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सीहोर से हैं ओमानी फास्ट बॉलर मुनीस:बोले- काबिल था, लेकिन रणजी नहीं खेलने दिया गया; इसका जिम्मेदार मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन

भोपाल (जलज मिश्रा)एक महीने पहले
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फास्ट बॉलर मुनीस अंसारी - Money Bhaskar
फास्ट बॉलर मुनीस अंसारी

2005 में दिल्ली में हुए फास्ट बॉलर्स टैलेंट हंट में 53,000 खिलाड़ी शामिल हुए थे। इनमें सिर्फ 7 प्लेयर का चयन हुआ। इन सात में से एक हैं फास्ट बॉलर मुनीस अंसारी। मुनीस 2008 से ओमान क्रिकेट टीम के लिए खेल रहे हैं और 2014 से वे ओमान नेशनल क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं। मुनीस मध्यप्रदेश के सीहोर से हैं। रविवार को ओमान और पापुआ न्यू गिनी के बीच T-20 वर्ल्डकप के लिए क्वालीफायर मैच है। दैनिक भास्कर से जलज मिश्रा ने मुनीस अंसारी ने बात की और जाना उनके सीहोर से ओमान पहुंचने तक के सफर को। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल: आप सीहोर में कहां से हैं ? क्रिकेट में रुचि कैसे पैदा हुई?
मुनीस: मैं सीहोर शहर के कस्बा मोहल्ले से हूं। हमारे घर के पास एक बड़ा मैदान हुआ करता था, जहां मेरे सीनियर्स और दोस्त क्रिकेट खेला करते थे। उनके साथ मैंने भी खेलना शुरू किया और धीरे-धीरे मेरी रुचि इस ओर जग गई और क्रिकेट में मुझे मजा आने लगा।

सवाल: क्रिकेट में आपने ने जो संघर्ष किया, उस बारे में थोड़ा बताइए।
मुनीस: संघर्ष तो बहुत रहा। शुरुआत में तो गली-मोहल्लों में ही क्रिकेट खेला और सीखा। उस वक्त मैंने सोचा था कि मैं इंडिया टीम के लिए खेलूंगा। 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर फास्टेस्ट बॉलर के लिए टैलेंट हंट का आयोजन हुआ था। इसमें सिलेक्शन के लिए पूरे भारत से 53,000 बच्चे आए थे। चयन सिर्फ सात लोगों का हुआ था। इनमें से एक मैं भी था। फाइनल मुंबई में हुआ था। उस मैच में मैंने 143 किमी/घंटा की रफ्तार से बॉलिंग की थी। उस वक्त मैंने धोनी, सचिन को बॉल डाली थी। यहां तक कि हरभजन को मैंने बोल्ड भी किया था। सभी मेरी बॉलिंग से काफी खुश भी हुए थे।

लेकिन, अंत में मेरा सिलेक्शन नहीं हो सका और दिल्ली के एक लड़के को आगे भेजा गया। मैं निराश नहीं हुआ और वापस आकर भोपाल संभाग के लिए खेलने लगा। अब जब रणजी टीम के लिए सिलेक्शन हो रहा था। उस दौरान इंदौर और भोपाल के बीच फाइनल मैच था। मैंने उसमे 6 विकेट झटके थे। बावजूद इसके रणजी में मेरा सिलेक्शन नहीं हो पाया। इसके बाद मैंने तय किया कि मैं इंडिया के लिए नहीं खेलूंगा।

टीम के साथ जश्न मनाते हुए मुनीस
टीम के साथ जश्न मनाते हुए मुनीस

सवाल: ओमान क्रिकेट टीम ही क्यों?
मुनीस- हुआ क्या मैं सिलेक्शन में लगा हुआ था, लेकिन कहीं हुआ नहीं। परिवार से अब कुछ कमाने के लिए दबाव बनने लगा। मेरा एक दोस्त है अहमद खान उसने मुझे बताया कि ओमान मैं नौकरी है, अगर करना है तो यहां आ जाए। वो भी ओमान में ही था। ऐसे में ओमान पहुंच गया। अब मैं वहां जॉब के साथ-साथ क्रिकेट भी खेलता था। यहां मुझे 28 साल की उम्र में डोमेस्टिक खेलने का मौका मिला। इसके बाद 2014 में मुझे इंटरनेशनल खेलने का मौका मिला। उस साल वर्ल्डकप के लिए ओमान को क्वालीफायर राउंड जीतना था। लास्ट ओवर था और 12 रन चाहिए था। बॉलिंग मैं कर रहा था। प्रेसर था। मैंने बाल फेंकी और लास्ट ओवर में 2 विकेट झटक कर 6 रन दिए। इसके बाद एक मैच और खेल कर हम वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किए।

सवाल: आपको इंडिया टीम से खेलने का मौका नहीं मिल पाया। इसकी वजह आप क्या मानते हैं ?
मुनीस: वजह एक ही है- एमपी क्रिकेट एसोसिएशन। मैं काबिल था, लेकिन इसके बाद भी मुझे रणजी नहीं खेलने दिया गया। मैं इसका जिम्मेदार MPCA को मानता हूं।

सवाल: आज ओमान का मैच है न्यू गिनी के साथ, लेकिन आपको टीम में मौका नहीं मिला। इसकी वजह?
मुनीस- मैं अभी इससे पहले आबुधाबी लीग खेल रहा था। इसी लीग के दौरान में चोटिल हो गया था। इसलिए मैं टीम का हिस्सा नहीं हूं। शायद मेरी जगह कलीम उल्लाह को खेलने का मौका मिले।

जलज: आपके परिवार मैं कौन-कौन है ?
मुनीस- मम्मी-पापा हैं। एक बड़े भाई हैं, जो सीहोर के ही एक सरकारी स्कूल में अकाउंटेंट हैं। बहनों की शादी हो गई है और पत्नी और बच्चे हैं, जो मेरे साथ ओमान में ही रहते हैं।