पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX58649.681.76 %
  • NIFTY17469.751.71 %
  • GOLD(MCX 10 GM)479790.62 %
  • SILVER(MCX 1 KG)612240.48 %
  • Business News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • Leopards Are Dying More Than Tigers In MP, 56 Have Died In 6 Months, They Hunt For The Hair Of The Mustache In The Mechanism.

अंधविश्वास के चलते बाघ और तेंदुओं का शिकार:मप्र में बाघ से अधिक हो रही है तेंदुओं की मौत, 6 महीने में 56 ताेड़ चुके दम, तंत्र क्रिया में दांत-मूंछ के बाल के लिए करते हैं शिकार

भोपाल3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
शिकार के अलावा टेरिटोरियल फाइट, वाहन और ट्रेन दुर्घटना भी है माैत का कारण। - Money Bhaskar
शिकार के अलावा टेरिटोरियल फाइट, वाहन और ट्रेन दुर्घटना भी है माैत का कारण।

देश में टाइगर और लेपर्ड स्टेट बनने की कोशिश में वन विभाग भले ही एक बार फिर जुट गया हो लेकिन इनके शिकार और मौत को रोकने में सफल नहीं हो पा रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले 6 महीने में 31 बाघों और 56 तेंदुओं की माैत हुई है।

वन अधिकारियों का कहना है कि अंधविश्वास के चलते जादू, टोने-टोटके के नाम पर बाघ और तेंदुओं का शिकार हुआ है। इनके दांत, मूंछ और पूंछ के बाल का उपयोग काला जादू के नाम पर होना भी है। तंत्र-मंत्र के कारण इनको महंगे दामों में खरीदा जाता है। वन्य प्राणी प्रेमियों का कहना है कि यदि ऐसे ही बाघों और तेंदुओं की मौत होती रही तो मप्र से टाइगर स्टेट और लेपर्ड स्टेट को कर्नाटक दोबारा छीन सकता है। पांच साल में 150 बाघ और 255 तेंदुओं ने जान गंवाई है।

तेंदुओं के अंग को बाघ का बताकर बेच देते हैं

मप्र राज्यस्तरीय टाइगर स्ट्राइक फोर्स वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो सेंट्रल इंडिया ने आरोपियों से पूछताछ और शिकार किए जाने की वजह का विश्लेषण किया तो पाया कि शिकारी तेंदुए के दांत, बाल बाघ का बता कर बेंच रहे हैं। कटनी, जबलपुर और डिंडोरी से ऐसे 16 आरोपियों को पकड़ा था, जिन्होंने तेंदुए के अवयव बाघ का बताकर बेचे।

वाइल्ड लाइफ मुख्यालय द्वारा एनटीसीए को भेजी जानकारी में यह भी खुलासा हुआ है कि वाहन और ट्रेन दुर्घटना से भी बाघ, तेंदुओं की मौत हुई है। सबसे ज्यादा मौत सेंचुरी और टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले रेलवे लाइन और हाईवे से गुजरने वाले सड़कों से हुई है। इस जगह से गुजरने वाले ट्रैक पर अंडर पास और फ्लाई ओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं।

  • लगातार आरोपियों की धरपकड़ की जा रही है। वाहन व ट्रेन दुर्घटना को रोकने की दिशा में काम चल रहा है। ग्रामीणों और चरवाहों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शिकार के मामलों में फिलहाल कमी आई है।' - आलोक कुमार, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ
खबरें और भी हैं...