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सावन सोमवार पर ड्रोन से देखिए 64 शिवलिंग वाला मंदिर:MP के चौसठ योगिनी शिव मंदिर के हर कमरे में 1 शिवलिंग, 700 साल पहले हुआ था तैयार

मुरैनाएक वर्ष पहलेलेखक: रतन मिश्रा
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सावन के आखिरी सोमवार पर हम आपको बता रहे हैं मध्यप्रदेश के प्राचीन और भव्य 64 शिवलिंग वाले गोलाकार चौसठ योगिनी शिव मंदिर के बारे में। इस मंदिर की बड़ी खासियत यह है कि भारतीय संसद की इमारत इसी मंदिर से प्रेरित है। मुरैना जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर मितावली गांव में स्थित यह मंदिर देशभर में प्रसिद्ध है।

कई रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र है कि ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस ने इस मंदिर को आधार मानकर ही संसद भवन की डिजाइन तैयार की थी। हालांकि इस बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संसद भवन इसी मंदिर से मिलता-जुलता बना हुआ है। गोलाकार मंदिर में अंदर की तरह जिस तरह खंभे लगे हुए हैं, बिल्कुल उसी तरह संसद भवन में बाहर की तरफ खंभे दिखते हैं। जिस तरह मंदिर के अंदर बीच में एक बड़े कक्ष में मंदिर है, वैसे ही संसद भवन के बीचो-बीच एक बड़ा हॉल है। जिसे सेंट्रल हॉल भी कहते हैं।

जमीन से करीब 100 फीट ऊंचाई पर बना यह मंदिर अद्भुत है। दूर से ही पहाड़ी पर गोलाकार मंदिर किसी उड़न तश्तरी की तरह दिखाई देता है।

मंदिर तक पहुंचने के लिए सीधी चढ़ाई
मंदिर तक पहुंचने के लिए चट्‌टानों पर चढ़कर जाया जाता है। इसकी चढ़ाई बिल्कुल सीधी है। ऊपर जाकर बड़ा मैदान है। वहां इसका मुख्य द्वार है। ऊंचाई पर मौजूद मुख्य द्वार पर जैसे ही खड़े होते हैं, मंदिर के बीचों-बीच स्थित शिवलिंग के दर्शन होते हैं। इसी शिवलिंग को एकट्टसो महादेव कहते हैं। इस कारण इस मंदिर को एकट्टसो महादेव मंदिर भी कहते हैं। अंदर जाने पर बीच प्रांगण में वृत्ताकार मंदिर बना है। यहां दो शिवलिंग हैं।

बीच में मुख्य मंदिर।
बीच में मुख्य मंदिर।

मंदिर का इतिहास
चौंसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 1323 ईस्वी यानि विक्रम संवत 1383 में हुआ था। मंदिर का निर्माण कच्छप राजा देवपाल ने कराया था। बताया जाता है कि यह मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का मुख्य स्थान था। कुछ लोग इस मंदिर को तंत्र विद्या का बड़ा केंद्र मानते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव का मंदिर होने के कारण लोग यहां तंत्र विद्या सीखा करते थे।

64 कमरों के कारण नाम पड़ा चौंसठ योगिनी
64 योगिनी मंदिर मुरैना जिले के सिहोनियां क्षेत्र के मितावली गांव में स्थित है। भारत में गोलाकार मंदिरों की संख्या बहुत कम है। यह मंदिर भी उन्हीं में से एक है। यह एक योगिनी मंदिर है, जो 64 योगिनियों को समर्पित है। बाहरी रूप से 170 फीट की त्रिज्या के साथ आकार में गोलाकार है। इसके आंतिरक भाग के भीतर 64 छोटे कमरे हैं। सभी कमरों में शिवलिंग स्थापित हैं।

वाटर हार्वेस्टिंग का बेहतरीन नमूना
64 योगिनी मंदिर वाटर हार्वेस्टिंग का प्राचीन और बेहतर नमूना है। इसके मुख्य केंद्रीय मंदिर से बारिश का पानी पाइपलाइन के जरिए जमीन के अंदर पहुंचाया जाता है।

मंदिर का ऊंचाई से नजारा संसद भवन जैसा।
मंदिर का ऊंचाई से नजारा संसद भवन जैसा।

भूकंप के झटके भी नहीं पहुंचा सके नुकसान
मंदिर की सबसे खास विशेषता यह है कि यह सैकड़ों साल से जैसा का वैसा है। इस दौरान कई बार भूकंप के झटके लगे। बावजूद इसके मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस शिव मंदिर की संरचना इस तरह है कि भूकंप के झटकों का इस पर असर नहीं पड़ता है। इसी की वजह से यह मंदिर आज तक सुरक्षित है।

मुख्य पर्यटन स्थलों में शुमार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मंदिर को प्राचीन और ऐतिहासिक इमारत घोषित किया है। हर साल देश-विदेश के सैकड़ों सैलानी इसे देखने आते हैं। इसकी खूबसूरती को निहारते हैं। इसी मंदिर के पास ही देवी का मंदिर है। यह मंदिर भी बहुत ऊंचाई पर है। यहां आने वाले पर्यटक इस मंदिर को भी देखने जाते हैं। इन दोनों मंदिरों के बीच एक विशाल मैदान है।

मंदिर का अधिक ऊंचाई से नजारा।
मंदिर का अधिक ऊंचाई से नजारा।

ऐसे जा सकते हैं

हवाई रूट :
मितावली से निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर हवाई अड्डा है जो लगभग 30 KM दूर स्थित है। झांसी हवाई अड्डा 123.9 KM दूर है।

ट्रेन द्वारा :
मितावली से निकटतम रेलवे स्टेशन गोहद रोड रेलवे स्टेशन है। मितावली से गोहद रोड रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 18 किलोमीटर है। मालनपुर रेलवे स्टेशन से यह मंदिर 20 किमी है।

सड़क द्वारा :
मितावली मुरैना से लगभग 30 किलोमीटर है।

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