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फैमिली सुसाइड केस में चौथी मौत:व्यापारी ने दम तोड़ा; मरने से पहले सूदखोर गैंग के जुल्मों की सुनाई दास्तां, पत्नी की हालत गंभीर

भोपालएक वर्ष पहले
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भोपाल में सूदखोरों से तंग आकर ऑटो पार्ट्स व्यापारी के परिवार के सामूहिक खुदकुशी मामले में चौथी मौत हो गई है। परिवार के मुखिया संजीव जोशी ने भी शनिवार देर रात दम तोड़ दिया। इससे पहले शनिवार को सुबह उनकी बड़ी बेटी ग्रीष्मा की मौत हो गई थी, जबकि शुक्रवार को उनकी छोटी बेटी पूर्वी, मां नंदनी जिंदगी की जंग हार चुकी हैं। परिवार में अब सिर्फ संजीव की पत्नी अर्चना बची हैं। वह भी अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भी हालत गंभीर है।

सिलसिलेवार जिंदगियों की कड़ियां टूटती जा रही हैं। बता दें, आनंदनगर में रहने वाले ऑटो पार्ट्स व्यापारी संजीव जोशी ने पत्नी अर्चना, मां नंदनी, बड़ी बेटी ग्रीष्मा, छोटी बेटी पूर्वी के साथ मिलकर गुरुवार रात जहर खा लिया था। पांच लोगों के परिवार में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने परिवार को प्रताड़ित करने वाली सूदखोर गैंग की सरगना बबली दुबे उसकी बेटी रानी दुबे, सगी बहनें उर्मिला खांबरा, प्रमिला बेलदार को गिरफ्तार किया है।

यूं साथ छोड़ते गए परिवार के एक-एक सदस्य...

  • 25 नवंबर: रात 10 बजे संजीव जोशी के परिवार के पांचों सदस्यों ने जहर खाकर खुदकुशी का प्रयास किया।
  • 26 नवंबर: सुबह से दोपहर 12 बजे के बीच संजीव की छोटी बेटी पूर्वी, मां नंदनी की मौत हो गई।
  • 27 नवंबर: सुबह संजीव की बड़ी बेटी ग्रीष्मा ने दम तोड़ दिया। रात करीब 11 बजे संजीव की मौत हो गई।

मौत से पहले संजीव ने सुनाई थी दास्तां...
इस साल जून से मैंने ध्यान दिया कि अर्चना की किराने की दुकान में सामान कम होता जा रहा है। अर्चना मुझसे अकसर पैसे मांगने लगी थी। उससे मिलने बबली दुबे रोजाना आती रहती थी। मैंने सितंबर में अर्चना से बबली के आने का कारण पूछा। अर्चना ने बताया कि उसने बच्चों की पढ़ाई और अन्य खर्चों के लिए कई किस्तों में तकरीबन 3 लाख 70 हजार रुपए ब्याज पर लिए हैं, इसलिए बबली और उसकी बेटी रानी घर आकर विवाद करती हैं। इस पर परेशानी दूर करने के लिए अक्टूबर में मैंने 80 हजार रुपए बबली को दिए।

बबली और रानी कहने लगी कि ये तो ब्याज ही है। अभी मूलधन 3 लाख 70 हजार रुपए बाकी है। हम उनके बार-बार पैसे मांगने को लेकर की जाने वाली गाली-गलौज से परेशान हो गए। हमने सोचा कि घर बेचकर इनकी उधारी चुकाकर सुकून से रहने लगें। हमने बबली से कुछ समय की मोहलत मांगी। इसके बाद भी दोनों घर में दो-तीन दिन से आकर बेटियों, मां और पत्नी अर्चना को धमकी देती थीं। कभी-कभी बबली की रिश्तेदार भी आती थी। इसी मंगलवार को जब मैं रात आठ बजे घर पहुंचा, तो दोनों बेटियां, मां और पत्नी अर्चना रो रहे थीं।

मैंने पूछा, तो बताया कि बबली , रानी, अशोका गार्डन की बबली गौड़ और पटेल नगर की उर्मिला ने घर पर आकर पैसों की मांग को लेकर गालियां दी थीं। वे घर के बाहर मोहल्ले में भी चिल्ला-चिल्लाकर बदनाम कर रही थीं। मैं और परिवार रोज-रोज की गाली-गलौज से तंग आ चुके थे। फिर हमने विचार किया कि रोज-रोज के अपमान से अच्छा है कि सभी एक साथ सुसाइड कर लें। निर्णय के अनुसार बुधवार को बेटी पूर्वी व मां ने कुत्तों और चूहों को चूहा मार दवा खिलाई। इससे उनकी मौत हो गई। अगले दिन गुरुवार रात करीब 10 बजे हम सब लोगों ने यही चूहा मार दवाई कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर पी ली।
(जैसा संजीव ने पुलिस को बयान में बताया था।)

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