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अनूठी परंपराएं...:मराठी समाज बनाता है चावल का रावण तो अग्रवाल समाज उपलों का

भोपालएक वर्ष पहलेलेखक: राजेश चंचल
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सोना पत्ती से चावल के रावण का वध। - Money Bhaskar
सोना पत्ती से चावल के रावण का वध।

विजयादशमी पर सार्वजनिक स्थानों उत्सव समितियों के आयोजनों में रावण दहन हुआ, परंतु इस दिन कई समाजों में पर्व मनाए जाने की अपनी-अपनी परंपराएं हैं। इनमें कुछ बहुत अनूठी भी हैं। राजपूत समाज में शस्त्र पूजन के साथ पान का बीड़ा उठाकर अपनी कोई बुराई छोड़ने अथवा कोई नया कार्य को करने का संकल्प लेने की परंपरा है।

मराठी समाज

महाराष्ट्रीयन समाज के अनेक परिवारों में विजयादशमी पर्व पर सुबह घरों में छोटे बच्चों को का विद्यारंभ संस्कार कराया गया। पारंपरिक व्यंजन पूरणपोली, श्रीखंड आदि का भोग लगाकर पूजा की गई। शाम को घरों में कच्चे चावल से रावण की पुतलेनुमा आकृति बना कर उसका सोना पत्ती से वध

मलयाली समाज

मलयाली समाज के भेल, बैरागढ़ और तुलसी नगर स्थित भगवान अय्यप्पा मंदिर में दशहरा पर सरस्वती पूजन के साथ ही बच्चों का विद्यारंभ संस्कार संपन्न कराने की परंपरा है। इस बार भी पुरोहितों ने मंत्रोच्चार कर बच्चों से गणेश व सरस्वती मंत्र लेखन कराया।

अग्रवाल, ब्राह्मण, कायस्थ समाज

अग्रवाल, ब्राह्मण, कायस्थ और गुप्ता आदि समाजों के लोगों ने घरों में गोबर का पुतला व रावण के दस शीश के रूप में गोबर के दस छोटे उपले बनाए। कुछ समाजों में इन्हें बाद में विसर्जित किया गया, तो कुछ ने इन्हें जलाया।