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मास्टर प्लान 2035:निवेश लाना तो दूर, मास्टर प्लान के मुताबिक औद्योगिक जमीन ही तैयार नहीं हो पाई

ग्वालियरएक महीने पहले
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  • 2015 में लागू किए गए मास्टर प्लान-2021 के प्रावधानों पर नहीं किया अमल

आर्थिक गतिविधि एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार दावे कितने भी करे, लेकिन धरातल पर इसके लिए काम किए जाने के मामले में सरकारी विभाग काफी पीछे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि ग्वालियर के मास्टर प्लान-2021 में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाने के लिए जो प्रावधान किए गए थे। वह 6 साल में 20 प्रतिशत का लक्ष्य भी हासिल नहीं कर सके। स्थिति ये है कि मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र के लिए 1,719.12 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित थी। जिसमें से 335.18 हेक्टेयर का यूज औद्योगिक विकास के लिए किया जा सका है।

नए मास्टर प्लान में इस पर चिंता जताई गई है। जिसमें माना गया है कि इस जमीन का पर्याप्त उपयोग न होने से ग्वालियर के आर्थिक विकास व रोजगार के लिए मुरैना-भिंड में स्थापित औद्योगिक क्षेत्रों पर निर्भर रहना होता है। टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक वीके शर्मा ने कहा, मास्टर प्लान में औद्योगिक विकास के लिए जितनी जमीन का प्रावधान था। उसका यूज नहीं किया गया। इसलिए ग्वालियर का औद्योगिक विकास अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। प्रयास करेंगे कि नए मास्टर प्लान में किए जाने वाले प्रावधान के अनुसार ये विकास हो सके।

ढिलाई: 2015 में लागू प्लान, विभागों ने कागजों में दफन किया

ग्वालियर के मास्टर प्लान-2021 को 2015 में लागू किया गया। शासन-प्रशासन को शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, 80% से अधिक प्रस्तावित जमीन का उपयोग औद्योगिक क्षेत्र के लिए शुरू नहीं किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यदि मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन, जिला उद्योग केंद्र इस प्रस्तावित जमीन पर प्लानिंग कर उपयोग शुरू करते। तो निवेश बढ़ने के साथ बेरोजगारी कम होती।

परिणाम: रायरू में नहीं, गिरवाई-शंकरपुर में लगे अवैध उद्योग

मास्टर प्लान में रायरू पर नया औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित था। ये औद्योगिक क्षेत्र आगरा-मुंबई हाइवे के कारण प्रस्तावित था। शुरूआत में व्यापारियों ने यहां औद्योगिक क्षेत्र बनने का इंतजार किया। लेकिन बाद में शंकरपुर और गिरवाई क्षेत्र में अपनी इंडस्ट्रीज शुरू कर दी। इस पर मास्टर प्लान में ये कहते हुए आपत्ति ली गई है कि रायरू के पास प्रस्तावित जमीन पर यदि औद्योगिक क्षेत्र बना होता। तो शंकरपुर, गिरवाई व अन्य क्षेत्र में अवैध रूप से उद्योगों की स्थापना नहीं होती।

एक्सपर्ट व्यू- विनोद शर्मा, रिटायर्ड आईएएस अफसर

मास्टर प्लान में प्रावधान किया गया है कि 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क के आसपास की जमीन पर मिश्रित उपयोग किया जा सकेगा, यानि कि उस जमीन पर आवासीय-कमर्शियल सभी तरह के निर्माण कार्य हो सकेंगे। ये प्रावधान अच्छा है लेकिन इससे मिलने वाली राहत के वर्ग का दायरा काफी छोटा है।

कुछ ही सड़कें इतनी चौड़ाई वाली हैं इसलिए इससे छोटी सड़कों पर भी भूमि उपयोग की बाध्यता को खत्म किया जाना चाहिए। ताकि, अधिकांश क्षेत्र के लोगों को इसका फायदा मिल सके। इसके अलावा जिस प्रकार कॉलोनियों में बने नर्सिंग होम के कंपाउंडिंग का प्रावधान किया गया है। ऐसे ही कॉलोनियों में बनी दूसरी दुकानों के लिए भी किया जाना चाहिए था।

सरकारी विभाग ही नहीं कर रहा योजनाओं का क्रियान्वयन

दाल बाजार, लोहिया बाजार को शहर से बाहर शिफ्ट करने की प्लानिंग लंबे समय से चल रही है, लेकिन सरकारी विभाग ही इन योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कर पा रहे। सिर्फ कागजों में प्लानिंग ही बनाई जा रही है।
- गोकुल बंसल, अध्यक्ष/ दाल बाजार व्यापार समिति

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