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असली के बीच नकली नोट खपा रहे जालसाज:​​​​​​​बालाघाट में आधे दर्जन व्यापारियों के साथ हो चुका फर्जीवाड़ा, भीड़ देखकर असली में नकली नोट फंसाकर कर रहे ठगी

बालाघाट7 महीने पहले
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200 रुपए का नकली नोट दिखाते हुए। - Money Bhaskar
200 रुपए का नकली नोट दिखाते हुए।

बालाघाट में इन दिनों नकली नोट खपाने का शातिराना खेल चल रहा है। इसका शिकार होने वाले ज्यादातर व्यापारी हैं। बीते दो-तीन दिनों में एक के बाद एक व्यापारियों के पास 200, 50 और 10 रुपए तक के नकली नोट मिलने की सूचना मिल रही है। दुकान में खरीदारी करने आने वाले लोग असली नोटों के बीच एक-दो नकली नोट फंसाकर व्यापारियों के साथ ठगी कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, हफ्तेभर में धोखाधड़ी के इस खेल का लगभग आधे दर्जन व्यापारी शिकार हो चुके हैं। उक्त नकली नोट खासकर बच्चों के खेलने वाले चिल्ड्रन बैंक ऑफ इंडिया व फुल ऑफ फन प्रिंटेड फेक करंसी है। हालांकि, अभी तक किसी व्यापारी ने इस धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस में नहीं की है, लेकिन पुलिस ऐसे गिरोह पर नजर बनाए हुए हैं।

  • केस 1:- हनुमान चौक पर पिछले 40 साल से गारमेंट शॉप संचालित करने वाले भूपेंद्र टांक (68) ने बताया, शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे दो शख्स बच्चों के कपड़े खरीदने आए। उनका एक हजार रुपए का बिल बना। उन्होंने मुझे दो-दो सौ रुपए के पांच नोट दिए, जिसे गिनकर गल्ले में रख दिया। शाम 5 बजे मुझे एक परिचित को 540 रुपए देने थे। गल्ले में रखे उन्हीं दो सौ रुपए के तीन नोट लेकर परिचित को पैसे देने गया। उसने नकली नोट पहचान लिया और मुझे बताया कि इसमें एक नोट नकली है। तब मुझे फर्जीवाड़े का पता चला। इतने साल में पहली बार में मेरे साथ ऐसी ठगी हुई
  • केस 2:- गौली मोहल्ले में हार्डवेयर और पेंट की दुकान संचालक आयुष गुप्ता (29) ने बताया, तीन दिन पहले दोपहर 12 बजे के आसपास एक व्यक्ति दुकान में आठ किलो कील खरीदने आया था। उसका 480 रुपए का बिल बना तो उसने मुझे दो-दो सौ रुपए के तीन नोट दिए। दुकान में ज्यादा भीड़ नहीं थी, इसलिए मैंने इत्मिनान से नोट देखी तो एक नोट चिल्ड्रन बैंक ऑफ इंडिया प्रिंट वाली नकली नोट थी। पूछने पर उसने घर में खेलते हुए बच्चों द्वारा असली नोटों में रख देने की बात कही और असली नोट देकर चला गया। मेरे साथ पहली बार फेक करंसी का मामला हुआ है।
  • केस 3:- बैहर चौकी रेलवे फाटक के पास महेश किराना स्टोर के संचालक अमित सचदेव (39) ने बताया, मेरे साथ पिछले तीन-चार महीने में 5 से 6 बार ये धोखाधड़ी हो चुकी है, जिसमें 50 से 10 रुपए के नकली नोट खपाए हैं। दुकान में अक्सर भीड़ रहती है। कई बार पैसे लेने के बाद नोट तरफ ध्यान नहीं दे पाते इसलिए सिर्फ नोट गिनकर गल्ले में रख देते हैं। हिसाब करने पर फर्जीवाड़े का पता चलता है। हफ्तेभर पहले भी ऐसी घटना हो चुकी है। नकली नोट देने वाले दो लोगों को रोककर पूछा तो उन्हें नकली नोट कहां से मिली हमें नहीं पता कही।

जल्दबाजी में अंतर पहचानना मुश्किल

व्यापारियों के मुताबिक, जिस तरह एक के बाद एक नकली नोट मिलने के मामले सामने आ रहे हैं, इससे तय है कि इसके पीछे कोई रैकेट काम कर रहा है। ऐसे लोग भीड़ ज्यादा होने पर ही दुकान में सामान खरीदने आते हैं और पैसे देते वक्त असली नोटों में नकली नोट फंसाकर दे देते हैं। तब व्यापारी दुकानदारी में व्यस्त होने के कारण जल्दबाजी में असली व नकली में अंतर नहीं पहचान पाता। जब तक उसे पता चलता है तब तक धोखाधड़ी करने वाला रफूचक्कर हो चुका होता है।

5 महीने पहले मिले थे 5 करोड़ के नकली नोट

इस साल 27 जून को जिले की बैहर पुलिस ने 5 करोड़ के नकली नोटों के साथ 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें दो आरोपी गोंदिया से पकड़े गए थे। गौरतलब है कि इन नकली नोटों में 10 से लेकर दो हजार रुपए के नकली नोटों की गड्डी मिली थी।

बालाघाट सीएसपी अपूर्व भलावी ने बताया कि अभी तक पुलिस के संज्ञान में ये मामला नहीं आया है। व्यापारियों के शिकायत के आधार मार्केट में नकली नोट चलाने वाले रैकेट और उसके लिंक का पता लगाने की कार्रवाई करेगी। फिर भी पुलिस ऐसे जालसाजों पर नजर बनाए हुए हैं।