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  • The Leopard Cub That Was Tamed By The Mother Became 6 Months Old, The Weight Also Increased From 2 To 8 Kg; Life Saved By Drinking Powdered Milk

वन विहार नेशनल पार्क:मां द्वारा छाेड़ा गया तेंदुआ शावक 6 महीने का हो गया, वजन भी 2 से 8 किलो हुआ; पाउडर वाला दूध पिलाकर बचाई जान

भोपालएक वर्ष पहले
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पिछले तीन महीने से रह रहा तेंदुआ शावक अब सेहतमंद हो रहा है। - Money Bhaskar
पिछले तीन महीने से रह रहा तेंदुआ शावक अब सेहतमंद हो रहा है।

वन विहार में पिछले तीन महीने से रह रहा कमजोर अवस्था का तेंदुआ शावक अब सेहतमंद हो रहा है। छह महीने पहले इसकी मां ने इसे छोड़ दिया था। अब इसका दूध बंद करके उसे चिकन कीमा दिया जा रहा है। यहां मिल रही खुराक से इसकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वन विहार के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि तेंदुआ शावक को बचाने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी है।

इसे आईवी फ्लूड दिया गया। साथ ही एंटीबायोटिक इंजेक्शन भी लगाए। अब 5 बीमारियों से बचाने वाला एक वैक्सीन देना है, जो 8वें माह में दिया जाएगा। इसके अलावा उसकी रुचि के हिसाब से उसका भोजन सिलेक्ट करना पड़ा। शुरू में गाय व बकरी का दूध दिया तो उसने नहीं पिया। फिर उसे डिब्बे का दूध दिया तो उसने उसे पीना शुरू किया। अब वह 6 माह का हो गया है। उसका दूध बंद कर दिया गया है। अब उसे दिन में तीन बार चिकन का कीमा दिया जा रहा है।

बीमार बच्चे को छोड़ देती है मां

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो बच्चे जंगल में सर्वाइव नहीं कर पाते या कमजोर होते हैं, ऐसे शावकों को मां जंगल में छोड़ देती है। अभी तक बाघिनों ने अपने शावकों को जंगल में छोड़ा था। यह दूसरा मौका है, जब तेंदुआ मां ने शावक को जंगल में छोड़ा।

तेंदुए का सफर

  • शावक की उम्र ढाई से तीन माह के बीच थी। जब उसे लाया गया था तो वही डिहाइड्रेट था।
  • वजन 2 किलो 1 ग्राम था, अब 8 किलो 500 ग्राम हो गया है।
  • जब गाय और बकरी का दूध नहीं पिया तो बाद में दिन में दो बार पाउडर का दूध दिया गया।
  • उसे चिकन कीमे का शोरबा दिया जाता था। कुल 4 बार यानी 2 बार दूध और 2 बार लिक्विड चिकन कीमा शोरबा दिया जाता था।
  • वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता उसका चैकअप करते हैं।