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कोरोना तैयारियों का एक पहलू यह भी:रिम्स के सुपरस्पेशियलिटी वार्ड से रिजेक्ट हुए बेड कोविड वार्ड में लगाए, सदर का ऑक्सीजन प्लांट सर्टिफिकेशन में 3 माह से अटका

रांचीएक महीने पहले
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ऊपर की फोटो रिम्स के सुपरस्पेशियलिटी विंग के पीछे की है जहां कबाड़ में फेंके गए बेड, इन्हीं बेड को पार्किंग में बने कोविड वार्ड में लगा दिया गया, रिम्स के पार्किंग कोविड अस्पताल के समीप इंस्टॉल किया गया ऑक्सीजन प्लांट अब भी अधूरा है, पाइपलाइन कनेक्शन का काम अभी भी पेंडिंग है। - Money Bhaskar
ऊपर की फोटो रिम्स के सुपरस्पेशियलिटी विंग के पीछे की है जहां कबाड़ में फेंके गए बेड, इन्हीं बेड को पार्किंग में बने कोविड वार्ड में लगा दिया गया, रिम्स के पार्किंग कोविड अस्पताल के समीप इंस्टॉल किया गया ऑक्सीजन प्लांट अब भी अधूरा है, पाइपलाइन कनेक्शन का काम अभी भी पेंडिंग है।
  • तैयारी को 6 माह मिले फिर भी रिम्स में पर्याप्त बेड नहीं बढ़ा पाए
  • रिम्स के कोविड वार्ड में कुछ बेड इतने जर्जर हैं कि कोई तंदरुस्त मरीज भर्ती हुआ तो टूट जाएगा
  • पहले 2800 बेड थे सरकारी अस्पतालाें में, अब मात्र 520

रिम्स प्रबंधन ने सुपरस्पेशियलिटी विंग समेत अन्य वार्डों से रिजेक्ट किए गए बेड को अब पार्किंग में बने अस्थाई काेविड अस्पताल में तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर कोविड मरीजों के लिए लगाया जा रहा है। यहां 111 बेड लगाकर तैयार किए गए हैं। लेकिन, जो बेड यहां लगाए गए, उनमें से 80% बेड कबाड़ हैं। जंग लगकर पूरा बेड खोखला हो चुका है।

वहीं रिम्स में ऑक्सीजन प्लांट को तैयार करने के लिए दूसरी लहर के बाद छह माह का समय मिला, लेकिन अभी तक पाइपलाइन कनेक्शन नहीं दिया गया, जबकि सदर के ऑक्सीजन प्लांट को 3 माह से सर्टिफिकेशन नहीं मिल पाया है।

रांची के रिम्स व सदर अस्पताल की स्थिति

  • ऑक्सीजन प्लांट 06
  • बेड की उपलब्धता 520
  • कुल वेंटिलेटर 300
  • सीटी स्कैन मशीन 01
  • सरकारी में 2800 और निजी अस्पताल सहित 5175 बेड थे। अब रिम्स में 220, सदर में 300 बेड हैं।
  • रिम्स में 4, इटकी में 1 और सदर में 1 ऑक्सीजन प्लांट (एलएमओ) तैयार हैं, इसमें रिम्स में एक अभी अधूरा और सदर का एक सर्टिफिकेशन में फंसा हुआ है।
  • रिम्स व सदर में 150 और निजी में 180 वेंटिलेटर हैं। दूसरी लहर के बाद वेंटिलेटर में मामूली इजाफा हुआ है।
  • रिम्स में 1 सीटी स्कैन मशीन लग गई है, लेकिन सदर अस्पताल में अभी भी सीटी स्कैन मशीन नहीं लग पाई।
  • वहीं टीकाकरण में भी हम काफी पीछे चल रहे हैं। राेज औसतन 55 हजार लोगों को ही टीके लगाए जाते हैं।
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