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दावा, हकीकत और अंजाम:हिंदी विश्वविद्यालय ने शुरू किया प्राथमिक चिकित्सा उपचार पत्रोपाधि कोर्स, मान्यता लेकर सेंटर संचालक कर रहे हैं गुमराह

भोपालएक महीने पहलेलेखक: विवेक राजपूत
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विवि का कहना है कि यह कोर्स करने वाले को सिर्फ प्राथमिक उपचार यानी मरहम-पट्‌टी करने की पात्रता ही होगी। - Money Bhaskar
विवि का कहना है कि यह कोर्स करने वाले को सिर्फ प्राथमिक उपचार यानी मरहम-पट्‌टी करने की पात्रता ही होगी।

12वीं पास युवक और युवतियां अब एक साल का प्राथमिक चिकित्सा उपचार पत्रोपाधि कोर्स कर ना सिर्फ क्लीनिक खोल सकते हैं, बल्कि यहां मरीजों का इलाज भी कर सकते हैं। जी हां, कुछ ऐसे ही दावे और वादे वह सेंटर संचालक कर रहे हैं, जो हिंदी विश्वविद्यालय से मान्यता लेकर इस तरह के कोर्स करा रहे हैं। जबकि, विवि का कहना है कि यह कोर्स करने वाले को सिर्फ प्राथमिक उपचार यानी मरहम-पट्‌टी करने की पात्रता ही होगी।

विवि की ओर से चिकित्सा संबंधी कोर्स शुरू किए हैं। यह कोर्स प्राइवेट सेंटरों में कराए जाएंगे। सेंटर संचालित करने के लिए मान्यता विश्वविद्यालय की ओर से दी जाएगी। शहर में अब तक ऐसे 13 सेंटरों को मान्यता दी गई है। अब यह सेंटर संचालक ग्रामीण क्षेत्र में क्लीनिक खोलने की पात्रता होने का दावा करके बरगला रहे हैं।

एक सेंटर में 450 सीटें दी गई हैं, प्रवेश भी ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर दे रहे हैं

  • 13 सेंटर शहर में अब तक खोले जा चुके हैं।
  • 2500 से ज्यादा दाखिले अब तक हो गए
  • 48 सेंटर प्रदेश भर में अब तक खुल चुके हैं।

शर्त यह... नाम के आगे डॉक्टर नहीं लिख सकेंगे
अवधपुरी में ऐसा ही एक सेंटर संचालित किया जा रहा है। जब सेंटर संचालक से इस कोर्स के संबंध में बात की गई तो इस दौरान उन्होंने बारबार यह दावा किया कि कोर्स के आधार पर आप ग्रामीण इलाकों में क्लीनिक खोल सकते हो। यही नहीं सर्दी, जुकाम, खांसी, मलेरिया, बुखार और टायफाइड जैसी अन्य बीमारियों का इलाज कर सकते हैं। हां, लेकिन शर्त यह है कि अपने नाम के आगे डॉक्टर नहीं लिखेंगे।

रेवड़ी की तरह बटेंगे सर्टिफिकेट
जिस तरह से सेंटर और सेंटर में सीटों की संख्या है उससे आशंका ये है कि आने वाले समय में ये सर्टिफिकेट रेवड़ी की तरह बांटे जाएंगे। दरअसल, एक सेंटर में 450 सीटें दी गई हैं। किसी भी विषय से 12वीं पास युवक-युवती इसके लिए योग्य होगा। प्रवेश पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिए जा रहे हैं।

मॉनीटरिंग का जिम्मा निजी संस्था को....

हैरानी की बात तो यह है कि इस काेर्स के प्रबंधन का जिम्मा फर्स्ट एड काउंसिल आफ इंडिया (एफएसीआई) नामक एक निजी संस्था को दिया गया है। अब सवाल ये है कि प्राइवेट सेंटराें की मॉनीटरिंग का जिम्मा किसी निजी संस्था को देने से कितनी माॅनीटरिंग हो पाएगी।

क्लीनिक खोलने की पात्रता

यह कोर्स करने के बाद क्लीनिक खोलने की पात्रता मिल जाती है। चिकित्सा व्यवसाय कर सकते हैं। -डॉ. सुरेश राठौर, सेंटर संचालक, अवधपुरी

....तो यह पूरी तरह गलत है
सेंटर संचालकों को यह बता दिया गया है कि कोर्स करने वाले सिर्फ प्राथमिक उपचार यानी मरहम-पट्‌टी कर सकेंगे। इलाज करने की अनुमति नहीं होगी। कोई सेंटर संचालक अगर ऐसा कह रहा है तो यह पूरी तरह से गलत है।-प्रो. खेमसिंह डहेरिया, कुलपति, हिंदी विवि

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