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MP में मुफ्त सैलेरी लेने वाले टीचर:2 साल से स्कूल में ताला लगा था; दो शिक्षक घर बैठे लेते रहे वेतन, छात्रों की संख्या शून्य बताई, निगरानी जन शिक्षक समेत 3 सस्पेंड

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
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मध्यप्रदेश का शिक्षा विभाग गजब है। भोपाल के रातीबढ़ और खजूरी के बीच सीमा पर स्थित शासकीय प्राथमिक शाना नांदनी का निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी भी दंग रह गए। स्कूल में ताला लगा था। वहां न बच्चे थे और न ही शिक्षक। अधिकारियों ने निगरानी जन शिक्षक अरुण मिश्रा को बुलाया, तो उन्होंने बताया कि यहां एक भी बच्चा नहीं है। यहां पर दो शिक्षक पदस्थ हैं। वे कभी स्कूल आते ही नहीं। इसके बाद जांच में पाया गया कि अरुण मिश्रा ने विभाग को गलत जानकारी देते हुए गुमराह किया है। स्कूल में दो बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन शिक्षक कभी नहीं आते।

इस लापरवाही के लिए संयुक्त संचालक लोक शिक्षण भोपाल आरएस तोमर ने अरुण मिश्रा को सस्पेंड कर दिया। जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना ने बताया कि जेडी ने इसकी कार्रवाई की है। दोनों शिक्षकों को भी सस्पेंड किया गया है।

पीएस ने किया था औचक निरीक्षण
दो दिन पहले प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी ने निरीक्षण किया था। वे वहां से निकलते समय स्कूल में पहुंची थीं। जांच में पाया गया कि यहां तैनात शिक्षकों ने बच्चों के एडमिशन के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। इन शिक्षकों के कारण दो ही बच्चे स्कूल में हैं, जबकि पास ही एमपी बोर्ड के प्राइवेट स्कूल में काफी संख्या में बच्चे हैं।

बिल्डिंग आदि होने के बाद भी बच्चों का एडमिशन नहीं होना लापरवाही है। स्कूल की निगरानी की जिम्मेदारी जन शिक्षक अरुण मिश्रा की थी, लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभाई। यह उनके कार्य में घोर लापरवाही है। इस कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाता है।

यह भी एक सच
इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा विभाग और अन्य अधिकारियों भी जिम्मेदारी बनती है। दो साल से एक स्कूल बिना संचालित हुए शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है। सभी जानकारी भी ऑनलाइन होती है, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। बताया जाता है कि कई अधिकारियों ने पूरी जानकारी होने के बाद भी मामले को दबाए रखा, लेकिन सिर्फ अरुण मिश्रा को ही जिम्मेदार बताया गया।

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