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  • The Corporation Claims... More Than 80 Stray Cattle Are Caught Every Day; Reality... 3000 Cattle On Roads, They Cause 20 Accidents Every Day

निगम की लापरवाही:निगम का दावा... हर दिन 80 से ज्यादा आवारा मवेशी पकड़ते हैं; हकीकत... 3000 मवेशी सड़कों पर, इनसे रोज होते हैं 20 हादसे

भोपाल3 महीने पहले
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  • 6 साल बाद भी... निगम शहर को कैटल फ्री नहीं बना पाया, जबकि इस कवायद पर 20 लाख से ज्यादा खर्च हो चुके हैं

नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि वे हर रोज शहर के अलग-अलग इलाकों से रोज 80 से ज्यादा आवारा मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस में बंद करते हैं। लेकिन, ये दावा इसलिए भी गले नहीं उतरता है क्योंकि अभी भी शहर में 3000 से ज्यादा मवेशी तो सड़कों पर ही दिखाई देते हैं। इनके कारण रोज करीब 20 हादसे होते हैं। इनमें कई गंभीर रूप से घायल होते हैं।

कुछ दिनों पहले ऐसे ही एक हादसे में घायल करोंद निवासी 35 वर्षीय ललिता कुशवाह की इलाज के दौरान मौत हो गई। दरअसल, निगम छह साल से शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए काम कर रहा है। इस दौरान 20 लाख से ज्यादा का बजट भी खर्च किया जा चुका है। लेकिन, आलम यह है कि न तो शहर कैटल फ्री हो पाया और न ही शहर से डेरियां ही बाहर जा सकी। यही कारण है कि राजधानी में सड़क पर आवारा मवेशियों का जमघट रहता है। खासकर बारिश के मौसम में जमीन गीली होती है तो मवेशी सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों, कॉलोनियों, चौराहों आदि पर दिखाई रहे हैं।

मवेशियों से टकराए... किसी को चोट लगी तो किसी को कमर दर्द

पिछले महीने रात आठ बजे दोपहिया से घर लौट रहा था। गीतांजलि चौराहे से गवरमेंट क्वार्टर की ओर आने वाली सड़क पर अंधेरे में मवेशी सड़क पर बैठे थे, इसलिए नजर नहीं आए। अचानक ब्रेक लगाया, गाड़ी फिसल गई। स्पीड कम थी, गंभीर चोट नहीं लगी।
बीएम रघुवंशी, निवासी कोटरा

भदभदा के पास सड़क पर ही बैठे मवेशी को नहीं देख पाया और गाड़ी उससे टकराई। मैं गाड़ी लेकर सड़क पर गिरा तो कमर में जबरदस्त चोट लगी। गनीमत यह रही कि पीछे कोई और वाहन नहीं था। मैं जैसे-तैसे उठकर घर पहुंचा। 15 दिन बाद भी कमर दर्द बना हुआ है।
प्रमोद पाराशर, निवासी नीलबड़

इन इलाकों में सबसे ज्यादा होती है परेशानी

अशाेका गार्डन, ईदगाह हिल्स, शाहजहांनाबाद, जहांगीराबाद, हमीदिया रोड, भेल, शाहपुरा, छोला, शिव नगर, नवीन नगर, हिनौतिया, सेमरा कला, नरेला शंकरी, विजय नगर, इंद्रपुरी, बैरागढ़, लाऊखेड़ी, बेहटा गांव, बरेला गांव, करोंद, भानपुर, पटेल नगर, कल्याण नगर,अर्जुन नगर, सोनागिरी, गोविंदपुरा सी सेक्टर, जंबूरी मैदान, कालीबाड़ी, चांदबाड़ी, बागमुगालिया, बाग सेवानिया, एम्स के पास, शक्ति नगर, साकेत नगर, बावड़ियाकला, नेहरू नगर, शबरी नगर, पंचशील नगर आदि।

अब तक ये प्रयास असफल

  • 2013 में डेरियों का सर्वे कराया। डेरी संचालकों की ओर से विरोध किया गया और मामला एनजीटी तक गया।
  • 2016 में छह स्थानों पर डेरी शिफ्टिंग की तैयारी की गई। जमीन भी आवंटित हुई, लेकिन शिफ्टिंग नहीं।
  • 2019 में जब लाखन सिंह यादव पशुपालन मंत्री थे, तब उन्होंने राजधानी को कैटल फ्री बनाने के निर्देश दिए थे। निगम ने अभियान चलाकर शहर से आवारा मवेशियों को पकड़ा और शहर से बाहर किया था।

बारिश में जमीन गीली होने से सड़क पर बैठ जाते हैं मवेशी

बारिश में जमीन गीली होने के कारण मवेशी सड़कों पर बैठ रहे हैं। हमारा अमला रोज 80 से ज्यादा आवारा मवेशियों को पकड़ रहा है। ताकि, सड़कों पर मवेशी जमा न हों। आगे भी आवारा मवेशियों को पकड़ने की कार्रवाई करेंगे।
- मनोज कुमार भूमरकर, प्रभारी, गोवर्धन परियोजना, नगर निगम

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