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हिंदू और हिंदुत्व पर बोले भागवत:हिंदू के बिना भारत और भारत के बिना हिंदू की कल्पना नहीं, इसलिए अखंडता और एकात्मता जरूरी है

ग्वालियर10 महीने पहले
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ग्वालियर में स्वदेश के मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू के बिना भारत नहीं और भारत के बिना हिंदू नहीं। अखंड भारत की कल्पना हमारी सत्यता और ध्येय से पूरी होती है। इतिहास गवाह है, जब-जब हिंदू के अंदर हिंदुत्व का भाव या ताकत कम हुई तो हिंदू की संख्या कम हुई। भारत को हिंदू रहना है, तो अखंडता और एकात्मता जरूरी है।

डॉ. भागवत ने कहा कि देश को इसलिए ही भारत माता नहीं कहते हैं कि इससे हमें अन्न मिलता है। यह भारत माता हमें हमारा स्वभाव और संस्कार भी देती हैं, इसलिए भारत का स्व कभी भारत से अलग नहीं हो सकता। आज जिसको हम हिंदू धर्म, हिंदुत्व संस्कृति कहते हैं, उसके मूल हमें यहां से मिलते हैं। स्वदेश के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद RSS प्रमुख भागवत वीरांगना लक्ष्मीबाई की समाधि पहुंचे। यहां पुष्पांजलि अर्पित की।

मंच से हिंदुत्व पर भाषण देते मोहन भागवत।
मंच से हिंदुत्व पर भाषण देते मोहन भागवत।

शनिवार को ग्वालियर स्वदेश का 50वां स्थापना दिवस समारोह था। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम जीवाजी विश्वविद्यालय के अटल विहारी वाजपेयी सभागार में रखा गया था। इसमें CM शिवराज सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में पहले मोहन भागवत को वीरांगना की प्रतिमा भेंट कर शॉल श्रीफल से सम्मान किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राममंदिर से लेकर स्वदेश तक पर विचार व्यक्त किए।

स्वदेश के कार्यक्रम के बाद मोहन भागवत ने वीरांगना को भी पुष्प अर्पित किए
स्वदेश के कार्यक्रम के बाद मोहन भागवत ने वीरांगना को भी पुष्प अर्पित किए

हिंदुत्व पर केन्द्रित रहा भाषण
कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत ही एक मात्र ऐसा देश है, जिसके संस्कार सत्य और संबंध से बने हैं। यह जोड़ता है, तोड़ता नहीं। पश्चिमी देशों की तरह नहीं जो अपने हितों और स्वार्थ के लिए संबंध रखते हैं। अभी ग्लोबल मीट की बात होती है। इसमें अमेरिका का जिक्र करते हुए कहा कि यह संबंध जब तक है, तब तक अमेरिका को आपसे नुकसान नहीं है। यदि नुकसान होगा, तो वह आपसे संबंध तोड़ने में सोचेगा नहीं।

इशारों-इशारों में पड़ोसी देश को दे दी नसीहत
डॉ. भागवत ने कहा कि पश्चिमी देशों में अपने हितों के लिए संबंध होते हैं। मतलब जो अपने लिए अनुकूल है, वह अपना है। जो अनुकूल नहीं है, उससे संबंध नहीं रखना। जो विरोध करता है, वह विरोधी है। उससे संबंध नहीं रखना है। विरोधी कोई गड़बड़ करता है, तो उसे समाप्त कर देना चाहिए। इस बयान पर जब लोगों ने तालियां बजाई, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि यह पश्चिमी देशों की संस्कृति के लिए कह रहा हूं। आप गलत न समझें। हमारी संस्कृति ऐसी नहीं है।

पाकिस्तान पर कसा तंज
डॉ. भागवत बोले- भारत क्यों टूटा, क्योंकि हिंदू अपने आप को भूल गए। मुसलमान खुद को भूल गए। अंग्रेजों ने दूसरा मुल्क पाकिस्तान के रूप में बना दिया। मुसलमान ​​कह सकते थे कि तुम अपने आप को हिंदू मत कहो, क्योंकि सारे वेद हमारी जमीन पर बने, जिससे तुम अपना हिंदू उच्चारण करते हो वह हिंदूकुश हमारे यहां है, लेकिन उन्हें पता था भारत है, तो हिंदू है। हिंदू है, तो हिंदुस्तान है।

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