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चंबल की 'शोले' जैसी स्टोरी:43 साल पहले डकैत ने काटे थे ग्रामीण के दोनों हाथ और नाक

पवन दीक्षित। भिंड2 महीने पहले
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डकैतों ने फिल्म शोले के कैरेक्टर ठाकुर की तरह ही चंबल के रहने वाले लाखन सिंह के हाथों के पंजे काट दिए थे।

डकैत गुड्डा गुर्जर अब पुलिस की गिरफ्त में है। ये डकैत चंबल में सक्रिय था। यहां के डकैतों के जुल्म और खौफ की कहानियां तो आपने बहुत सुनी और पढ़ी होंगी, लेकिन आज हम इनके शिकार बने एक ऐसे शख्स की कहानी लेकर आए हैं, जो आपको फिल्म 'शोले' की याद दिलाएगी। फिल्म में जिस तरह खूंखार डाकू गब्बर ने ठाकुर के दोनों हाथ काट दिए थे, उसी तरह चंबल में रहने वाले ग्रामीण लाखन सिंह सिकरवार के दोनों हाथ और नाक काट दी गई थी।

पढ़िए डकैतों की जुल्म की कहानी लाखन सिंह की जुबानी...

लाखन उस दिन को याद करते हुए कहते हैं- मुझे वो दिन आज भी याद है। जब मैं मलपुरा गांव से सुबह लौट रहा था, तभी गौरई के डकैत छोटे सिंह ने पकड़ लिया। 24 घंटे बंधक रखकर नाक और दोनों हाथ काट दिए। रातभर मैं बीहड़ में तड़पता रहा। सुबह पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया।

अड़ोखर के पास टकागांव के रहने वाले लाखन सिंह सिकरवार के दोनों हाथ और नाक 1979 में डकैत छोटे सिंह (ये डकैत सूचीबद्ध नहीं था) ने काट दिए थे।

दस्यु पीड़ित लाखन का कहना है- उस समय मेरी उम्र महज 21 साल थी। डकैत ने मेरे साथ मारपीट की नाक काटी और दोनों हाथों से अपाहिज बना दिया। इसके बाद 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने दस्यु पीड़ितों को 500 रुपए पेंशन के तौर पर देना शुरू किया। ये राशि भी शिवराज सिंह की सरकार ने दस साल पहले बंद करवा दी। लाखन का कहना है कि राहत राशि स्वीकृत कराने को लेकर पिछले दस साल से प्रशासनिक अफसरों के चक्कर काट चुका हूं, अब थक-हारकर बैठ गया हूं और बकरियां चराकर गुजर-बसर कर रहा हूं।

दस्यु पीड़ित लाखन सिंह अब बकरी चराते हैं। 43 साल पहले डकैतों ने उनको दोनों हाथ और नाक काट दिए थे। हाथ नहीं होने की वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
दस्यु पीड़ित लाखन सिंह अब बकरी चराते हैं। 43 साल पहले डकैतों ने उनको दोनों हाथ और नाक काट दिए थे। हाथ नहीं होने की वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शोले फिल्म की तर्ज पर काटे हाथ
‘ये हाथ हमको दे दे ठाकुर’ 1975 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ का यह डायलॉग हर किसी को याद होगा। अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र अभिनीत इस फिल्म में अमजद खान ने खूंखार डकैत ‘गब्बर’ का रोल निभाया था, जो ‘ठाकुर बलदेव’ की भूमिका निभाने वाले संजीव कुमार के दोनों हाथ काट देता है। दस्यु समस्या और बीहड़ों के लिए बदनाम चंबल के भिंड जिले में असल जिंदगी में भी ऐसा ही हुआ था। ये घटना फिल्म शोले की रिलीज के 4 साल बाद 1979 में हुई थी।

दस्यु पीड़ित लाखन सिंह का घर। उनके घर में बकरियां और गाय का छोटा बछड़ा है। लाखन बकरियां चराकर गुजर बसर कर रहे हैं।
दस्यु पीड़ित लाखन सिंह का घर। उनके घर में बकरियां और गाय का छोटा बछड़ा है। लाखन बकरियां चराकर गुजर बसर कर रहे हैं।

पीड़ित की पत्नी बोली- न पेंशन, न नौकरी
पीड़ित लाखन की पत्नी सुशीला देवी का कहना है कि 1984 में लाखन सिंह को तत्कालीन सीएम अर्जुन सिंह के सहयोग से पेंशन मिलना शुरू हुई थी। 10 साल पहले वह बंद कर दी गई। ऐसे में अब लाखन सिंह की गुजर बसर मुश्किल हो गई है। वह अपनी पेंशन फिर से चालू कराने के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। पीड़ित के पास महज डेढ़ बीघा जमीन है। ऐसे में इतनी कम जमीन से उनकी गुजर बसर बेहद ही मुश्किल से हो रही है। हालात यह है कि लाखन सिंह की अब आर्थिक स्थिति खराब है।

