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गीता स्वाध्याय कार्यक्रम:108 उपनिषदाें का सार है श्रीमद्भागवत गीता

शाढ़ौरा4 महीने पहले
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  • प्रथम अध्याय के 26 वें से 47 वें श्लोक का अर्थ करते हुए पूरण सिंह ने कहा-

गीता प्रतिष्ठानम् उज्जैनी के गीता स्वाध्याय मंडल शाढ़ौरा द्वारा सदर बाजार स्थित श्री हनुमान मंदिर पर गीता स्वाध्याय का आयोजन किया। इसमें गीता स्वाध्याय समिति के सदस्यों के अलावा कई गणमान्य लोग व श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के चित्र व श्रीमद्भागवत गीता ग्रंथ की विधिवत पूजन अर्चन व दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में सभी ने गुरु वंदना कर प्रेरणा गीत गाया।

पंडित देवीलाल शर्मा ने श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम अध्याय के 26वें श्लोक से लेकर 47वें श्लोक तक का सामूहिक रूप से पाठ कराया। इनका बारी बारी से सभी ने एक-एक श्लोक का अर्थ पढ़ कर सुनाया। इस दौरान पंडित श्री शर्मा ने बताया कि श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने श्रीमुख से अर्जुन को लोभ और मोह को नष्ट करने का उपदेश दिया है। क्योंकि यह लोभ और मोह मनुष्य जीवन के बड़े शत्रु हैं।

इस अवसर पर पूरन सिंह रघुवंशी ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता कोई सामान्य नहीं बल्कि एक ऐसा विशिष्ट व पावन ग्रंथ है जो कि उन सभी 108 उपनिषदों का सार है जिन्हें ऋषि मुनियों ने वेदों की एक लाख ऋचाओं का चिंतन मनन करने के बाद लिखा है। अतः गीता का स्वाध्याय न केवल श्रेष्ठ है बल्कि कल्याणकारी है। रघुवीर सिंह रघुवंशी ने कहा कि गीता के श्रवण व पाठ से बैकुंठ को प्राप्त किया जा सकता है। सूर्यकांत भार्गव ने बताया कि श्रद्धा के साथ लिया गया प्रभु का नाम प्रभु कृपा का कारण बन जाता है और यह स्वाध्याय हमारी आत्मा को प्रभु से जोड़ने का ही माध्यम है।

डॉ. भरत ने कहा कि यह किसी भी सद गृहस्थ के उन छह आवश्यक कार्यों में शामिल है जो उसे प्रतिदिन करना चाहिए। स्वाध्याय के माध्यम से ही हम अपने आत्म कल्याण के मार्ग पर बढ़ सकते हैं। इस अवसर पर श्रद्धा बुधौलिया ने महाभारत का एक प्रेरक प्रसंग को कविता के रूप में सुनाया। अंत में गीता महत्तम पाठ के साथ गीताजी की सामूहिक आरती की गई तथा पुष्प अर्पण व प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम गीता प्रतिष्ठानम के केंद्रीय सह सचिव सुधीर सक्सेना व प्रांतीय सचिव राम सिंह रघुवंशी की उपस्थिति में हुआ।

इस दौरान मोहन प्रसाद शर्मा, रघुवीर सिंह खेजरा, हरिओम शर्मा, ओमप्रकाश दुबे, शिवकुमार शर्मा, राजेश रघुवंशी, अरविंद रघुवंशी, अशोक दीक्षित, सीताराम शर्मा, विजय सिंह बामोरी, घनश्याम सिंह यादव, अरविंद रघुवंशी, शिवकुमार शर्मा सहित समिति सदस्य उपस्थित थे। संचालन दुष्यंत दुबे ने किया। गीता स्वाध्याय का कार्यक्रम माह के प्रथम और तृतीय रविवार को आयोजित किया जाता है। अगला कार्यक्रम आगामी 5 फरवरी को राजेश सिंह रघुवंशी शिक्षक के खड़िया मोहल्ला स्थित निवास पर किया जाएगा।

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