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  • The Thing To Be Worried To Teach A 'lesson', The Parents, Who Are Now Reaching The Children With The Child Line, Say You Keep It Here; 12 Such Cases In A Month

चिंतित होने की बात:‘सबक’ सिखाने के लिए अब बच्चों को चाइल्ड लाइन लेकर पहुंच रहे पैरेंट्स, कहते हैं- आप इसे यहीं रख लो; एक महीने में ऐसे 12 मामले

भोपालएक महीने पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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ज्यादातर पैरेंट्स सोशल मीडिया की लत और गलत संगत में पड़े बच्चों को लेकर परेशान हैं। - Money Bhaskar
ज्यादातर पैरेंट्स सोशल मीडिया की लत और गलत संगत में पड़े बच्चों को लेकर परेशान हैं।

नाबालिग बेटी को गलत संगत से बचाने और उसे सबक सिखाने के लिए एक पिता ने चाइल्ड लाइन का सहारा लिया है। पिता बेटी को लेकर चाइल्ड लाइन पहुंचे और कहा कि उनकी 15 वर्षीय बेटी किसी की बात मानने तैयार ही नहीं है। यह सोशल मीडिया के माध्यम से गलत लोगों से दोस्ती कर बैठी है। वह एक लड़के से शादी करना चाहती है। इसकी वजह से पूरी कॉलोनी और समाज में बदनामी हो रही है।

वे अपनी बेटी को न तो अपने साथ रख सकते हैं और न छोड़ सकते हैं। इसलिए वह अपनी बेटी को चाइल्ड लाइन में छोड़ने आए हैं। उसने गुहार लगाई कि चाइल्ड लाइन ही बेटी को सही रास्ते पर ला सकती है, उन्हें कोई रास्ता नहीं सूूझ रहा। यह अकेला मामला नहीं है। चाइल्ड लाइन में इस तरह के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले एक महीने में ऐसे 7 मामले चाइल्ड लाइन में पहुंचे हैं। वहीं चाइल्ड लाइन की हेल्पलाइन नंबर 1098 पर भी इस तरह के हर महीने करीब पांच फोन पहुंचते हैं। यानी दोनों जगह कुल 12 मामले पहुंचे हैं।

एक बच्ची को करना पड़ा बालिका गृह में शिफ्ट
एक पैरेंट्स नाबालिग बच्ची को लेकर चाइल्ड लाइन पहुंचे। उनकी बेटी किसी लड़के से शादी करना चाहती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चाइल्ड लाइन ने लड़की की काउंसलिंग की। जब वह नहीं मानी ताे उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। जहां से उसे बालिका गृह भेज दिया गया। पिछले 8 दिनों से बालिक गृह में रह रही बच्ची को न तो मोबाइल मिल रहा न ही किसी तरह की प्राइवेसी। अब वह घर जाना चाहती है।

बच्चा आक्रामक, एक दिन रखना पड़ा चाइल्ड लाइन में
एक बच्चे के पिता ने तो बच्चे को सबक सिखाने के लिए उसे चाइल्ड लाइन में छोड़ दिया। उनका कहना था कि वह इतना आक्रामक है कि घर की चीजें फेंकने लगता है। चाइल्ड लाइन ने एक दिन बच्चे को रखा। उसकी काउंसलिंग की तो पता चला कि उसे विहेबियर प्रॉब्लम है। इसके बाद टीम ने पिता को बुलाकर उसे किसी साइकलोलाॅजिस्ट को दिखाने की सलाह दी।

अब बच्चों की काउंसलिंग कर पैरेंट्स को सौंप देते हैं
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष जागृति किरार का कहना है कि पहले तो इस तरह के बच्चों को बाल गृह में रख दिया जाता था। अब ऐेसे बच्चों को नहीं लिया जाता। इसकी वजह कई पैरेंट्स बच्चों को समस्या मानकर उन्हें चाइल्ड लाइन में भेज देते थे। जबकि ये बच्चे देखरेख संरक्षण वाले नहीं हैं। इसलिए बच्चों की काउंसलिंग करके पैरेंट्स को सौंप देते हैं।

कई ऐसे पैरेंट्स अपने बच्चों को बाल गृह और चाइल्ड लाइन में लेकर आते हैं। इसमें लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या ज्यादा है। पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चों को सबक मिले, इसलिए कुछ दिन बच्चों को बाल गृह में रख लिया जाए। -अर्चना सहाय, डायरेक्टर, चाइल्ड लाइन सिटी

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