कौन था डकैत छोटे सिंह?
छोटे सिंह, छुटभैय्या डकैत था। ये डकैतों की गैंग को रसद दिया करता था। डकैतों के लिए मुखबिरी करता था। ये मूलतः गौरई का रहने वाला था। ये गौरई, मलपुरा, इंदुरखी, अचलपुर समेत कई गांव में घूमता था। पुलिस ने जब इस पर शिकंजा कसना शुरू किया तो डकैत गिरोह की शरण में चला गया। बताया जाता है कि 1981 में वो पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारा गया था।

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डकैत बोला- बेटी से शादी कराओ; नहीं तो तुम्हारे भाई को मार देंगे

चंबल में कुख्यात डकैत ने अपने से 30 साल छोटी लड़की से शादी के लिए उसके चाचा का अपहरण कर लिया है। डकैत पर 70 हजार रुपए का इनाम है। लड़की के पिता को धमकी दी है कि बात नहीं मानी तो भाई को जान से मार देंगे। डकैत का नाम है गुड्‌डा गुर्जर। इस समय वह ग्वालियर-चंबल संभाग का सबसे खूंखार डकैत है। इस पर हत्या, लूट व अपहरण सहित लगभग तीन दर्जन मामले विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज हैं। इसकी न केवल मुरैना बल्कि धौलपुर (राजस्थान), भिंड, ग्वालियर तथा शिवपुरी पुलिस को तलाश है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

कभी 500 रुपए गुंडा टैक्स वसूलता था गुड्‌डा गुर्जर, अब चंबल का कुख्यात

सरकार चंबल में डकैतों के खत्म होने के कितने ही दावे करे, लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी वहां कुख्यात डकैत गुड्डा गुर्जर की दहशत है। 30 हजार से शुरू होकर 60 हजार रु. के इनामी डकैत बने गुड्‌डा ने 500-500 रुपए के टेरर टैक्स वसूली से शुरुआत की थी। बाद में वह 2-2 लाख रुपए तक का टेरर टैक्स क्रशर मालिकों से लेने लगा। ग्वालियर के कारोबारियों को डाक से पत्र भेजकर टेरर टैक्स की मांग करने लगा। गांव में एक हत्या करने के साथ ही उसके डकैत बनने की कहानी शुरू हुई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

डकैत ने गांववालों को पीटा, बोला-जमीन दो या फिर गांव छोड़ो

चंबल के कुख्यात और 65 हजार रुपए के इनामी डकैत गुड्‌डा गुर्जर ने चांचौल गांव के लोगों को गांव खाली करने की धमकी दी है। इस खबर की पुष्टि करने दैनिक भास्कर की टीम मुरैना शहर से लगभग 100 किमी दूर पहाड़गढ़ क्षेत्र के चांचौल गांव पहुंची। वहां बलवीर, नरेश गुर्जर सहित गांव के दर्जन भर ग्रामीणों ने इस बात को सच बताया। उन्होंने कहा कि डकैत ने उन्हें जमीन देने या फिर गांव खाली कर कहीं और बसने का फरमान सुनाया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

गुड्‌डा के रिश्तेदार भी कम नहीं, 6000 फीट पाइपलाइन उखाड़ी; 60 परिवार संकट में

चंबल डकैत तो डकैत उसके रिश्तेदार भी सिर उठा रहे हैं। मामला मुरैना के चांचौल गांव का है। यहां 60 हजार के इनामी डकैत गुड्‌डा के रिश्तेदारों ने पाइपलाइन उखाड़ दी। इससे गांव की 100 बीघा जमीन की सिंचाई होती थी। चंबल में डकैत गुड्‌डा गुर्जर का टेरर तो है ही, उसके बलबूते रिश्तेदार भी आतंक मचा रहे हैं। रिश्तेदारों ने गांववालों का जीना मुश्किल कर रखा है। उन्होंने गुड्‌डा के साथ मिलकर खेतों में पगारा डैम से लाए गए पानी की 6 हजार फीट पाइपलाइन उखाड़ दी है। अब गांव के 60 परिवारों के खेतों में सिंचाई नहीं हो सकेगी। परेशान ग्रामीण गांव छोड़ने को मजबूर हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...