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11 घंटे बोरवेल में गुजारने वाले बच्चे की आपबीती:अंधेरा देख डरने लगा; चिल्लाया- पापा हम नीचे गिर गए हैं, बचा लो

छतरपुर2 महीने पहलेलेखक: राजेश चौरसिया
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छतरपुर में 4 साल का दीपेंद्र बुधवार को खेत में खुले पड़े बोरवेल में खेलते-खेलते गिर गया। सुबह 11 बजे गिरे दीपेंद्र को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर रात 10 बजे बोरवेल से निकाला गया। बच्चा करीब 25 फीट की गहराई में फंसा था। गड्‌ढे से पैरेलल करीब 28 फीट से भी गहरी खुदाई कर बच्चे को बचाया। घटना ओरछा रोड थाना क्षेत्र के नारायणपुरा और पठापुर गांव के पास की है। फिलहाल दीपेंद्र जिला अस्पताल में एडमिट है।
दीपेंद्र गड्ढे में कैसे गिरा, अंदर का उसका अनुभव कैसा रहा, आइए जानते हैं खुद उसी की जुबानी...

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दीपेंद्र ने बताया, दोपहर में दादा और बड़ी मम्मी के साथ खेत पर गया था। गड्‌ढे के पास पहुंचा और अकेले खेलते वक्त उछलकर इसमें गिर गया। धीरे-धीरे बहुत अंदर चला गया। पहले तो डर नहीं लगा, लेकिन बाद में अंधेरा देख डर लगने लगा। मैं बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगा...।

बहुत देर बाद बड़े पापा की आवाज आई तो अंदर से चिल्लाया- बड़े पापा हम नीचे गिर गए हैं, हमें बचा लो। इसके बाद सब लोगों ने हमें बचा लिया। गड्‌ढे के अंदर सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। ऊपर से पाइप (ऑक्सीजन पाइप) आया तो अच्छा लगने लगा। एक अंकल ने रस्सी डाली और कहा- इसे हाथ के नीचे कंधे पर लपेट लो, मैंने वैसा किया तो उन्होंने ऊपर खींच लिया। अब अच्छा लग रहा है...।

बच्चे के पिता (बाएं) और उसके बड़े पापा, जिन्होंने सबसे पहले दीपेंद्र की आवाज सुनी।
बच्चे के पिता (बाएं) और उसके बड़े पापा, जिन्होंने सबसे पहले दीपेंद्र की आवाज सुनी।

बच्चे की आवाज सुन कांप उठे बड़े पापा

दीपेंद्र के बड़े पापा प्रेम नारायण यादव ने बताया- हम बच्चे को खोज रहे थे। उसकी मां उसे खोजते हुए खेत पर भी आई थी, लेकिन वह नजर नहीं आया। इसके बाद एक से डेढ़ बजे के बीच मैं फिर से खेत पर आया तो देखा कि बोरवेल के ऊपर रखा पत्थर दूर पड़ा है। मैं बोरवेल को ढंकने गया तो भीतर से आवाज आई- बड़े पापा हम गिर गए हैं, हमें निकालो। इस पर मैं कांप उठा, खुद को संभालते हुए बच्चे को कहा- बेटा रस्सी लेकर आ रहा हूं, आपको बाहर निकालने के लिए। इसके बाद सबको सूचना दी।

पिता बोले- 6 महीने पहले कराया था बोर

पिता अखिलेश यादव ने बताया- बड़े भाई ने खेत पर 6 महीने पहले ही बोरिंग करवाई थी। बोरवेल में पानी नहीं निकला था। इसलिए उसे पत्थर रखकर कंटीली झाड़ियों से ढंक दिया था। बारिश के पहले बुवाई के लिए खेत बनाना था, इसलिए कांटों को हटाया था। हमने उस खेत में डेढ़ क्विंटल मूंगफली बोई है। बड़े भाई बोर में पत्थर रखने ही गए थे कि बच्चे की आवाज सुनाई दी।

दीपेंद्र की मां लक्ष्मी ने बताया कि बच्चा किस तरह बोरवेल में गिरा।
दीपेंद्र की मां लक्ष्मी ने बताया कि बच्चा किस तरह बोरवेल में गिरा।

डॉक्टर बोले- बच्चा स्वस्थ है

बच्चे का इलाज कर रहे चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. राजेश जैन ने बताया कि बच्चा इस समय स्टेबल है। तापमान भी नॉर्मल है। ब्लड शुगर, ऑक्सीजन.... सबकुछ नॉर्मल है। ऑक्सीजन की कमी होने से काफी दिक्कतें आ सकती थीं। बच्चा बेहोश हो सकता था। वह नीला पड़ सकता था। पानी गिरने के कारण हाइपोथर्मिया के चांसेस भी थे। तापमान गिरता तो शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम नहीं करते, ऐसे में बड़ी मुश्किल हो सकती थी। हालांकि, बच्चा अब स्वस्थ है।

बच्चा चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. राजेश जैन की निगरानी में अस्पताल में है।
बच्चा चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. राजेश जैन की निगरानी में अस्पताल में है।

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