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महाराष्ट्र में नहीं होगा दही हांडी उत्सव:उद्धव बोले- इस साल लोगों की जान बचाना जरूरी; भाजपा नेता ने कहा- हर हाल में मनाएंगे त्यौहार

मुंबई2 महीने पहले
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दही हांडी उत्सव के दौरान इस तरह की भीड़ नजर आती है। ऐसे में अगर यह आयोजन होता तो संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता।- फाइल फोटो - Money Bhaskar
दही हांडी उत्सव के दौरान इस तरह की भीड़ नजर आती है। ऐसे में अगर यह आयोजन होता तो संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता।- फाइल फोटो

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने ऐलान किया है कि इस साल दही-हांडी उत्सव का आयोजन नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ भाजपा नेता राम कदम का कहना है कि वो हर हाल में दही हांडी उत्सव का आयोजन करेंगे।

पिछली बार की तरह इस बार भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गोविंदा मंडलों और दही हांडी उत्सव आयोजन समितियो के साथ वर्चुअल बैठक की। इसी बैठक के दौरान CM ने दही-हांडी का आयोजन नहीं करने की बात कही।बैठक में कोविड टास्क फोर्स के सदस्य, दही हांडी समन्वय समिति के प्रतिनिधि और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।

सरकार की जगह कोविड से लड़ें: उद्धव
बैठक के दौरान CM उद्धव ठाकरे ने कहा, 'त्योहार को लेकर हम सबकी भावनाएं समान हैं, लेकिन अभी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है। पिछले डेढ़ साल से हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ रहे हैं और इसलिए हमें कुछ प्रतिबंधों का पालन करना होगा। कुछ लोग प्रतिबंधों के खिलाफ बोलते हैं। सरकार के खिलाफ आंदोलन करने के बजाय, उन्हें कोविड के खिलाफ लड़ना चाहिए।'

राज्य में ICU की संख्या से चिंता बढ़ी
उद्धव ठाकरे ने कहा कि तीसरी लहर की संभावना और उसके लिए जरूरी ICU की संख्या पर नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ने महाराष्ट्र के लिए चिंता पैदा कर दी है। बैठक के दौरान कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ शशांक जोशी ने कहा कि त्योहार के दौरान हजारों की संख्या में लोग एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और इससे संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहता है। इसलिए ऐसे आयोजनों पर रोक लगनी चाहिए।

बीजेपी नेता ने किया आयोजन का ऐलान
सीएम ठाकरे के साथ बैठक में दही हांडी उत्सव आयोजन समिति ने अपनी जगह पर ही दही हांडी उत्सव का आयोजन करने की परमीशन मांगी थी। साथ ही कहा गया था कि दही हांडी फोड़ने के लिए गोविंदा टोली के सदस्यों को वैक्सीन की दोनों डोज दी जाएंगी। यह भी आश्वासन दिया गया था कि गोविंदा की टोली किसी दूसरी जगह दही हांडी फोड़ने नहीं जाएगी। कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए सुरक्षित दही हांडी उत्सव मनाने की परमीशन मंगी गई थी, जिसे CM की ओर से नकार दिया गया। इसके विरोध में भाजपा नेता राम कदम ने ऐलान किया कि वे हर हाल में दही हांडी उत्सव का आयोजन करेंगे।

जन्माष्टमी पर होता है दही-हांडी उत्सव?
इस उत्सव को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मनाया जाता है। लड़कों का ग्रुप मैदान, सड़क या कम्पाउंड में इकट्ठा होता है और वे पिरामिड बनाकर जमीन से 20-30 फुट ऊंचाई पर लटकी मिट्टी की मटकी को तोड़ते है। महाराष्ट्र और गुजरात में माखन हांडी की प्रथा काफी प्रसिद्ध है, जहां मटकी को दही, घी, बादाम और सूखे मेवे से भरकर लटकाया जाता है।

1907 में मुंबई में शुरू हुई दही हांडी की परंपरा
यह माना जाता है कि नवी मुंबई के पास घणसोली गांव में यह परंपरा पिछले 104 साल से चली आ रही है। यहां सबसे पहले 1907 में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर दही हांडी शुरू हुई थी। मायानगरी में हर साल होने वाली दही हांडी उत्सव की धूम पूरी दुनिया में हैं। सिर्फ देश ही नहीं विदेश से भी लोग यहां दही हांडी उत्सव देखने आते हैं। हांडी फोड़ने पर कुछ मंडल करोड़ों का इनाम भी देते हैं।