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खाद बनाने का प्लांट फैक्ट्री से निकले कबाड़ से बनाया:रेलवे कोच फैक्टरी के मेस से निकलने वाले ग्रीन वेस्ट से हर महीने बन सकेगी 2 क्विंटल सॉलिड और 15 हजार लीटर लिक्विड खाद

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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ऐसा है प्लांट, (इसमें ऑयल के ड्रम और कंटेनर का किया उपयोग।) - Money Bhaskar
ऐसा है प्लांट, (इसमें ऑयल के ड्रम और कंटेनर का किया उपयोग।)
  • पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो दूसरी जगह भी बनेगा

भोपाल के निशातपुरा कोच फैक्टरी में पहली बार मेस में बनने वाले खाने के ग्रीन वेस्ट और परिसर में लगे पेड़ पौधे से निकलने वाले सूखे कचरे को डी- कंपोस्ड करके जैविक खाद बनाई जाएगी। इसके लिए कोच फैक्ट्ररी परिसर में खाद बनाने का प्लांट लगाया गया है।

इस पायलट प्रोजेक्ट प्लांट को कोच फैक्ट्ररी से निकलने वाले कबाड़ से बनाया गया है। रेलवे में लगने वाले आइल के ड्रम, कंटेनर आदि का प्रयोग किया है। अब इस कचरे का निष्पादन और उपयोग वैज्ञानिक पद्धति से किया जाएगा। यहां से तीन मीट्रिक टन ग्रीन वेस्ट निकलता है। यहां लगने वाले प्लांट से हर माह दो क्विंटल सॉलिड खाद और 15 हजार लीटर लिक्विड खाद निकलेगी।

खाद का उपयोग रेलवे परिसर में लगे पेड़-पौधों में किया जाएगा

सार्थक संस्था के डायरेक्टर इम्तियाज अली का कहना है कि यहां पर हर दिन निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को छोटे छोटे टुकड़ों में काटा जाएगा। इसका पल्प बनाकर बड़े ड्रम में डाला जाएगा। ड्रम को एक पाइप लाइन के माध्यम से अन्य ड्रम से जोड़ा गया है। इसमें से बिना ऑक्सीजन के पल्प सड़ने की प्रक्रिया होगी। जिससे एक लिक्विड तैयार होगा। जो पाइप के माध्यम से ड्रम में चला जाएगा। उसके बाद सॉलिड कचरा 30 दिन में खाद का रूप ले लेता है। इस खाद को छान कर परिसर में लगे पेड़-पौधों में डाला जाएगा। वहीं लिक्विड खाद को परिसर में लगे पौधों को पानी में मिलाकर सिंचित किया जाएगा। इस प्लांट से निकलने वाली जैविक खाद प्लांट का रिकार्ड मैंटेन किया जाएगा।

80 फीसदी काम पूरा...प्लांट अगस्त के पहले हफ्ते में बनकर हो जाएगा तैयार

कोच फैक्ट्ररी के चीफ इंजीनियर कुमार आशीष ने बताया कि फैक्ट्ररी के कबाड़ से जैविक खाद बनाने का प्लांट बनाया गया है। यहां पर कोई भी सामान बारह से नहीं लाया गया। इस प्लांट को बनाने का काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। 20 प्रतिशत काम अगस्त के पहले हफ्ते में पूरा हो जाएगा। इस प्लांट के शुभारंभ की तारीख अभी तय नहीं की है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद इसका शुभारंभ होगा।

आगे अन्य रेलवे कॉलोनियों से एकत्रित होगा कचरा

  • 3 मीट्रिक टन कचरे का होता है उपयोग।
  • 5 मीट्रिक टन एकत्रित करने की है योजना।
  • 30 दिन लगते हैं साॅलिड खाद बनने में।
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