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रतन टाटा की दरियादिली:रतन टाटा कार से 150 किमी. का सफर कर बीमार चल रहे अपने पूर्व कर्मचारी से मिलने पुणे पहुंचे

मुंबई9 महीने पहले
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सोशल मीडिया पर रतन टाटा की ये फोटो वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि रतन टाटा पुणे की फ्रैंड्स कॉलोनी में अपने एक पूर्व कर्मचारी से मिलने के लिए पहुंचे थे। - Money Bhaskar
सोशल मीडिया पर रतन टाटा की ये फोटो वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि रतन टाटा पुणे की फ्रैंड्स कॉलोनी में अपने एक पूर्व कर्मचारी से मिलने के लिए पहुंचे थे।

83 साल के उद्योगपति रतन टाटा ने अपनी सादगी और नेकनियती की मिसाल पेश की है। रतन टाटा ने दो साल से बीमार चल रहे अपने एक पूर्व कर्मचारी से मिलने के लिए कार से 150 किलोमीटर का सफर किया और मुंबई से पुणे पहुंच गए।

योगेश देसाई नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने इस वाकये को लेकर पोस्ट शेयर की है। पोस्ट में दावा किया गया है कि रतन टाटा पुणे की फ्रेंड्स सोसाइटी में अपने पूर्व कर्मचारी से मिलने पहुंचे और उसका हाल-चाल जाना। सोसाइटी में चर्चा है कि रतन टाटा इस कर्मचारी के परिवार का खर्च उठाएंगे। हालांकि, पोस्ट में कर्मचारी का नाम नहीं बताया गया है।

यूजर ने लिखा- वफादार कर्मचारियों के लिए कमिटमेंट
पोस्ट करने वाले योगेश देसाई ने रतन टाटा की अपने पूर्व कर्मचारी से मिलने की फोटो शेयर की है। उन्होंने लिखा, 'इस मुलाकात के दौरान न मीडिया था, न बाउंसर थे। सिर्फ वफादार कर्मचारियों के लिए कमिटमेंट था। सभी बिजनेसमैन को इससे सीख लेनी चाहिए कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता।' योगेश ने एक कमेंट के जवाब में बताया है कि रतन टाटा उसके दोस्त के हाउसिंग सोसायटी पहुंचे थे जहां उन्होंने अपने एक पूर्व कर्मचारी से मुलाकात की। पोस्ट शेयर करने वाले योगेश देसाई प्राइमावर्स टेक्नोलॉजी कंपनी के CEO हैं।

कोरोना के वक्त रतन टाटा ने छंटनी न करने की अपील की थी
कोरोना के वक्त उद्योग जगत में कर्मचारियों की छंटनी को लेकर रतन टाटा ने कहा था कि कॉरपोरेट वर्ल्ड में हमदर्दी की कमी है। उन्होंने उद्योग जगत के दिग्गजों से छंटनी नहीं करने की अपील की थी। टाटा ने कहा था, 'ये वे लोग हैं, जिन्होंने आपके लिए जिंदगीभर काम किया, लेकिन थोड़ी बारिश क्या हुई, आपने उन्हें बाहर ही कर दिया। क्या यही आपके मूल्यों की परिभाषा है?'

मुंबई के ताज होटल पर हुए 26/11 के आतंकी हमले के बाद भी रतन टाटा ने अपने कर्मचारियों की मदद की थी। वे करीब 80 पीड़ित कर्मचारियों के परिवारों से मिले थे और पूरा खर्च उठाने का वादा किया था।