पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX57107.15-2.87 %
  • NIFTY17026.45-2.91 %
  • GOLD(MCX 10 GM)481531.33 %
  • SILVER(MCX 1 KG)633740.45 %

पढ़ाई के टेंशन में सुसाइड:एक्सीलेंस कॉलेज भोपाल के स्टूडेंट ने फांसी लगाई, मां से कहा था- मन नहीं लग रहा; खुद का स्कूल खोलना चाहता था

भोपालएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
चूनाभट्टी इलाके में बीए के छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। - Money Bhaskar
चूनाभट्टी इलाके में बीए के छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

भोपाल के एक्सीलेंस कॉलेज के BA फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट ने फांसी लगा ली। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट तो नहीं मिला, लेकिन परिजन का कहना है कि वह 6 महीने से पढ़ाई को लेकर तनाव में था। चार दिन पहले ही उसने मां को फोन कर मन नहीं लगने की बात कही थी। उसका सपना था कि वह खुद का एक बड़ा स्कूल खोले।

मूलत: रायसेन का रहने वाला 17 साल का अभिषेक लोधी पुत्र गणपत लोधी ममेरे भाई के साथ भोपाल के चूना भट्‌टी इलाके में किराए से रहता था। पिता रायसेन में खेती करते हैं। चूना भट्‌टी पुलिस को घटना की जानकारी रविवार शाम 6 बजे JP अस्पताल से मिली। अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचा दिया। परिजन ने पुलिस को बताया कि अभिषेक करीब 6 महीने से मानसिक तनाव में था। पढ़ाई को लेकर वह मार्च में अवसाद में चला गया था। उसका एक डॉक्टर के यहां इलाज भी चल रहा था।

एक्सीलेंस कॉलेज में उसका एडमिशन हो गया और वह भोपाल पढ़ाई करने आ गया। यहां भी वह कुछ दिन से तनाव में था। सोते समय कुछ भी बोलते रहता था। रविवार दोपहर में वह घर पर था। ममेरा भाई कटिंग कराकर शाम करीब 5 बजे कमरे पर पहुंचा तो अभिषेक फंदे पर मिला। वे उसे अस्पताल ले आए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

4 दिन पहले मां से बोला था- घर आ रहा हूं

परिजन ने पुलिस को बताया कि चार दिन पहले उसकी फोन पर मां से बात हुई थी। उसने मां से कहा था कि उसका यहां मन नहीं लग रहा है। उसे यहां अच्छा नहीं लग रहा है। वह घर आना चाहता है। वह जल्द ही गांव आ रहा है। इसके बाद उसने बात नहीं की।

बड़ा आदमी बनना चाहता था

परिजन ने बताया कि मार्च में मानसिक तनाव में आने के बाद उसका इलाज चलने लगा। एडमिशन होने के पहले वह कुछ ठीक हो गया था, लेकिन कॉलेज में आने के बाद से वह फिर मानसिक तनाव में आ गया था। वह बोलता था कि वह बड़ा आदमी बनना चाहता है। उसे एक बड़ा स्कूल खोलना है। वह कुछ नहीं कर पाया।