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मिलेगी नई पहचान:वन विभाग इंदौर के सीसीएफ मोहंता रानी रूपमती महल पहुंचे, वाच टाॅवर लगाने के लिए जगह देखी

मांडू3 महीने पहले
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मांडू. टेलीस्कोप लगाने के लिए जगह का निरीक्षण करते ससीएफ मोहंता व साथ में अन्य अधिकारी। - Money Bhaskar
मांडू. टेलीस्कोप लगाने के लिए जगह का निरीक्षण करते ससीएफ मोहंता व साथ में अन्य अधिकारी।
  • मांडू के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वन मंत्री की एक और पहल

मां नर्मदा के दर्शन कराने की मुहिम तेज हो गई है। वन विभाग मांडू के रानी रूपमती महल के समीप पहाड़ी क्षेत्र में वाच टाॅवर के माध्यम से टेलीस्कोप दूरबीन हाई क्वालिटी का लगाने जा रहा है। रविवार को वन विभाग इंदौर के सीसीएफ स्थान देखने पहुंचे और चयनित किया। स्थान उनके साथ और भी कई अधिकारी थे।

वहीं वन विभाग के धार एसडीओ के साथ मांडू वन परिक्षेत्र के अधिकारी कर्मचारी भी मौजूद थे। 2 दिन पहले रेंजर आफताब खान ने मौका निरीक्षण कर सूचना दी थी उसके बाद स्वयं सीसीएफ मांडू आए। रूपमती की पहाड़ी से टेलिस्कोप दूरबीन के माध्यम से मांडू के इतिहास के साथ पर्यटक अब नर्मदा के दर्शन करेंगे।

अफसरों ने बताया कि 3500 फीट ऊंचे महल से रानी नर्मदाजी के दर्शन करती थीं। मांडू से नर्मदाजी व धरमपुरी की दूरी 24 किलोमीटर है। 15 से 20 लाख रुपए की कार्य योजना है। वन विभाग के अधिकारी दिसंबर महीने तक इस कार्य को पूरा करने बात कह रहे हैं। मालूम हो कि कुछ दिनों पहले प्रदेश के वन मंत्री कुंवर विजय शाह धार आए थे। उन्होंने वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की बैठक ली थी।

सबसे पहले उन्होंने मांडू के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रानी रूपमती महल की पहाड़ी पर वॉच टावर लगाने का प्रस्ताव और उस पर दूरबीन से नर्मदा के दर्शन कराने की पहल की थी। यह पहल मांडू आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए कारगर साबित होगी। सीसीएफ हरिशंकर मोहंता ने कहा कि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर इस कार्य को मूर्त रूप देंगे। जल्द ही मांडू पहुंचकर स्थान तय कर यहां वॉच टावर और उच्च क्वालिटी का टेलिस्कोप लगाने का प्रस्ताव बना रहे हैं। नवंबर महीने तक हम इस कार्य को मूर्त रूप दे देंगे पूरा प्लान तैयार करा रहे हैं।

रानी रोज करती थीं मां नर्मदा के दर्शन
एक दौर था जब मांडू की हसीन वादियों स्थित रानी रूपमती महल के झरोखे से रानी रूपमती मां नर्मदा के दर्शन किया करती थीं। प्रदूषण बढ़ने के बाद मांडू से नर्मदाजी के दर्शन नहीं हो पा रहे थे, लेकिन अब सुबह जब वातावरण में ज्यादा कोहरा और धुंध नहीं होती है तो झरोखे से मां नर्मदाजी के दर्शन स्पष्ट तरीके से हो जाते हैं।

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