पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

नकल की, अकल नहीं लगाई:अहमदाबाद ने बिजी रूट पर कॉरिडोर बनाया हमने बिजी रोड पर, 24 किमी में 125 जंक्शन

भोपाल4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
अहमदाबाद को मॉडल माना, पर प्लानिंग में फेल। - Money Bhaskar
अहमदाबाद को मॉडल माना, पर प्लानिंग में फेल।

दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तहत केवल 8 किमी में बीआरटी कॉरिडोर बनाया गया था, लेकिन बहुत ज्यादा संख्या में जंक्शन्स होने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुविधाजनक नहीं होने के कारण इसे हटाना पड़ा। भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के नाम पर जिस 24 किमी में कॉरिडोर बनाया गया, उसमें दिल्ली जैसी इन दो बातों के अलावा एक और मुद्दा शामिल है।

भोपाल के प्लानर्स ने समस्या को समझे बिना केवल अहमदाबाद जैसे शहर को देखकर बीआरटीएस प्रोजेक्ट तैयार कर लिया। लेकिन अंतर यह रहा कि वहां बिजी रूट पर कॉरिडोर बनाया, भोपाल में इसके लिए बिजी रोड को चुन लिया। नतीजा यह हुआ कि ट्रैफिक की समस्या कम होने की बजाय बढ़ती ही चली गई। अहमदाबाद में इसकी सफलता की वजह यह भी है कि वहां हर 700 मीटर पर बस स्टॉप है जबकि हमारे यहां कहीं पास-पास तो कहीं कई किमी दूर।

एक्सपर्ट ने भी कहा- बेहतर है इसे हटा दिया जाए

बेहतर है इसे हटा दिया जाए

भोपाल कॉरिडोर शुरू से ही अधूरा है। कहीं जगह नहीं मिलने तो कहीं दूसरी वजह से बीआरटीएस कंपलीट नहीं बन सका। इसके बाद फ्लाईओवर जैसी प्लानिंग से डेडिकेटेड लेन और कम होती जा रही है। इससे तो बेहतर है, डेडिकेटेड लेन खत्म कर दी जाए।-अनुज जायसवाल, ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट मैनिट

भोपाल में बीआरटीएस खराब प्लानिंग का उदाहरण है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट बद से बदतर हो गया है। बीआरटीएस के कारण हर प्रमुख चौराहे पर जाम लग रहा है।- विनय प्रकाश श्रीवास्तव, आर्किटेक्ट एंड अरबन प्लानर

अहमदाबाद- पहले से ही अच्छा था पब्लिक ट्रांसपोर्ट​​​​​​​

अहमदाबाद में भोपाल जैसा 24 किमी का कॉरिडोर है। इसे सबसे सफल माना जाता है। इसकी बड़ी वजह यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट पहले से ही बेहतर था। बीआरटीएस ने उसे और सुविधाजनक बना दिया। कम जंक्शन से बसें बिना किसी रुकावट के चलती हैं।​​​​​​​

पुणे- हर गाड़ी की अलग लेन फिर भी परेशानी

पुणे में दिसंबर 2006 में बीआरटीएस में ट्रैफिक शुरू हुआ। 61 किमी के कॉरिडोर पर 1500 करोड़ खर्च हो चुके हैं। बस, कार व बाइक के लिए अलग डेडिकेटेड लेन बनाई हैं। पर बढ़ती वाहनों की संख्या और मेट्रो प्रोजेक्ट से यहां भी मेट्रो में कई दिक्कतें हैं।

इंदौर- यहां भी ट्रैफिक जाम की वजह बना

इंदौर में 11 किमी में बीआरटीएस है। शहर के व्यस्ततम इलाके में यह कॉरिडोर ट्रैफिक जाम की वजह बन रहा है। करीब 3 साल पहले कॉरिडोर में ही कारों को भी अनुमति दे दी गई थी, लेकिन अब केवल आई बसें ही इसमें चल रहीं हैं।

दिल्ली- 8 किमी का पायलट प्रोजेक्ट ही फेल

दिल्ली में अंबेडकर नगर से मूलचंद नगर तक केवल 8 किमी में बीआरटी कॉरिडोर बनाया गया था। लेकिन, यहां ट्रैफिक कैरेक्टर ही बीआरटीएस के अनुकूल नहीं था। इस कॉरिडोर में जगह-जगह जंक्शन थे। नतीजा इसे तोड़ना ही पड़ा।

खबरें और भी हैं...