड़ता है। अभी तक हरदा से राजधानी भाेपाल जाने के लिए लाेगाें काे ट्रेन या सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय कर जाना हाेता था। मई 2014 में सीएम ने छीपानेर में आयाेजित कार्यक्रम में पुल के लिए भूमिपूजन किया।

सुरक्षित आवागमन, नदी पार करने का किराया नहीं
छीपानेर में पुल की सुविधा नहीं थी,तब लाेग नाव के जरिए बाइक व अन्य वाहन साथ लेकर आर-पार आते जाते थे। जिससे नाव में जान का जाेखिम बना रहता था,हालांकि अभी काेई अनहाेनी नहीं हुई, लेकिन लाेग मजबूरी में इसका सहारा लेते थे। पुल बनने से सुरक्षित आवागमन हाेगा,वहीं नाव में लगने वाला किराया भी बचेगा।

40 गांव के लाेगाें काे इस पुल से होगा लाभ
छीपानेर के आसपास कई गांव बसे हुए हैं। लाेगाें का मानना है कि अभी तक नर्मदा पर केवल हंडिया में ही एक पुल था। जिले में नर्मदा पर बनने वाला यह दूसरा पुल है। इस पुल के बनने से आसपास के दायरे में आने वाले छाेटे-बड़े करीब 25 से ज्यादा गांव के लाेगाें काे भी हरदा व नर्मदा के दूसरी ओर बसे गांवाें में आवागमन में सुविधा हाेगी।

अब हरदा से भोपाल जाने 30 किमी की दूरी घटेगी
अभी सड़क मार्ग से हरदा से भाेपाल जाने में करीब 160 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। छीपानेर पर इस पुल के बनने से लाेग हरदा से सीधे भाेपाल जा सकेंगे। इससे भाेपाल-हरदा के बीच करीब 30 किमी की दूरी कम हाे जाएगी। दूरी कम हाेेने से जहां लाेगाें का कीमती समय बचेगा वहीं महंगे ईंधन की बचत हाेगी। वाहनाें के टायर भी कम घिसेंगे।

18 माह का काम सात साल में, लागत बढ़ी
सीएम ने चुनाव से पहले मई 2014 में पुल के लिए भूमिपूजन किया था। तब पुल की लागत लगभग 28 कराेड़ रुपए थी। करीब 840 किमी लंबे पुल का निर्माण सीएम ने बारिश का समय छाेड़कर 18 माह में पूरा कराने की घाेषणा की थी। लेकिन विभागीय अनदेखी और राजनीतिक दखलअंदाजी के कारण पुल बनने में 7 साल का लंबा समय लग गया। गुजरते समय के साथ रेत,गिटटी,लाेहा,सीमेंट के दाम बढ़ते गए,इससे इसकी लागत 9.66 कराेड़ रुपए बढ़ गई।

एप्राेच राेड बनते ही मिलेगी सुविधा

  • पुल का निर्माण पूरा हाे गया है। पुल के दाेनाें सिराें पर एप्राेच राेड बनना बाकी है। बारिश के कारण यह नहीं बन पाई है यह पूरा हाेते ही लाेगाें काे इसकी सुविधा मिलने लगेगी। - साेमेश श्रीवास्तव, एडीओ, लाेनिवि, सेतु निर्माण, हाेशंगाबाद
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