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ई-टेंडर घोटाला...:नहीं हो सका डेटा रिकवर, सर्ट-इन ने मांगी नई हार्ड डिस्क, अब रिपोर्ट का इंतजार

भोपालएक वर्ष पहले
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हजार करोड़ से अधिक के ई-टेंडर घोटाले की जांच दो साल बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी है। करीब डेढ़ साल बाद कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट-इन) ने ईओडब्ल्यू मुख्यालय को जानकारी दी है कि हार्ड डिस्क से टेडा रिकवर नहीं हो सकता है, इसलिए दूसरी हार्ड डिस्क भेजी जाए। ईओडब्ल्यू ने अब नए सिरे से उन्हें हार्ड डिस्क भेजी है।

ई-टेंडर घोटाले में जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने एमपीएसईडीसी के डेटा सेंटर से हार्ड डिस्क जब्त की थी। ईओडब्ल्यू को 9 टेंडर से संबंधित डेटा रिट्रीव करना था। घोटाले में साक्ष्यों एवं तकनीकी जांच में पाया गया कि ई प्रिक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर मप्र जल निगम मर्यादित के 3 टेंडर, लोक निर्माण विभाग के 2, जल संसाधन विभाग के 2, मप्र सड़क विकास निगम का एक, लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का एक, इस तरह कुल 9 टेंडर के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ की गई। ईओडब्ल्यू ने कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम को एनालिसिस रिपोर्ट के लिए 13 हार्ड डिस्क भेजी थीं, इसमें से तीन में टेंपरिंग की पुष्टि हुई थी।

इन कंपनियों के संचालकों के खिलाफ हुई थी एफआईआर

  • हैदराबाद की कंस्ट्रक्शन कंपनी- जीवीपीआर लिमिटेड, मैक्स मेंटेना लिमिटेड
  • मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी- ह्यूम पाइप लिमिटेड, जेएमसी लिमिटेड,
  • बड़ाैदा की कंस्ट्रक्शन कंपनी- सोरठिया बेलजी लिमिटेड, माधव इन्फ्रो प्रोजेक्ट लिमिटेड
  • भोपाल की कंस्ट्रक्शन कंपनी- राजकुमार नरवानी लिमिटेड, ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन।
  • एमपीएसईडीसी, मप्र के संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ ही एंट्रेस प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरू और टीसीएस के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं।
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