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नई व्यवस्था:मेडिकल कॉलेजों के 395 करोड़ के उपकरणों का जिम्मा एचएलएल को, 24 घंटे से लेकर 7 दिन में करना होंगे ठीक

भोपालएक महीने पहले
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सालाना 25 करोड़ खर्च, हर जगह 4-5 बायोमेडिकल इंजीनियर्स तैनात। - Money Bhaskar
सालाना 25 करोड़ खर्च, हर जगह 4-5 बायोमेडिकल इंजीनियर्स तैनात।

गांधी मेडिकल कॉलेज समेेत प्रदेशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों की बिगड़ी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कवायद की जा रही है। इसके तहत यहां मेडिकल उपकरणों के मेंटेनेंस का जिम्मा एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड को सौंपा गया है। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग एचएलएल को हर साल 25 करोड़ रुपए देगा।

कंपनी द्वारा भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज, इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर के गजरा राजा, जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सागर मेडिकल कॉलेज और रीवा का श्यामशाह मेडिकल कॉलेज में बॉयोमेडिकल इंजीनियर्स को तैनात करेगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग और एचएलएल के बीच अनुबंध हो गया है।

इस व्यवस्था को लागू करने के पीछे मंत्री का तर्क है कि बड़ी संख्या में मेडिकल उपकरणों का उपयोग होने पर ये खराब हो रहे थे। कई बार तो ऐसा हुआ कि जिस कंपनी का उपकरण है। उसका दफ्तर एमपी में नहीं है, ऐसे में इंजीनियर्स को बाहर से बुलाने में दो से तीन दिन का समय लग रहा था। इसके चलते मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है।

अभी ये थी व्यवस्था, इसलिए होती थी देरी

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बताया कि अब तक हर साल मेडिकल उपकरणों के खराब होने पर संबंधित एजेंसी के लिए टेंडर निकाला जाता था। कई बार कंपनी के पास संबंधित उपकरण के स्पेयर पार्ट्स न होने पर उसको बाहर से बुलवाना पड़ता था। इसमें समय ज्यादा लगता था। मेंटेनेंस के लिए कोई समयसीमा तय नहीं होने की वजह से 10 से 15 दिन भी उपकरणों को ठीक होने में लग जाते थे। लेकिन अब इसकी समयसीमा तय होने से समय पर काम हो सकेगा।

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