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रात में रुकने की होगी सुविधा:कोयल, औरंगा-केचकी संगम तट पर बनेंगे 3 टूरिस्ट हट,पलामू व्याघ्र परियोजना के निदेशक ने विभाग को भेजा प्रस्ताव, एक अक्टूबर से खुल सकता है पीटीआर

मेदिनीनगर3 महीने पहले
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कोयल और औरंगा नदी का संगम तट जहां हट बनाने का प्रस्ताव है। - Money Bhaskar
कोयल और औरंगा नदी का संगम तट जहां हट बनाने का प्रस्ताव है।

पर्यटन स्थलों के विकास व पर्यटकों को सुविधा देने के लिए सरकार पूरी तरह संकल्पित है। इसी कड़ी में पलामू व्याघ्र परियोजना के निदेशक कुमार आशुतोष पर्यटकों को आकर्षित करने के नए रास्ते भी ढूंढ रहे हैं। आने वाले दिनों में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उन्होंने कोयल-औरंगा के संगम केचकी नदी के तट किनारे तीन हट तैयार करने का प्रस्ताव विभाग को भेजा है। उनका मानना है कि पलामू व लातेहार की सीमा पर स्थित यह तट इतना मनोरम है कि यहां लोग रात्रि विश्राम भी करेंगे।

इसके अलावा फिल्म निर्माता इसका उपयोग अपनी शूटिंग के लिए भी कर सकते हैं।निदेशक कुमार आशुतोष बताते हैं कि बेतला नेशनल पार्क, जहां इस बार की गिनती में बाघों की संख्या नगण्य पाई गई है। उन्होंने इसे चुनौती से लिया है।उन्होंने दावा किया है कि वन क्षेत्र में बाघ, तेंदूआ आदि हैं। इसके लिए 509 स्थानों पर ट्रैपिंग कैमरा लगाया जा रहा है। यह स्थान पिकनिक स्पाॅट के रूप में भी पलामू प्रमंडल में प्रसिद्ध है।

बाघ और तेंदुए के जमा किए जाएंगे स्केट

कुमार आशुतोष ने बताया कि 1129 वर्ग किलोमीटर में फैले पलामू व्याघ्र क्षेत्र में इस बार कैमरा ट्रैपिंग के अलाव स्केट (टट्टी) जमा भी की जाएगी। इसे देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान को भेजा जाएगा। अभी हाल में ही हमारे चार अधिकारी जिनमें वे स्वयं भी शामिल थे,वन्यजीव संस्थान देहरादून से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे हैं। उन्होंने कहा कि इस स्केट के माध्यम से यह पता चलेगा कि यह लेपर्ड का है या बाघ का। इससे यह भी पता चलने में आसानी होगी कि कितने बाघ या लेपर्ड इलाके में घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे सामान्य जनगणना के लिए 300 ट्रैकर गार्ड को लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि बेतला में 6 ट्री हाउस के प्रारूप के भवन के अलावा कुल 16 कमरे हैं, जिसका संचालन पलामू व्याघ्र आरक्ष करता हैं। इसमें एक कमरे का किराया 1800 रुपए प्रतिदिन निर्धारित है।

एमएसीएच में पीएसए प्लांट का इंस्टॉलेशन शुरू, एक मिनट में मिलेगी 1000 लीटर ऑक्सीजन

प्रधानमंत्री केयर्स फंड से मेदिनीराय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल( एमएमसीएच) में पीएसए प्लांट यानी प्रेशर स्विंग एब्सॉर्प्शन ऑक्सीजन प्लांट के इंस्टालेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है। कार्यकारी एजेंसी एनएचएआई के द्वारा जीएनएम कॉलेज के पिछले हिस्से में शेड को बनाया गया है, जहां पीएसए प्लांट को लगाया गया है। जिसको इंस्टालेशन के कार्य में मेजर इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड, कोलकाता के सर्विस इंजीनियर रविशंकर साव लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि रविवार तक प्लांट को इंस्टॉल कर फंक्शनल बना देने की संभावना है। उसके बाद ऑक्सीजन प्लांट का विधिवत उद्घाटन होगा।

हवा से ऑक्सीजन बनाता है पीएसए प्लांट : पीएसए (प्रेशर स्विंग एब्‍सार्पशन) प्लांट में हवा से ही ऑक्सीजन बनाने की अनूठी तकनीक होती है। इसमें एक चैंबर में कुछ सोखने वाले रासायनिक तत्व डालकर उसमें हवा को गुजारा जाता है। इसके बाद हवा का नाइट्रोजन सोखने वाले तत्वों से चिपककर अलग हो जाता है और ऑक्सीजन बाहर निकल जाती है। इस ऑक्सीजन को ही अस्पतालों को आपूर्ति की जाती है। इसके लिए दबाव काफी उच्च रखना होता है। सोखने वाले तत्वों के रूप में जियोलाइट, एक्टिवेटेड कार्बन और मालीक्यूलर का इस्तेमाल होता है। एमएमसीएच में लगे पीएसए प्लांट को एलएंटी डिफेंस कंपनी के द्वारा बनाया गया है। इसकी क्षमता 1000 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट डिस्चार्ज करने की है।

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