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राहत का इंतजार:4 माह में भी नहीं मिला फंड, पुलों की मरम्मत ही शुरू नहीं हो सकी, नतीजा- कई किलोमीटर का लगा रहे चक्कर

ग्वालियर2 महीने पहलेलेखक: कौशल मुदगल
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बाढ़ में बहा सेंवढ़ा का पुल, जिससे लोग परेशान हो रहे हैं। - Money Bhaskar
बाढ़ में बहा सेंवढ़ा का पुल, जिससे लोग परेशान हो रहे हैं।

ग्वालियर चंबल संभाग की सिंध, पार्वती और सीप नदी के उफान से अगस्त में आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत का इंतजार लोगों को 4 महीने बाद भी है। बाढ़ में ग्वालियर, भिंड, दतिया व श्योपुर के 6 पुल बहे व क्षतिग्रस्त हुए थे। इन पुलों को सुधारने एवं निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने राज्य शासन से अगस्त में 60 करोड़ रुपए मांगे थे। राशि मिलना तो दूर, शासन से इस बारे में कोई जवाब तक नहीं मिल पाया है।

नतीजतन, इन क्षेत्रों से लोगों को 12 से 30 किलोमीटर तक का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है या फिर जान जोखिम में डालकर नदी पार करके रास्ता तय करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि 2-3 अगस्त की दरमियानी रात सिंध, पार्वती और सीप नदी की बाढ़ से दर्जनों गांव में सैकड़ों लोगों के घर तहस-नहस हो गए थे और नदी पर बने पुल टूट कर बह गए थे।

प्लानिंग- डिजाइन बदलने की, भविष्य में बाढ़ झेल सकें

बाढ़ में जो पुल टूटकर बह गए हैं उनके संधारण के लिए लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग ने प्रदेश सरकार के पास जो प्रस्ताव भेजा है। उसमें इन सभी पुलों को जलमग्नी डिजाइन से बनाने के लिए कहा है। अधिकारियों का तर्क है कि यदि ये पुल जलमग्नी होंगे, तो भविष्य में फिर बाढ़ आने पर बेशक डूबे रहें लेकिन बहेंगे या टूटेंगे नहीं।

इसके लिए अधिकारियों ने प्रस्ताव में बहादुरपुर के जलमग्नी पुल का उदाहरण देकर बताया है कि ये पुल 3-4 दिन तक पानी में डूबा रहा और तेज बहाव को भी झेलता रहा। लेकिन न बहा और न उसमें कोई दूसरी दिक्कत आई। यदि सभी पुल ऐसे तैयार किए जाएंगे, तो भविष्य में किसी भी बाढ़ का सामना ये पुल कर पाएंगे।

ये पुल बहे बाढ़ में

डबरा के पिछोर से दतिया के इंदरगढ़ को जोड़ने वाला लांच पुल, भिंड में इंदुर्खी, लहार में जखनौली, श्योपुर में मानपुर और बड़ौदा बायपास का पुल और रतनगढ़ मंदिर का पुल बह गया था। रतनगढ़ माता मंदिर पर जो पुल बहा, वह पुराना है और पास ही नया पुल तैयार होने के एक साल बाद इस पुराने पुल को तोड़ा जाना था। इन सभी क्षेत्रों में लोगों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर आना-जाना पड़ रहा है।

स्वीकृति मिलते ही होगा काम

शासन के पास 60 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से फंड स्वीकृति मिलने के साथ ही इन पुलों पर काम शुरू करा दिया जाएगा। फिलहाल श्योपुर में बहे पुल का रपटा निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है।
- पवन प्रजापति, प्रभारी कार्यपालन यंत्री/ लोक निर्माण सेतु संभाग

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