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मोबाइल बना था वैक्सीन में बाधा:75 साल की वृद्धा को मोबाइल न होने से नहीं लग पा रही थी वैक्सीन, चेंबर के मानसेवी सचिव ने अपने फोन से किया रजिस्ट्रेशन, फिर लगा टीका

ग्वालियर2 महीने पहले
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75 वर्षीय वृद्ध गोमती देवी को चैंबर में वैक्सीन लगाई गई। - Money Bhaskar
75 वर्षीय वृद्ध गोमती देवी को चैंबर में वैक्सीन लगाई गई।
  • - चेंबर ऑफ कॉमर्स में चल रहे वैक्सीन अभियान में हर मुश्किल होती है दूर

ग्वालियर शहर में 75 साल की एक वृद्ध महिला ऐसी भी थी जिसको सिर्फ इसलिए वैक्सीन नहीं लग पा रही थी क्योंकि महिला के पास मोबाइल नहीं था। जब भी वह वैक्सीनेशन सेंटर पर जाती तो उसे मोबाइल न होने पर लौटा दिया जाता था। इस दुनिया में महिला कोई नहीं था, जिसके मोबाइल से वह रजिस्ट्रेशन कराकर टीका लगवा पाती। सोमवार को वृद्ध महिला चेंबर ऑफ कॉमर्स के वैक्सीनेशन सेंटर पर पहुंच गई। महिला को लगा कि यहां से भी उसे लौटा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

व्यापारिक संस्था चेंबर ऑफ कॉमर्स के मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल के सामने यह केस आया तो उन्होंने सिर्फ 2 मिनट में वो प्रॉब्लम सॉल्व कर दी जिसे प्रशासन एक महीने में नहीं कर पाया। उन्होंने एक बेटे की तरह वृद्ध महिला गोमती देवी का अपने मोबाइल पर रजिस्ट्रेशन कराया। दो मिनट बाद उनको जिंदगी का टीका लगवाया। इसके बाद वृद्धा ने व्यापारी प्रवीण अग्रवाल को धन्यवाद दिया। इतना ही नहीं चेंबर के सदस्यों ने महिला को ऑटो से घर तक भी पहुंचाया।

वैक्सीन लगाने के बाद वृद्ध मां को सार्टिफिकेट देते चेंबर के मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल
वैक्सीन लगाने के बाद वृद्ध मां को सार्टिफिकेट देते चेंबर के मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल

बार-बार वैक्सीनेशन सेंटर से लौटा देते हैं
- सोमवार को गोमती सेन जिनका जन्म 1947 में ग्वालियर में हुआ था। वह चेम्बर ऑफ कॉमर्स में वैक्सीन लगवाने पहुंची। वहां टीकाकरण की व्यवस्था में सहयोग कर रहे अंकुर अग्रवाल ने उनसे संपर्क किया। तब वृद्ध महिला ने बताया कि वह कई बार वैक्सीन लगवाने शहर के अलग-अलग सेंटर पर गई। पर हर बार मोबाइल न होने से उसे लौटा दिया गया। क्योंकि वैक्सीन लगवाने के लिए मोबाइल नंबर होना बेहद जरूरी है। उसी पर रजिस्ट्रेशन होता है और सार्टिफिकेट मिलता है। OTP भी आता है। इसके बाद अंकुर ने इस बात से चेंबर के मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल को अवगत कराया। उन्होंने गोमती देवी से बात की।
परिवार के बारे में पूछा तो वृद्धा की आंखों में आंसू भर आए
- डॉ. प्रवीण अग्रवाल जब उस बुजुर्ग मां के पास गए और पूछा कि तुम्हारे साथ कोई परिवार का व्यक्ति क्यों साथ नही है जबकि आप चल भी नही पा रही हो। इतना सुनते ही 75 वर्षीय वृद्ध गोमती देवी की आंखें भर आईं। व्यापारी प्रवीण अग्रवाल ने उनके आंसू पोंछे और तसल्ली से कुर्सी पर बैठाया। इसके बाद गोमती देवी ने बताया कि जब वह 25 वर्ष की थी तब खाली हाथ (विधवा) हो गई थीं। उस समय उसके माता पिता उसे ग्वालियर ले आये थे तब से वह यही रह रही है। अब माता पिता भी नही रहे तो वह अकेली पड़ गई है। अब उसका इस दुनिया में कोई नहीं हैं। इसके बाद वृद्धा ने पूछा कि क्या उसे यहां भी वैक्सीन नहीं लगेगी। इस पर डॉ. प्रवीण अग्रवाल बोले- मां आप यहां से बिना टीका लगवाए नहीं जाओगी।
बेटे का फर्ज निभाकर अपने मोबाइल से किया रजिस्ट्रेशन,लगवाया टीका
- इस पर डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने अपना मोबाइल नम्बर से बुजुर्ग मां का आधार कार्ड लेकर रजिस्ट्रेशन कर उन्हें कोवेक्सिन का पहला डोज लगवाया। इतना ही नहीं मोबाइल से वैक्सीन का प्रमाण पत्र निकालकर उनको दिया। उस पर अपना मोबाइल नंबर भी लिखकर दिया। जिससे जब भी टीका की दूसरी डोज लगवाने जाएं तो कोई परेशानी न हो। इसके बाद वृद्ध गोमती देवी का ऑटो से उनके घर तक पहुंचाया।
वृद्धा ने दिया धन्यवाद
- वैक्सीन लगने के बाद वृद्ध गोमती देवी ने व्यापारिक संस्था चेंबर ऑफ कॉमर्स को धन्यवाद दिया। साथ ही डॉ. प्रवीण अग्रवाल के प्रयास की सराहना की। वैक्सीन लगवाने के बाद गोमती कीआंखों में आंसू थे। क्योंकि वह एक महीने में जनकगंज डिस्पेंसरी, बाड़ा ऑफिस, नई सड़क नगर निगम के वैक्सीनेशन सेंटर सहित आधा दर्जन सेंटर से बार-बार लौटा दिया गया है। जो काम व्यापारी प्रवीण अग्रवाल ने किया वो कोई भी सेंटर का इंचार्ज कर सकता था। जिससे गोमती देवी को अभी तक दूसरी डोज भी लग गई होती। इस पर चेंबर के मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल का कहना है कि चेंबर ऑफ कॉमर्स का प्रयास है कि कोई भी वहां आए तो बिना वैक्सीन के वापस नहीं जाए। आज हम इसी प्रयास में सफल रहे हैं।

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