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अहम बदलाव:आइसक्रीम महंगी होगी, 13% बढ़ेगा जीएसटी; देर से रिटर्न भरा तो देनदारी से जुड़ेगी लेट फीस

भोपालएक महीने पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी
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जीएसटी काउंसिल की तीन दिन पहले हुई बैठक में टैक्स दरों में जो अहम बदलाव तय हुए हैं, वो अब सामने आए हैं। इसके मुताबिक आइसक्रीम खाना महंगा हो जाएगा। इस पर अभी 5% जीएसटी लगता है, जो 18% हो जाएगा।

खरीद-बिक्री के मासिक रिटर्न भरने में जो व्यापारी देरी करेंगे, उनसे वसूला जाने वाला विलंब शुल्क अब सीधे देनदारी यानी जीएसटीआर-3बी में जुड़कर आएगा। अभी इसके लिए 50 रु. प्रतिदिन विलंब शुल्क लगता है, लेकिन ये शुल्क आज तक किसी भी व्यापारी से नहीं वसूला जा सका है। जीएसटी विशेषज्ञ मुकुल शर्मा के मुताबिक नए प्रावधान का मप्र में रिटर्न भरने वाले 5.5 लाख व्यापारियों पर भी प्रभाव पड़ेगा। हालांकि मोटर स्पोर्ट्स का रोमांच देने वाले एम्यूजमेंट पार्क पर लगने वाला 28% जीएसटी घटाकर 18% होने जा रहा है।

2017-2018 के रेत ठेकों की लीज पर 18% ही टैक्स लगेगा
रेत समेत सभी तरह के माइनिंग ठेकों की लीज पर कुल 18% जीएसटी लग रहा है। लेकिन 1 जुलाई 2017 के बाद और 1 अप्रैल-2018 के पहले ठेकों की लीज पर केवल 5% जीएसटी ही वसूला गया। काउंसिल ने तय किया है कि अब इस अवधि के दौरान ठेके लेने वालों पर भी 18% जीएसटी लगेगा। सरकारी रिवर्स चार्ज से इसकी वसूली करेगी। जैसे ही ये ठेकेदार नए ठेकों लिए आवेदन करेंगे, उनकी पुरानी देनदारी खड़ी की जाएगी।

कहां-क्या बदलेगा : 5 करोड़ तक टर्नओवर तो सालाना रिटर्न
1 : पात्रता नहीं, फिर भी टैक्स क्रेडिट

पहले : एक जुलाई 2017 के बाद ली गई सभी टैक्स क्रेडिट पर 24% ब्याज।
अब : टैक्स क्रेडिट का उपयोग नहीं किया तो ब्याज नहीं और उपयोग किया है तो 18% ब्याज।
2. टैक्स क्रेडिट ट्रांसफर
पहले : कंपनी और व्यापारियों को अगर मप्र में टैक्स क्रेडिट मिली है तो वे उसे यहीं उपयोग कर सकते थे।
अब : दूसरे राज्यों की अपनी सहयोगी फर्म और कंपनियों में भी टैक्स क्रेडिट ट्रांसफर की जा सकती है।
3. टैक्स रिटर्न
पहले : व्यापारी अगर बिक्री-खरीद के रिटर्न (जीएसटीआर-1) भरने के बाद टैक्स रिटर्न (जीएसटीआर-3बी) न भरे तो अगले माह का जीएसटीआर-1 भर सकता था।
अब : जीएसटीआर-3बी नहीं भरने वाले व्यापारी का अगले माह जीएसटीआर-1 डाउनलोड ही नहीं होगा।
4. वैल्यू एडिशन क्रेडिट
पहले : कंपनियां एक उत्पाद जॉब वर्क के लिए दूसरे राज्य भेजती हैं। उन्हें तिमाही रिटर्न भरना होता है।
अब : 5 करोड़ तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को सालाना और इससे अधिक टर्नओवर वाली को छमाही रिटर्न भरना होगा।