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  • The Children Reached School In The Lap Of Parents, Due To The Habit Of Online Studies In One And A Half Years, Children Studied With Their Mother In Class, Kusum Said Used To Feel Good At Home

डेढ़ साल बाद प्राइमरी स्कूल हुए अनलॉक...:मां-पापा की गोद में स्कूल पहुंचे नौनिहाल, डेढ़ साल में ऑनलाइन पढ़ाई की आदत के चलते क्लास में भी मम्मी के साथ पढ़े बच्चे, कुसुम बोली- घर पर अच्छा लगता था

ग्वालियर3 महीने पहले
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पदमा स्कूल में 5 साल की कुसुम पहली कक्षा में है। क्लास में मां साथ बैठी तभी उसने पढ़ाई की। डेढ़ साल से मां ही उसकी टीचर और स्कूल है। - Money Bhaskar
पदमा स्कूल में 5 साल की कुसुम पहली कक्षा में है। क्लास में मां साथ बैठी तभी उसने पढ़ाई की। डेढ़ साल से मां ही उसकी टीचर और स्कूल है।
  • - ग्वालियर में स्कूलों का हाल, बच्चे पहुंचे

आखिरकार क्लास 1 से 5वीं तक (प्राइमरी) स्कूल अब अनलॉक हो गए हैं। सोमवार को 5 साल की कुसुम अपनी मम्मी की गोद में सवार होकर स्कूल पहुंची। वह पहली बार स्कूल पहुंच रही थी। उसके हाव भाव बिल्कुल अलग थे। डेढ़ साल से ऑनलाइन पढ़ाई की इतनी आदत सी हो गई थी कि कुसुम की मम्मी ज्योति को क्लास में उसके साथ बैठना पड़ा। टीचर के अलावा मां उसे अपनी स्टाइल में समझाती गईं तो उसे समझ आया। क्योंकि बीते डेढ़ साल से कुसुम की मां ही उसे पढ़ा रही थीं। जब दैनिक भास्कर की टीम ने 5 साल की कुसुम से पूछा स्कूल आकर कैसा लग रहा है तो बच्ची ने कहा घर पर ही अच्छा लगता था। स्कूल प्रबंधन के लिए भी यह छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाना अभी चुनौती रहेगा। क्योंकि डेढ़ साल बाद बच्चे स्कूल आएंगे। अभी उनको अपने पैरेंट्स की भाष ही समझ आती है। उनके समझाने के स्टाइल को ही वह समझते हैं। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को बच्चों को किसी तरह मैनेज करना होगा।

डेढ़ साल बाद स्कूल में पहला दिन गोरखी स्कूल में अपनी बेंच पर बैठा यह छात्र उसकी आंखे और चेहरा सब कुछ बंया कर रहा है
डेढ़ साल बाद स्कूल में पहला दिन गोरखी स्कूल में अपनी बेंच पर बैठा यह छात्र उसकी आंखे और चेहरा सब कुछ बंया कर रहा है

सोमवार से मध्य प्रदेश में स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक की क्लासेस अनलॉक हो गई हैं। ग्वालियर में भी 1500 से ज्यादा प्राइमरी स्कूल हैं। सोमवार सुबह सरकारी स्कूलों में बच्चांे को लेकर परिजन पहुंचे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पहली कक्षा के बच्चों को हैंडल करने में आई है। यह वह बच्चे थे जिन्होंने अपने डेढ़ साल ऑनलाइन पढ़ाई में खर्च किए हैं। यह वह समय होता है जब वह स्कूल में बैठना और पढ़ना सीखते हैं। अब सीधे पहली कक्षा में उनका स्कूल से सामना हो रहा है। स्कूलों के बाहर बच्चे अपने मां-पिता की गोद में ही आते दिखे हैं। ज्यादातर बच्चे रोते हुए स्कूल पहुंचे हैं।
पहला दिन क्या बोले-बच्चे
- पदमा विद्यालय में पहली कक्षा की छात्रा 5 साल की कुसुम पहली बार स्कूल आई थी। जब उससे पूछा कि कैसा लग रहा है तो उसके चेहरे के भाव अलग थे। उसने बोला घर पर पढ़ना अच्छा लगता था। पर यह भी बोला कि स्कूल आकर अच्छा लग रहा है। वह पहली बार स्कूल आई थी इसलिए क्लास में उसकी मां ज्योति भी बैठी और मां ने ही उसे अपने अंदाज में समझाया और पढ़ाया। क्लास टीचर ने भी बच्चाें की परेशानी समझकर उनके पैरेंट्स को बैठने दिया। इसी तरह कंपू निवासी 5 वर्षीय अंजली तो स्कूल में फुल मस्ती में नजर आईं। वह काला चश्मा लगाकर स्कूल पहुंची। हालांकि गेट पर उसका चश्मा ले लिया गया, लेकिन अंजली का कहना था कि स्कूल में काफी अच्छा लगा।

