पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भोपाल में इंजीनियर का सुसाइड:डिग्री करने के 2 साल बाद भी जॉब नहीं लगा; पिता ने बड़ी मुश्किल से पढ़ाया था

भोपाल4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

भोपाल में बेरोजगारी से तंग आकर 24 साल की एक इंजीनियर ने फांसी लगा ली। परिजन उसे फंदे से उतारकर अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पेरेंट्स ने बताया कि जॉब नहीं मिलने से वह मानसिक तनाव में चल रही थी। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था।

कोलार थाने के एसआई प्रमोद शर्मा ने बताया कि कोलार की बासखेड़ी में रहने वाली 24 साल की आकृति कुशवाह पुत्री रामनरेश कुशवाह ने दो साल पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। उसके बाद से ही वह जॉब की तलाश में थी। रविवार दोपहर उसने पहली मंजिल में अपने कमरे में साड़ी से फांसी लगा ली। घटना के दौरान आकृति की मां घर के बाहर बैठी हुई थीं। दोपहर करीब 4.30 बजे मां घर के अंदर आईं।

उन्होंने आकृति को आवाज लगाई, लेकिन बेटी ने कोई जवाब नहीं दिया। वे उसे आवाज लगाते हुए पहली मंजिल पर उसके कमरे तक पहुंची। आकृति उन्हें कमरे में फंदे पर लटकी मिली। मां पड़ोसियों की मदद से उसे अस्पताल ले गईं। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस को सुसाइड की सूचना अस्पताल से मिली। पुलिस ने सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

घर की बड़ी बेटी थी

एसआई शर्मा ने बताया कि पिता रामनरेश कुशवाह माली हैं। आकृति तीन भाई बहनों में से सबसे बड़ी थी। उससे छोटी एक बहन और भाई है। रामनरेश ने आकृति को बड़ी मुश्किलों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई थी। उन्होंने बताया कि 2 साल पहले डिग्री पूरी की थी। उसके बाद से जॉब नहीं लग रहा था। इसको लेकर वह मानसिक तनाव में थी। परिजनों को भी इसके बारे में पता था। उन्होंने उसे हौंसला रखने को कहा था, लेकिन घर की सबसे बड़ी बेटी होने के कारण वह जल्द से जल्द जॉब करके पापा की मदद करना चाहती थी। जॉब नहीं लगने के कारण आकृति डिप्रेशन में चली गई थी।

सुसाइड नोट नहीं मिला

आकृति रविवार दोपहर 2 बजे तक मां के साथ थी। मां घर के बाहर आ गईं। भाई-बहन भी घर के बाहर खेल रहे थे। शाम करीब साढ़े 4 बजे मां को वह फंदे पर मिली। करीब ढाई घंटे के अंदर उसने फांसी लगाई। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस सुसाइड के असल कारणों के बारे में नहीं बता पा रही है।

खबरें और भी हैं...