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राज्य सरकार ने 11 दिन बाद फैसला बदला:11 दिन बाद बैकफुट पर सरकार; पंचायतें फिर पावरफुल, मिले वित्तीय अधिकार

भोपाल5 महीने पहले
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पंचायतों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। - Money Bhaskar
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पंचायतों के प्रतिनिधियों से चर्चा की।

राज्य सरकार ने 11 दिन बाद फैसला बदलते हुए सोमवार को 52 जिला पंचायत अध्यक्ष, 313 जनपद अध्यक्ष, 23922 सरपंच और 3 लाख 62 हजार पंचों को फिर पावरफुल बना दिया है। 2020 में पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी पिछले दो साल से अपने पदों पर काम कर रहे इन पदाधिकारियों को सरकार ने वित्तीय अधिकार लौटा दिए हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पंचायतों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इस दौरान पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने बताया कि उनसे 6 जनवरी को उनके वित्तीय अधिकार वापस ले लिए गए हैं, जिससे उन्हें दिक्कतें आ रही हैं।

इस पर सीएम ने नाराजगी व्यक्त की। सीएम ने कहा कि आज मैं फिर आपको, तीनों स्तर की पंचायतों को अधिकार लौटा रहा हूं। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने तीनों स्तर की पंचायतों को अधिकार वापस लौटाने के आदेश जारी कर दिए।

तीन तारीखें.. अधिकार दिए, लिए, फिर दिए

  • 4 जनवरी प्रशासकीय समिति में रख वित्तीय अधिकार दिए।
  • 6 जनवरी 48 घंटे में ही सभी अधिकार वापस ले लिए।
  • 17 जनवरी पंचायतों की नाराजगी के बाद फैसला बदला।

इस फैसले के मायने- निर्माण कार्यों में सरपंच खर्च कर सकेंगे 15 लाख तक

वित्तीय अधिकार मिलने के बाद सरपंच 15 लाख रु. तक निर्माण स्वीकृत कर सकेंगे। वहीं, जनपद पंचायत अध्यक्ष ऐसी स्वीकृति के संबंध में बैठक बुला सकेंगे। समिति की स्वीकृति पर प्रस्ताव अनुमोदित कर सकेंगे। ये मामले 25 से 35 लाख रुपए तक के निर्माण से संबंधित होंगे। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष जिले में समिति की स्वीकृति के बाद प्रस्ताव का अनुमोदन करेंगे। यह स्वीकृति बजट के अनुसार होगी, जो 50 लाख से ज्यादा हो सकती है।

पंचायतों के पास चार करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व

पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अधिकार वापस लेने से पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी थी। ये प्रतिनिधि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रदेश के करीब 4 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस आंकड़े की गंभीरता को समझते हुए सरकार ने उनके अधिकार फिर दे दिए हैं।

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