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पढ़ाई के साथ खेत में लगाई सब्जियां:आधुनिक तरीके से खेती कर बचा रहे पानी, प्रत्येक पौधे तक ड्रिप पद्घति से पहुंचा रहे पानी

रायसेन4 महीने पहले
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कई तरह की सब्जी लगाकर की जा रही खेती। - Money Bhaskar
कई तरह की सब्जी लगाकर की जा रही खेती।

पढ़ाई के साथ-साथ दो भाईयों ने अपनी मां के साथ मिलकर आधुनिक तरीके से खेती शुरू की है, जो अब उन्हें आय का जरिया बन रही है। उन्होंने अपने खेत में बेगन, टमाटर, गोभी, धनिया, मैथी सहित अन्य प्रकार की सब्जियां लगाई हैं, जो अब उनके लिए आय का जरिया बन गई है। उन्हें उम्मीद से ज्यादा आय इन सब्जियों से होने लगी है।

शहर में रहने वाले अर्पण मिश्रा बीएससी कर चुके हैं तो उसका छोटा भाई अर्पित बीकाम के साथ कंपनी सेक्रटरी का कोर्स भी कर चुका है, जबकि उनकी मां सीमा मिश्रा गृहिणी है। इन तीनों ने मिलकर खेती की शुरुआत की है। सुंड-सालेरा गांव में पारंगत खेती से हटकर उनके द्वारा आधुनिक तरीके से सब्जी की खेती करने के लिए एक एकड़ की खेत में चार हजार बेगन के पौधे और तीन हजार टमाटर के पौधे लगाए थे।

यह पौधे 70 दिनों से ज्यादा समय के हो गए हैं, उनमें अब सब्जियां आकर टूटने की स्थिति में आ गई है। इन पौधों से अब लगातार चार-पांच महीने तक लगातार सब्जी मिलती रहेगी। इतना ही नहीं फूल गोभी, पत्ता गोभी और धनिया भी आ चुका है। एक दो दिन में इन सब्जियों को बाजार में बेचना भी शुरू हो जाएगा।

अब उनके खेत को देखने आते हैं किसान
आधुनिक तरीके से खेती करने वाली सीमा मिश्रा ने बताया कि गांव में अधिकांश किसान पारंपागत खेती ही कर रहे हैं, उनके खेत में ही सब्जी की पैदावार की जा रही है। उनके खेत में लगे बेगन, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी, मैथी, मटर के लहलाते पौधों को देखने के लिए गांव के किसान भी आते हैं। उनकी खेती को देखकर आसपास के किसान इसको अपनाने पर विचार करने लगे हैं, क्योंकि परंपागत खेती से नुकसान से बचा जा सके।

प्रत्येक पौधे तक पानी पहुंचाने लगाया ड्रिप सिस्टम
अर्पित मिश्रा ने बताया कि प्रत्येक पौधे तक पानी आसानी से पहुंचता रहे, इसके लिए उन्होंने पूरे खेत में ड्रिप सिस्टम की लाइन बिछाई है, जिससे प्रत्येक पौधों को बूंद पानी पानी मिलता रहता है। इस प्रक्रिया से पौधों की सिंचाई करने से पानी बर्बाद नहीं होता है और प्रत्येक पौधे तक पानी पहुंच जाता है। इस सिस्टम से ही समय-समय पर पौधों को टॉनिक और दवा का छिड़काव भी कर देते हैं, जिसका ही परिणाम है कि अभी पाला तुषार पड़ने के बाद भी उनके पौधों को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचा।

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