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OBC आरक्षण पर शिवराज सरकार ने आखिरी दांव खेला:सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका मंजूर, जानिए क्या दिए तर्क...

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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मध्यप्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मध्यप्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। सरकार OBC वर्ग को आरक्षण देने के लिए 12 मई की देर रात सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका (एप्लिकेशन फॉर मॉडिफिकेशन) दाखिल कर चुकी है। जिसे स्वीकार कर लिया है। सरकार ने इसमें ट्रिपल टेस्ट की निकायवार तैयार रिपोर्ट पेश की है। इस आधार पर आरक्षण देने के लिए दावा किया है। यह भी बताया कि पंचायतों के लिए आरक्षण प्रक्रिया 15 दिन में कैसे पूरी होगी। इस पर सुनवाई 17 मई (मंगलवार) को होगी।

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी है। चुनाव की तारीख भी आएगी और चुनाव भी होंगे। हम चुनाव रुकवाने नहीं गए हैं, बल्कि मॉडिफिकेशन के लिए गए हैं। नरोत्तम ने सुप्रीम कोर्ट से समय मांगने के पीछे के दो कारण बताए। उन्होंने कहा अगर हम 2019 का परिसीमन लें या फिर 2022 का, इसमें कहीं-कहीं पर नगर पालिका में, ग्राम पंचायत में उसका रूप परिवर्तित हो गया है। स्वरूप बदलने से भ्रम की स्थिति पैदा होगी कि चुनाव नगर पालिका के हिसाब से कराएं या नगर पंचायत के हिसाब से कराएं या ग्राम पंचायत के हिसाब से कराएं। इसलिए समय मांगा गया है।

गौरतलब है, इससे पहले अधूरी रिपोर्ट के कारण सुप्रीम कोर्ट ने बगैर OBC आरक्षण के ही स्थानीय चुनाव कराने के आदेश दिए थे। उधर, राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है, लेकिन अब सरकार की याचिका मंजूर होने से फिर से संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं। सरकार किसी भी हाल में बगैर आरक्षण चुनाव नहीं कराना चाहती, इसलिए उसने आखिरी दांव खेला है।

राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों का दावा है कि नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के चुनाव 16 जून के बाद हो सकते हैं, जबकि पंचायतों के चुनाव काे लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति है, क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर सरपंच पद तक का आरक्षण होना है। इसमें एक से दो महीने का समय लग सकता है। आयोग के आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने भी संकेत दिए हैं कि नगरीय निकायों के चुनाव कराने में वैधानिक दिक्कत नहीं है।

OBC वर्ग को आरक्षण देने निकायवार रिपोर्ट पेश
राज्य सरकार ने ट्रिपल टेस्ट के आधार पर पिछड़ा वर्ग आयोग ने OBC को 35% आरक्षण देने की सिफारिश की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कटाक्ष करते हुए कहा था- स्थानीय चुनाव में OBC वर्ग आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट निकायवार नहीं किया है। इस रिपोर्ट का अर्थ नहीं। बिना OBC आरक्षण ही चुनाव कराएं। अब सरकार संशोधन याचिका के माध्यम से ओबीसी वर्ग की निकायवार संख्या की नई रिपोर्ट शीर्ष अदालत में पेश कर रही है।

यह भी बनाया गया आधार
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 मई को दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ मीटिंग की थी। यहां तय किया गया कि संशोधन याचिका में तर्क दिया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद 15 दिन में चुनाव कराना संभव प्रतीत नहीं होता, क्योंकि पंचायतों का आरक्षण नहीं हुआ है। सरकार की तरफ से वकील कोर्ट में यह भी कह सकते हैं कि बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने पर कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

6 हजार से ज्यादा पार्षद चुनेंगे नगर सरकारें
जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में महापौर का चुनाव डायरेक्ट नहीं होगा, बल्कि पार्षद चुनेंगे। प्रदेश के 16 नगर निगमों समेत नगर पालिकाओं व परिषदों में 6 हजार से ज्यादा पार्षद उम्मीदवार चुनाव मैदान में होंगे। नगर निगमों में 3,813, नगर पालिकाओं में 1706 व नगर परिषदों में 882 परिषदों में पार्षद चुने जांएगे।

निकायों में OBC आरक्षित सीटें हो गई हैं सामान्य
राज्य सरकार ने 9 दिसंबर 2021 को नगरीय निकायों के वार्डों का आरक्षण किया था। जिसमें एससी-एसटी के अलावा ओबीसी के लिए सीटों का आरक्षण किया गया था। अब इन निकायों में चुनाव उसी आरक्षण के आधार पर होगा, लेकिन ओबीसी के लिए रिजर्व की गई सीटों को सामान्य घोषित कर दिया जाएगा। इसकी वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी वर्ग को आरक्षण के बिना ही चुनाव कराने का अंतरिम आदेश दिया है। अब संशोधन याचिका पर अंतिम फैसला होगा।

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