कुछ इस तरह बच्चे स्कूल पहुंचे, कोई पापा की गोद में था तो कोई मां की गोद में सवार होकर स्कूल आया
कुछ इस तरह बच्चे स्कूल पहुंचे, कोई पापा की गोद में था तो कोई मां की गोद में सवार होकर स्कूल आया

क्या बोले परिजन
- कम्पू निवासी ज्योति कुमारी ने बताया कि उनकी बेटी कुसुम को वह स्कूल छोड़ने आई हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में वह बच्चांे की ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाती थी। अब स्कूल खुले हैं तो राहत है। बच्चे भी खुश हैं। अभी मैं अपनी 5 साल की बेटी के साथ क्लास में बैठी हूं। अभी डेढ़ साल से मैं ही उसे समझा रही थी, इसलिए एक दो दिन की परेशानी आएगी। उसके बाद वह समझने लगेगी।
क्या बोले टीचर
- पदमा विद्यालय मंे प्राइमरी क्लास की टीचर रश्मि पाठक का कहना है कि स्कूल खुल गए हैं वापस बच्चों से क्लास रोशन हो गई हैं। हमने अभी 50 फीसदी ही बच्चों को स्कूल बुलाया है। परिजन से भी चार दिन पहले ही सहमति पत्र ले लिए हैं। परिजन से यह भी कहा है कि किसी बच्चे को कोई इन्फेक्शन है या वायरल है तो उसे बिल्कुल भी स्कूल न भेजें। स्कूल गेट पर सेनिटाइज, थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। एक बेंच पर एक ही बच्चा रहेगा। लंच भी अपनी बेंच पर ही करेगा।

पदमा विद्यालय में बच्चों को क्लास तक छोड़ने जाते परिजन
पदमा विद्यालय में बच्चों को क्लास तक छोड़ने जाते परिजन

प्राइवेट स्कूलों में नहीं लगीं क्लासेस
- मध्यप्रदेश में पहली से पांचवीं तक के स्कूल सोमवार से शुरू हो गईं हैं। पहले दिन ग्वालियर में अधिकतर प्राइवेट स्कूलों में पांचवीं तक की क्लासेस नहीं लगीं। ज्यादातर प्राइवेट स्कूल में इस समय एग्जाम चल रहे हैं। क्लास 1 से पांचवीं तक की परीक्षाएं होने के कारण क्लास शुरू नहीं हो सकीं हैं। यही हाल CBSE स्कूलों का भी रहा है। वहां भी अभी एग्जाम चलने के कारण बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया गया है। हजीरा स्थित आरएस कॉन्वेंट स्कूल में भी प्राइमरी से आगे की क्लासेस ही लगी हैं। इसकी अपेक्षा सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 5वीं तक की क्लासेस लगी हैं। पर यहां बच्चों की संख्या काफी कम नजर आई है। स्कूलांे में 12 से 15 फीसदी ही बच्चे नजर आए हैं।
स्कूलों ने किया गाइडलाइन का पालन
- अभिभावक से पहले लिया सहमति पत्र
- 50 प्रतिशत क्षमता के साथ स्कूल में बैठेंगे बच्चे
- बच्चों को प्रवेश से पहले गोल सर्कल में खड़ा होना होगा।
- थर्मल स्केनिंग के बाद प्रवेश देंगे।
- क्लास में ही लंच करना होगा।
- कैंटीन से वे कोई खाद्य पदार्थ लेकर नहीं खा सकेंगे।
- टिफिन दूसरे से शेयर नहीं करेंगे।
- बसों में एक सीट पर दो पार्टीशन लगाकर बच्चों को बिठाया जाएगा।

तीन चरणों में इस तरह अनलॉक हुए हैं स्कूल
- सबसे पहले प्रदेश में 26 जुलाई से छात्रों के लिए क्लास खोले गए थे। जिसमें 11वीं और 12वीं की क्लास शुरू हुईं। क्लास में 50% क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए थे।
- दूसरे चरण में 1 सितंबर से 6वीं से 12वीं तक की सभी क्लासेस रोजाना (रविवार को छोड़कर) खोलने का निर्णय लिया था। क्लास में 50% बच्चे उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे।
- तीसरा चरण में 20 सितंबर से पहली से पांचवीं तक के क्लास अनलॉक की गई हैं। इसके साथ ही हॉस्टल वाले स्कूलों में 8वीं, 10वीं और 12वीं की क्लास 100% क्षमता के साथ खोलने के आदेश जारी हो गए।

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