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झारखंड में आज से फिर हाेगी बिजली की किल्लत:बकाया न मिलने पर एनटीपीसी ने चेताया, 400 की जगह 250 मेगावाट बिजली ही देंगे; बिजली निगम का खजाना खाली

रांची2 महीने पहलेलेखक: पंकज त्रिपाठी
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एनटीपीसी राेज 400 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है। इसके बदले निगम पर 400 कराेड़ रुपए बकाया हाे गया है। - Money Bhaskar
एनटीपीसी राेज 400 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है। इसके बदले निगम पर 400 कराेड़ रुपए बकाया हाे गया है।

झारखंड में एक बार फिर बिजली की किल्लत हाेने वाली है। बकाया भुगतान न हाेने के कारण एनटीपीसी ने रविवार से बिजली कटाैती की चेतावनी दी है। बिजली निगम काे भेजे पत्र में एनटीपीसी ने कहा है कि शुरुआती दाैर में रविवार से वह 150 मेगावाट कम बिजली की आपूर्ति करेगा। अभी एनटीपीसी राेज 400 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है। इसके बदले निगम पर 400 कराेड़ रुपए बकाया हाे गया है।

एनटीपीसी ने कई बार निगम काे भुगतान के लिए रिमाइंडर भेजा। लेकिन जब भुगतान नहीं हुआ ताे बिजली कटाैती का फैसला किया। दरअसल बिजली निगम का खजाना खाली है। निगम ने एक महीने पहले ही सरकार काे वित्तीय संकट की जानकारी दे दी थी। बताया था कि पैसाें की कमी के कारण मई के वेतन का भुगतान नहीं कर पाया है। निगम ने सरकार से तत्काल 600 कराेड़ रुपए उपलब्ध कराने की मांग की थी। लेकिन इस प्रस्ताव पर अब तक काेई फैसला नहीं हाे सका।

राज्य में पहले से ही 300 मेगावाट बिजली की कमी
राज्य में बिजली की मांग राेज 2100 मेगावाट तक पहुंच गई है, जबकि पीक आवर में 1800 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है। यानी 300 मेगावाट कम। इससे शहरी क्षेत्राें में ताे ज्यादा कटाैती नहीं हाे रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्राें में कट लग रहे हैं। अब रविवार से 150 मेगावाट बिजली और कम पड़ जाएगी। यानी कुल 1650 मेगावाट बिजली मिलेगी। इससे फिर से कटाैती शुरू हाे जाएगी।

निगम के पास दाे विकल्प

1. महंगी बिजली खरीदनी हाेगी, पर पैसे ही नहीं
बिजली की मांग पूरी करने के लिए निगम काे राेजाना महंगी कीमत पर राेज 450 मेगावाट बिजली खरीदनी हाेगी। लेकिन निगम का खजाना पहले से ही खाली है। वह बकाया और वेतन भुगतान ताे कर नहीं पा रहा। ऐसे में बिजली खरीदना उसके लिए सबसे बड़ी चुनाैती हाेगी।

2. बिजली कटाैती ही हल, ऐसे में समस्या बढ़ेगी
अभी शहराें में बिजली कटाैती का ज्यादा असर नहीं है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्राें में कटाैती जारी है। बिजली न खरीद पाने की स्थिति में कटाैती ही एकमात्र हल है। अगर निगम शहरी क्षेत्र में ज्यादा कट नहीं लगाता ताे ग्रामीण क्षेत्राें में दाेगुनी यानी करीब चार-पांच घंटे कटाैती करनी हाेगी।