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डीपीसी के प्रोग्रामर पर रिश्वत मांगने के आरोप:भोपाल में RTE के तहत एडमिशन के लिए भेंट पूजा मांगी; दो स्कूल पहुंचे कलेक्टर के पास

भोपाल8 महीने पहले
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जिला शिक्षा केंद्र में संविदा प्रोग्रामर पर आरटीई की फीस पास करने के लिए स्कूल संचालकों ने रिश्वत मांगे जाने के आरोप लगाए हैं। - प्रतीकात्मक फोटो - Money Bhaskar
जिला शिक्षा केंद्र में संविदा प्रोग्रामर पर आरटीई की फीस पास करने के लिए स्कूल संचालकों ने रिश्वत मांगे जाने के आरोप लगाए हैं। - प्रतीकात्मक फोटो

जिला शिक्षा केंद्र (डीपीसी) भोपाल के अफसर पर महिला कर्मचारी के छेड़छाड़ के आरोप लगाने के बाद अब वहां के एक प्रोग्रामर पर रिश्वत मांगे जाने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में भोपाल के दो स्कूल संचालक कलेक्टर के पास पहुंच गए। उन्होंने शिकायत करते हुए कहा कि डीपीसी में संविदा प्रोग्रामर गिरीश सक्सेना उनसे भेंट पूजा मांग रहे हैं। हालांकि गिरीश सक्सेना ने उन पर लगे सभी तरह के आरोपों से इनकार किया है।

जानकारी के अनुसार सरस्वती शिशु मंदिर बैरागढ़ और लिटिल रोज पब्लिक स्कूल ने कलेक्टर से आरटीई के तहत शासन द्वारा जारी पैसा नहीं मिलने की शिकायत कलेक्टर भोपाल अविनाश लवानिया से की है। स्कूल संचालकों ने कहा कि स्कूल का वर्ष 2018-19 आरटीई का फीस का पैसा एक साल से ज्यादा समय से नहीं मिला है।

प्रोग्रामर सक्सेना द्वारा उनका प्रस्तवी स्वीकृत नहीं किया गया। हमने उन्हें भेंट पूजा नहीं दी। उन्होंने हमसे भेंट पूजा चाही थी। इतना नहीं स्कूल के रिकॉर्ड से भी छेड़छाड़ की गई। सक्सेना के खिलाफ कई शिकायतें होने के बाद भी उन्हें पद पर रखा गया है। इसी तरह निशातपुरा के एक और स्कूल न्यू रोज काई स्कूल ने भी आरटीई का फीस नहीं मिलने की शिकायत की है।

सक्सेना बोले- सभी आरोप गलत

इधर प्रोग्रामर सक्सेना का कहना है कि उनके कारण सभी की दुकानें बंद हो गई हैं इस कारण उन पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। सभी स्कूल संचालकों को उनका लॉगइन और पासवर्ड दिया जाता है। इसका पासवर्ड उनके ही मोबाइल फोन पर आता है। वे ही इंट्री करते हैं। बच्चों की जानकारी नोडल अधिकारी द्वारा सत्यापित की जाती है। उनका कोई रोल नहीं है। सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि वे स्कूल संचालकों द्वारा उनके खिलाफ कलेक्टर से शिकायत करने के बारे में जवाब नहीं दे पाए।

यह भी आरोप लगे

सक्सेना पर जिला शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा कार्यालयीन कार्य में लापरवाही, कदा चरण, एवं वित्तीय अनियमितता के आरोपों के कारण वर्ष 2016 में तत्कालीन कलेक्टर निशांत बरवडे ने संबंधित की संविदा अवधि को रोककर सेवा समाप्ति की कार्यवाही का प्रस्तावित की थी। बाद में उनका स्थानांतरण हरदा करा दिया गया था। वहां से वापस भोपाल ट्रांसफर हो गया था। उन्हें डीपीसी में पुराने कार्यो का प्रभार मिल गया। इसी के बाद से वे विवादों में हैं। ट्रांसफर को लेकर सक्सेना का कहना है कि इसके बारे में आरएसके से जानकारी लें।