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  • The Funeral Procession Has To Be Carried Out By Walking In Khedi Raimal Village Of Gwalior, Not By Swimming, The Dead Body Has To Be Kept In Two Houses On The River Boom.

यहां कठिन है अंतिम सफर...:नदी में आधा डूब कर ले जाते हैं शवयात्रा, नदी उफान पर हो तो घर में ही रखते हैं शव

ग्वालियरएक महीने पहले
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ग्वालियर के डबरा के पास खेड़ी रायमल गांव में लोगों की अंतिम यात्रा पैदल चल कर नहीं, बल्कि नदी में आधा डूबकर निकालनी पड़ती है। साल के बारिश के चार महीने तो यही हाल रहता है। हाल में गांव के बुजुर्ग की मौत हो गई। उनके शव को भी लोग कंधे पर रखकर आधा डूबकर नदी पार कर श्मशान घाट तक ले गए। किसी ने इसका वीडियो बना लिया। गांव के लोग बताते हैं कि जहां श्मशान घाट बना है, वहां जाने का एक ही रास्ता है। बीच में नोन नदी पड़ती है। मानसून के चार महीने और ठंड के कुछ महीने यहां पानी भरा ही रहता है। इस कारण शवयात्रा लेकर इसी तरह नदी पार कर जाना पड़ता है। गर्मी में पानी सूख जाता है, तो रास्ता नजर आता है।

इस गांव में आखिरी सफर भी है मुश्किल।
इस गांव में आखिरी सफर भी है मुश्किल।

शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर डबरा सर्कल के खेड़ी रायमल गांव में रविवार को 85 वर्षीय बुजुर्ग उत्तम सिंह जाट का निधन हो गया था। उनकी शवयात्रा को लेकर परिजन व गांव के लोग श्मशान जा रहे थे। रास्ते में नोन नदी का भराव क्षेत्र पड़ता है। इसमें से लोगों को गर्दन तक भरे पानी से शव यात्रा को लेकर निकलना पड़ा। यह VIDEO वहां मौजूद कुछ लोगों ने बना लिया।

बरसात में दो-दो दिन घर में ही रखना पड़ता है शव
गांव के सरपंच सरनाम सिंह बताते हैं कि गांव में वैसे कई रास्ते हैं। जिससे बाहर आया जा सकता है, लेकिन सरकार ने श्मशान घाट जहां बनाया है वहां जाने का यही मात्र रास्ता है। गर्मी में तो यह रास्ता मैदान होता है, लेकिन असल में यह नोन नदी का भराव क्षेत्र है। बरसात आते ही नदी में पानी आता है, तो यह जगह पानी से लबालब हो जाती है। पूरे मानसून और उसके दो महीने ठंड के यहां से शवयात्रा को लेकर जाना किसी चुनौती से कम नहीं है। इतना ही नहीं चौमासे या नदी के उफान पर होने के कारण कई बार गांव में किसी की मौत हो जाए तो शव को दो या तीन दिन घर में ही रखना पड़ता है।

400 परिवार हैं, 1 हजार की है वोटिंग
गांव के सरपंच सरनाम सिंह ने बताया कि इस गांव में 1000 की वोटिंग है। लगभग 400 परिवार यहां रहते हैं। कभी न कभी किसी न किसी परिवार में हादसा होता ही है। ऐसे में गांव के लोग इस रास्ते पर नदी से ही शवयात्रा को लेकर गुजरते हैं, तो कष्ट होता है।

गांव के लोग पुलिया की कर रहे मांग
गांव के निवासी विद्याराम शर्मा बताते हैं कि गांव में इस नदी पर पुलिया बनाने के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। डबरा कार्यालय में आवेदन कर चुके हैं। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को भी आवेदन देकर मांग कर चुके हैं, लेकिन गांव के लोगों का दर्द किसी को नजर नहीं आ रहा है।